सिलवानी। नगर परिषद बनने के 17 साल बाद भी सिलवानी के वार्ड नंबर-1 के लोगों की जिंदगी हर बारिश में ठहर जाती है। जमुनियापुरा और बगियापुरा की कॉलोनियों को मुख्य नगर से जोड़ने के लिए अब तक पक्के पुल का निर्माण नहीं हुआ है। नतीजा यह है कि जैसे ही बेगम नदी में पानी बढ़ता है, रपटे पर पानी भर जाता है और लोगों का आना-जाना पूरी तरह ठप हो जाता है।
बरसात का मौसम यहां के रहवासियों के लिए किसी बंदिश की तरह आ जाता है। घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है, बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, मरीज अस्पताल नहीं पहुंच पाते और जरूरत की चीजें लाना भी एक चुनौती बन जाती है। लोग मजबूरी में जान जोखिम में डालकर रपटा पार करते हैं, क्योंकि दूसरा कोई रास्ता नहीं होता।
जन प्रतिनिधियों की अनदेखी से बढ़ा गुस्सा
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब यहां ग्राम पंचायत थी, तब सीमित बजट में भी रपटा बनवा दिया गया था। लेकिन जब सिलवानी नगर परिषद बनी और इन दोनों मोहल्लों को वार्ड-1 में शामिल किया गया, तब लोगों को उम्मीद जगी कि अब विकास होगा। मगर 17 साल बाद भी यहां पुल नहीं बन सका। अब लोगों में आक्रोश है और वे कहने लगे हैं कि ऐसी नगर परिषद का कोई फायदा नहीं, जो लोगों की मूलभूत समस्याओं को ही न सुलझा सके।
हर साल वही कहानी दोहराई जाती है
सोमवार रात से शुरू हुई तेज बारिश मंगलवार तक जारी रही। इसी के साथ सिलवानी की बेगम नदी भी उफान पर आ गई। नदी पर बना रपटा पूरी तरह पानी में डूब गया और जमुनियापुरा और बगियापुरा के लोग अपने ही घरों में कैद होकर रह गए। यह हालात हर साल बरसात में देखने को मिलते हैं, लेकिन प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
बच्चे स्कूल नहीं जा पाते, मरीज फंसे रहते हैं
रहवासियों ने बताया कि बारिश के मौसम में बच्चों को स्कूल भेजना किसी खतरे से कम नहीं होता। कभी-कभी स्कूल पहुंच भी गए तो वापस लौटना मुश्किल हो जाता है। कई बार मरीजों को समय पर अस्पताल नहीं ले जा पाने की वजह से स्थिति गंभीर हो जाती है। हर छोटी-बड़ी जरूरत के लिए लोग परेशानी झेलते हैं।
कहने को शहरी क्षेत्र, लेकिन हालात गांव से बदतर
हालांकि यह क्षेत्र अब नगर परिषद के अंतर्गत आता है, लेकिन यहां की हालत किसी पिछड़े गांव से भी बदतर है। लोगों का कहना है कि जब विकास की योजनाएं बनती हैं, तो उन्हें कागजों तक ही सीमित रखा जाता है। जमीनी स्तर पर वार्ड-1 की अनदेखी होती रही है।
कब मिलेगा स्थायी समाधान?
अब सवाल उठता है कि आखिर इन रहवासियों की परेशानी का स्थायी समाधान कब मिलेगा? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? बार-बार ज्ञापन देने और शिकायतें करने के बावजूद न तो पुल बना और न ही वैकल्पिक व्यवस्था की गई।
निष्कर्ष:
वार्ड-1 के रहवासी बरसात में सिर्फ अपने ही घरों में कैद नहीं होते, बल्कि उनकी उम्मीदें, जरूरतें और अधिकार भी इस पानी में डूब जाते हैं। अब जरूरत है कि जिम्मेदार लोग इस समस्या को गंभीरता से लें और पुल निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाएं।