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झालावाड़ के सरकारी स्कूल हादसे में 7 मासूमों की मौत, लापरवाही पर भड़की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे, सरकार ने दिए जांच और राहत के निर्देश

राजस्थान के झालावाड़ जिले के पिपलौद गांव में एक सरकारी स्कूल की छत गिरने से 7 बच्चों की मौत और 28 घायल हो गए। हादसे के बाद पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने घायलों से मुलाकात की। सरकार ने 200 करोड़ की मरम्मत योजना शुरू कर दी है और स्कूल स्टाफ को सस्पेंड कर जांच के आदेश दिए गए हैं।

On: July 26, 2025 12:00 PM
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झालावाड़ (राजस्थान)। राजस्थान के झालावाड़ जिले में शुक्रवार सुबह दिल दहला देने वाला हादसा हुआ, जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। जिले के पिपलौद गांव स्थित एक सरकारी स्कूल की पुरानी और जर्जर इमारत सुबह की प्रार्थना सभा के दौरान भरभराकर ढह गई, जिसकी चपेट में आकर 7 मासूम बच्चों की मौके पर मौत हो गई, जबकि 28 से ज्यादा बच्चे घायल हो गए। कुछ बच्चों की हालत अभी भी गंभीर बताई जा रही है और उनका इलाज अस्पताल में जारी है।

सुबह की प्रार्थना सभा बनी काल, मलबे में दब गए बच्चे
यह हादसा सुबह उस समय हुआ जब बच्चे रोज़ की तरह स्कूल में प्रार्थना सभा के लिए एकत्र हो रहे थे। अचानक पुरानी स्कूल बिल्डिंग की छत और दीवारें भरभराकर गिर पड़ीं। बच्चों को संभलने का मौका तक नहीं मिला और वे मलबे में दब गए। स्कूल में चीख-पुकार मच गई, स्थानीय लोग और प्रशासन मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू हुआ। प्रशासन की मदद से घायल बच्चों को मनोहर थाना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और झालावाड़ जिला अस्पताल भेजा गया।

घायलों से मिलने पहुंचे वसुंधरा राजे और शिक्षा मंत्री
हादसे की खबर मिलते ही पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अपने बेटे सांसद दुष्यंत सिंह के साथ अस्पताल पहुंचीं, जहां उन्होंने घायलों का हालचाल जाना और उनके परिजनों को ढांढस बंधाया। उन्होंने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि अगर समय रहते शिक्षा विभाग ने स्कूल भवन की जर्जर स्थिति को पहचाना होता, तो शायद इन मासूम बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।

वहीं, राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर भी घटनास्थल और अस्पताल पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवारों को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया और कहा कि सरकार घायलों के इलाज में कोई कमी नहीं होने देगी।

लापरवाही पर फूटा गुस्सा, शिक्षा विभाग की कार्रवाई
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने सीधे तौर पर शिक्षा विभाग की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने मांग की कि पूरे राज्य में सरकारी स्कूलों की इमारतों का सर्वे कराया जाए और जिन स्कूलों की स्थिति जर्जर है, उन्हें तुरंत खाली कराया जाए। इस बीच सरकार ने फौरन कार्रवाई करते हुए स्कूल के 5 शिक्षकों को सस्पेंड कर दिया है। प्रशासन की ओर से इस मामले की जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।

प्रदर्शन और पथराव, कई लोग हिरासत में
हादसे के बाद ग्रामीणों और परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। SRG अस्पताल और गुराड़ी सर्कल पर लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और सड़क जाम कर दी। इस दौरान वहां मौजूद पुलिस टीम पर पथराव भी हुआ, जिसमें एक पुलिसकर्मी घायल हो गया। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को हटाया और कांग्रेस नेता नरेश मीणा को हिरासत में ले लिया, जो प्रदर्शन में शामिल हुए थे।

अभी भी 20 से ज्यादा बच्चे भर्ती
फिलहाल झालावाड़ और मनोहर थाना अस्पतालों में करीब 20 बच्चे भर्ती हैं, जिनमें से कई की हालत गंभीर बनी हुई है। डॉक्टर्स लगातार इलाज में जुटे हैं और प्रशासन ने चिकित्सा सुविधा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।

सरकार का ऐलान – इलाज निःशुल्क और 200 करोड़ की स्वीकृति
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सभी घायलों का इलाज पूरी तरह निःशुल्क कराया जाएगा और किसी भी जरूरतमंद को अस्पताल में कोई दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि राज्य सरकार ने 200 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है, जिससे प्रदेश के सभी जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत कराई जाएगी।

मदन दिलावर भरतपुर दौरे पर थे, लेकिन जैसे ही हादसे की सूचना मिली, वे कार्यक्रम छोड़कर तुरंत झालावाड़ पहुंचे।

सीएम और राज्यपाल ने जताया शोक
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने इस हादसे को “अत्यंत दुखद एवं हृदयविदारक” बताते हुए एक्स (पूर्व ट्विटर) पर शोक संवेदना प्रकट की। उन्होंने लिखा कि “झालावाड़ के पीपलोदी गांव में विद्यालय की छत गिरने से जो हादसा हुआ, वह बेहद पीड़ादायक है। मैंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि घायलों के इलाज में कोई कमी न रहे और पीड़ित परिवारों को पूरी सहायता मिले।”

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने भी इस घटना पर शोक व्यक्त किया और दिवंगत बच्चों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई।

प्रशासन सतर्क, राहत कार्य जारी
घटना के बाद से जिला प्रशासन सतर्क है और लगातार राहत एवं बचाव कार्यों पर नजर बनाए हुए है। घटनास्थल की घेराबंदी कर दी गई है और इमारत के मलबे की जांच की जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं रोकी जा सकें।

जरूरत है ईमानदारी और संवेदनशीलता की
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर किया है। हजारों स्कूल आज भी जर्जर भवनों में चल रहे हैं, जहां बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। जब तक व्यवस्थाएं कागजों से बाहर आकर जमीन पर नहीं उतरेंगी, तब तक ऐसी त्रासदियां होती रहेंगी।



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