Did the cloud really burst? Weather department’s shocking report: उत्तराखंड के उत्तरकाशी में कुदरत ने एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाया है। धराली और सुक्खी टॉप में आए भीषण सैलाब ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया है। चारों तरफ तबाही और मलबा ही नजर आ रहा है। इस त्रासदी ने चार लोगों की जान ले ली है, जबकि 50 से ज़्यादा लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। (Nature’s fury in Uttarakhand: Flood in Dharali causes massive destruction, 4 dead, 50 people missing)
यह भयानक मंज़र जिसने भी देखा, उसके दिल में डर बैठ गया है। लोगों के ज़हन से तबाही की यह तस्वीरें मिटाए नहीं मिट रही हैं। शुरुआत में इस तबाही की वजह बादल फटना मानी जा रही थी, लेकिन अब देहरादून के मौसम विभाग ने इस बात से साफ इनकार कर दिया है।
धराली के साथ-साथ सुक्खी टॉप में भी मचा हाहाकार
आमतौर पर ऐसी घटनाओं में लोग सिर्फ़ मुख्य प्रभावित जगहों की बात करते हैं, लेकिन इस बार धराली के अलावा पास ही में स्थित सुक्खी टॉप में भी सैलाब आया। हालांकि, यहां गनीमत रही कि कोई भी हताहत नहीं हुआ। धराली से कुछ ही दूरी पर स्थित इस जगह पर भी बादल फटने जैसी घटना हुई, जिससे भारी तबाही मची, लेकिन किसी की जान नहीं गई।
धराली में हालात बहुत ज़्यादा खराब हैं। खीर गंगा नदी में अचानक आए सैलाब ने पूरे खीर गंगा इलाके को मलबे में बदल दिया है। यहाँ लगभग 20-25 घर और कुछ होमस्टे पूरी तरह से बह गए हैं। यह मंजर देखकर हर कोई डर से कांप उठा है।
लापता लोगों की तलाश जारी, केंद्र सरकार ने दी हर संभव मदद का भरोसा
इस आपदा में अब तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इसके अलावा, करीब 50 लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनमें से 10 सेना के जवान भी शामिल हैं। आपदा की सूचना मिलते ही केंद्र सरकार भी तुरंत हरकत में आ गई। गृह मंत्री अमित शाह ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी से बात की और हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस हादसे पर दुख जताया है और राहत-बचाव कार्यों में पूरी मदद का आदेश दिया है। NDRF और ITBP की टीमें मौके पर पहुंच गई हैं और बचाव कार्य में जुटी हुई हैं। उत्तराखंड सरकार के मुताबिक, अब तक 138 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। वायुसेना भी ज़रूरत पड़ने पर मदद के लिए तैयार है।
धराली की भौगोलिक स्थिति और खतरे
धराली, समुद्र तल से करीब 2,700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और हिमालय की वादियों में बसा है। यह जगह पर्यटकों और तीर्थयात्रियों के लिए एक बड़ा आकर्षण है। धार्मिक रूप से भी इसका काफी महत्व है। इसे मां गंगा का मायका (मुखबा) भी कहा जाता है, क्योंकि सर्दियों में जब गंगोत्री मंदिर बंद हो जाता है, तो मां गंगा की मूर्ति को पास के मुखबा गांव में लाया जाता है।
लेकिन, यह क्षेत्र भूस्खलन और प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज़ से बहुत संवेदनशील है। इसके पीछे तीन बड़ी वजहें हैं:
सामान्य से ज़्यादा बारिश: यहां अक्सर सामान्य से ज़्यादा बारिश होती है।
कमज़ोर मिट्टी: यहां की मिट्टी में पकड़ कमज़ोर है, जिससे भूस्खलन का खतरा हमेशा बना रहता है।
मानवीय दखल: विकास के नाम पर पहाड़ों को काफ़ी अंदर तक खोदा गया है, जिससे उनकी स्थिरता कमजोर हुई है।
इन तीनों वजहों से यहां भूस्खलन और पहाड़ दरकने की घटनाएं बहुत ज़्यादा होती हैं। गढ़वाल क्षेत्र की चट्टानों और मिट्टी की संरचना ऐसी है कि यह भारी बारिश में आसानी से ढह सकती है। मौजूदा घटना में भी यही हुआ है।
क्या वाकई फटा था बादल? मौसम विभाग की चौंकाने वाली रिपोर्ट
जहां एक तरफ हर कोई इस त्रासदी की वजह बादल फटने को मान रहा था, वहीं देहरादून मौसम विभाग ने एक चौंकाने वाली रिपोर्ट जारी की है। विभाग ने साफ-साफ कहा है कि उत्तरकाशी में मंगलवार को बादल फटने की कोई घटना रिकॉर्ड नहीं हुई। मौसम विज्ञानी रोहित थपलियाल के मुताबिक, बादल फटने पर एक घंटे में 100 मिलीमीटर से ज़्यादा बारिश होती है, जबकि उत्तरकाशी में सिर्फ 30 से 40 मिलीमीटर ही बारिश दर्ज की गई।
क्या हो सकती है असली वजह?
मौसम विभाग ने अपनी रिपोर्ट दिल्ली भेज दी है और संभावित कारणों को लेकर दो बड़ी आशंकाएं जताई हैं:
झील का टूटना: संभव है कि उत्तरकाशी के ऊपरी इलाकों में कोई झील बन गई हो, और उसके अचानक टूटने से यह सैलाब आया हो।
ग्लेशियर का पिघलना: दूसरी आशंका यह है कि ऊपरी इलाकों में मौजूद कोई ग्लेशियर अचानक से तेज़ी से पिघल गया हो, और उसका पानी तेज़ी से नीचे आने से यह तबाही मची हो।