लखनऊ। उत्तर प्रदेश सचिवालय में एक महिला समीक्षा अधिकारी के साथ कथित छेड़छाड़ और धमकी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने इस प्रकरण में तत्काल एफआईआर दर्ज करने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने सोमवार को हजरतगंज थाने के इंस्पेक्टर को पत्र लिखकर इस मामले की पूरी जांच कर न्यायसंगत कदम उठाने का आग्रह किया।
अमिताभ ठाकुर के अनुसार, उन्हें गोपन अनुभाग 4 की एक महिला समीक्षा अधिकारी के दो पत्र प्राप्त हुए हैं। इन पत्रों में गंभीर आरोप लगाए गए हैं कि गोपन अनुभाग 3 के अनुभाग अधिकारी विजय कुमार सिंह और गोपन अनुभाग 7 के सहायक समीक्षा अधिकारी बृजेश श्रीवास्तव ने महिला अधिकारी के साथ अशोभनीय व्यवहार किया, जिसमें छेड़छाड़ और धमकी जैसे आपराधिक तत्व शामिल हैं।
अब तक नहीं हुई कोई कार्रवाई
पत्रों के मुताबिक, महिला अधिकारी ने पहले ही इन घटनाओं की जानकारी पत्र के माध्यम से संबंधित अधिकारियों को दे दी थी, लेकिन इन शिकायतों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इसी निष्क्रियता को लेकर अमिताभ ठाकुर ने सवाल उठाए हैं और थाने से अनुरोध किया है कि इन पत्रों की सत्यता की तुरंत जांच की जाए और यदि आरोप सही पाए जाएं तो तुरंत एफआईआर दर्ज कर आरोपियों को कानून के तहत दंडित किया जाए।
अपर मुख्य सचिव को भी भेजा गया पत्र
अमिताभ ठाकुर ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पत्र की एक प्रति उत्तर प्रदेश के अपर मुख्य सचिव, गृह विभाग को भी भेजी है। इसमें उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि जांच में महिला अधिकारी की शिकायतें सही पाई जाती हैं तो दोनों आरोपी अधिकारियों को तुरंत निलंबित किया जाए और उनके खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई की जाए।
महिला सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
यह मामला सचिवालय जैसे अत्यधिक सुरक्षित और प्रतिष्ठित सरकारी परिसर से जुड़ा है, जहां महिलाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाती है। ऐसे में यदि वहीं पर कोई महिला अधिकारी असुरक्षित महसूस करती है और उसे न्याय नहीं मिल रहा है, तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है।
अमिताभ ठाकुर ने यह भी कहा कि सचिवालय में कार्यरत किसी भी महिला अधिकारी के साथ इस तरह का व्यवहार न केवल उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाता है, बल्कि यह कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा के लिए बनाई गई सरकारी नीतियों की भी अनदेखी है।
निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग
उन्होंने प्रशासन और पुलिस से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच हो और जो भी दोषी हों, उन्हें कानून के अनुसार सजा मिले ताकि कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों को दबाना या नजरअंदाज करना एक महिला अधिकारी के आत्मसम्मान और सुरक्षा के साथ अन्याय होगा।
यह मामला अब सिर्फ एक शिकायत नहीं रह गया, बल्कि पूरे प्रदेश में महिला कर्मचारियों की कार्यस्थल पर सुरक्षा को लेकर एक बड़ी बहस का विषय बनता जा रहा है।
निष्कर्ष
यह देखना अब अहम होगा कि प्रशासन और पुलिस इस मामले में कितनी तेजी और गंभीरता दिखाते हैं। क्योंकि सचिवालय जैसी जगह पर ऐसी घटनाएं यदि सामने आती हैं और उन पर कार्रवाई नहीं होती, तो यह भविष्य में और भी गंभीर परिणाम ला सकती हैं।