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रक्षाबंधन 2025: सोने-चांदी की राखियों ने बढ़ाई बाजार की चमक, रंग-बिरंगे रेशमी धागों से सजी दुकानों में उमड़ी भीड़

रक्षाबंधन 2025 को लेकर लखनऊ और आसपास के इलाकों में बाजारों में रौनक है। इस बार सोने-चांदी की राखियों की मांग बढ़ी है। रेशमी धागों से लेकर धार्मिक और कस्टम राखियों की भी खूब बिक्री हो रही है। भाई-बहन के प्रेम के इस पर्व पर बाजार में उत्सव जैसा माहौल है।

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लखनऊ रक्षाबंधन जैसे पवित्र त्योहार की तैयारियां जोरों पर हैं और इस बार भाई की कलाई को सजाने के लिए बहनें कुछ खास और नया करने को उत्सुक हैं। यही वजह है कि बाजारों में इस बार पारंपरिक राखियों के साथ-साथ सोने-चांदी की राखियों की जबरदस्त मांग देखने को मिल रही है।

लखनऊ के बीकेटी, इटौंजा, जानकीपुरम, इंद्रानगर, अमीनाबाद, अलीगंज, चौक, कपूरथला समेत शहर के प्रमुख इलाकों में बाजार सज चुके हैं और हर तरह की राखियों से दुकानें भर गई हैं। खास बात ये है कि इस बार केवल रंग-बिरंगे रेशमी धागों की राखियां ही नहीं, बल्कि भाई के नाम और फोटो वाली कस्टम राखियों के ऑर्डर भी खूब आ रहे हैं।

रेशमी धागों से सजी दुकानों में बढ़ी रौनक
शहर के रिटेल से लेकर थोक बाजार तक रेशम के धागों से बनी राखियों की खूब डिमांड है। जानकीपुरम के 60 फिट रोड पर दुकानदार मुकेश बताते हैं कि इस बार गुलाब के फूल की डिजाइन वाली राखी, बाल गोपाल, हनुमानजी, छोटा भीम, मोटू-पतलू और भैया-भाभी राखियों की खूब बिक्री हो रही है। कीमतें 50 रुपये से शुरू होकर 350 रुपये तक हैं।

सोने-चांदी की राखियों का बढ़ा क्रेज
पिछले कुछ वर्षों से राखियों में बदलाव देखने को मिल रहा है और अब बहनें भाई के लिए सोने-चांदी की राखियां खरीदने लगी हैं। बीकेटी के सराफा बाजार में सोने की राखी 5000 से 7000 रुपये और चांदी की राखी 800 से 1000 रुपये तक में मिल रही हैं।

राज ज्वेलर्स के निदेशक राजपाल सिंह बताते हैं कि चांदी की राखी को शुभ माना जाता है और इसे बाद में पेंडेंट की तरह गले में भी पहना जा सकता है। इसी वजह से इसकी ओर महिलाओं का झुकाव बढ़ा है। उन्होंने कहा कि उनके यहां हर दिन 10 से 15 सोने-चांदी की राखियां बिक रही हैं।

धार्मिक राखियों की भी डिमांड
इस बार धार्मिक भावनाओं से जुड़ी राखियों का चलन भी खूब है। गणेश, लक्ष्मी और शिव की राखियों की काफी मांग है। आध्यात्मिक और शुभ चिन्हों से सजी राखियां बाजार की शोभा बढ़ा रही हैं और खरीदारों की पहली पसंद बन रही हैं।

शहर से गांव तक उत्सव का रंग
रक्षाबंधन का जोश सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं है। बख्शी का तालाब, मड़ियांव, इटौंजा जैसे ग्रामीण क्षेत्रों के बाजारों में भी राखियों की दुकानें सज चुकी हैं। यहां की महिलाएं भी इस बार कुछ नया करने को आतुर हैं और सोने-चांदी की राखियों की तरफ खासा आकर्षण दिखा रही हैं।

भाई-बहन के रिश्ते को और गहरा करेगा ये त्योहार
रक्षाबंधन न केवल एक पर्व है बल्कि भाई-बहन के रिश्ते की गहराई और प्यार का प्रतीक भी है। इस बार जब बहनें भाई की कलाई पर सोने या चांदी की राखी बांधेंगी, तो वह न केवल रिश्ते को मजबूत करेगा बल्कि यादगार भी बनेगा।

निष्कर्ष
त्योहारों में बदलाव समय के साथ होता है और रक्षाबंधन 2025 इसका सटीक उदाहरण है। जहां परंपरा और आधुनिकता का संगम देखने को मिल रहा है, वहीं बाजार की रौनक यह बताने के लिए काफी है कि इस साल रक्षाबंधन पहले से भी ज्यादा खास और चमकदार होने वाला है।

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अजय सिंह चौहान लखनऊ

अजय सिंह चौहान – एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार अजय सिंह चौहान लखनऊ (उत्तर प्रदेश) निवासी एक वरिष्ठ और सम्मानित पत्रकार हैं, जिन्होंने पत्रकारिता और जनसंचार के क्षेत्र में पिछले ढाई दशकों से उल्लेखनीय योगदान दिया है। वर्ष 2009 में उन्होंने आगरा से पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद वे निरंतर पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहे और उत्तर प्रदेश के विभिन्न प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में लखनऊ जिले के संवाददाता के रूप में कार्य करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई। अपने 25 वर्षों के व्यापक अनुभव के दौरान अजय सिंह चौहान ने जमीनी स्तर की रिपोर्टिंग, जनहित से जुड़े मुद्दों और क्षेत्रीय समाचारों को मजबूती से उठाया। उन्होंने पत्रकारिता को केवल एक पेशा न मानकर, समाज सेवा का सशक्त माध्यम माना और हमेशा निष्पक्ष, निर्भीक व जनपक्षधर लेखन को प्राथमिकता दी। वर्तमान में अजय सिंह चौहान मध्य प्रदेश के प्रमुख हिन्दी दैनिक स्वदेश के लखनऊ संस्करण में ब्यूरो प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं। उनकी लेखन शैली, अनुभव और जनसरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता ने उन्हें न केवल एक कुशल पत्रकार, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत भी बना दिया है।

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