रायसेन जिले की देवरी तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत रम्पुरा और रिछावर के ग्रामीण पिछले 20 दिनों से एक बड़ी परेशानी से जूझ रहे हैं। खराब और जर्जर रास्ते के कारण दोनों गांवों के लगभग 200 बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है, वहीं बीमार मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी बड़ी दिक्कतें आ रही हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीणों ने राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल और बीजेपी मंडल अध्यक्ष सुनील कुमार लोधी से गुहार लगाई है।
20 दिन से बंद है बच्चों की स्कूल जाने की राह
ग्रामीणों का कहना है कि रम्पुरा और रिछावर के स्कूली बच्चे पिछले 20 दिनों से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। खासकर 10वीं और 12वीं के छात्र-छात्राएं मानसिक तनाव का शिकार हो रहे हैं, क्योंकि बोर्ड परीक्षाएं नजदीक हैं और वे पढ़ाई से पूरी तरह कट चुके हैं। ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर जिला प्रशासन से लेकर देवरी के अधिकारियों तक कई बार शिकायत की, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला है।
आपात स्थिति में मरीजों को नहीं मिल रही समय पर मदद
शिक्षा ही नहीं, इस जर्जर रास्ते का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी देखने को मिल रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति को इमरजेंसी में अस्पताल ले जाना हो तो रास्ते की हालत इतनी खराब है कि कई बार मरीज की हालत रास्ते में ही बिगड़ जाती है। कुछ मामलों में तो मरीजों को समय पर अस्पताल न पहुंचा पाने की वजह से जान का खतरा तक बन गया है।
जनप्रतिनिधियों से लगाया सवाल – क्या नेता सिर्फ चुनाव के वक्त ही आते हैं?
ग्रामीणों में नाराजगी साफ देखी जा सकती है। उनका कहना है कि चुनाव के समय सभी नेता गांव-गांव घूमकर बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन जब असली समस्या आती है, तो कोई सुनवाई नहीं होती। ग्रामवासियों ने सवाल उठाया है कि क्या हमारे गांवों के विकास की जिम्मेदारी केवल चुनावी भाषणों तक ही सीमित है?
जनप्रतिनिधियों से की भावुक अपील
ग्रामवासियों ने राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल से अपील करते हुए कहा कि कृपया हमारी स्थिति को समझें और इस मामले को गंभीरता से लेते हुए त्वरित समाधान करें। दोनों गांवों की सड़कें जल्द से जल्द दुरुस्त कराई जाएं ताकि बच्चों की शिक्षा और गांव की स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य हो सकें।
स्थानीय नेताओं से भी उम्मीद
बीजेपी मंडल अध्यक्ष सुनील कुमार लोधी सहित क्षेत्र के अन्य जनप्रतिनिधियों से भी ग्रामीणों ने सहयोग की अपेक्षा जताई है। उनका कहना है कि अब समय है जब नेताओं को जनभावनाओं के साथ खड़े होना चाहिए और इस जमीनी समस्या का हल निकालना चाहिए।
निष्कर्ष
रम्पुरा और रिछावर जैसे गांवों की ये समस्या न केवल विकास की असल तस्वीर को उजागर करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि बुनियादी सुविधाओं की अनदेखी कैसे एक पूरे समाज को प्रभावित करती है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस गुहार को कब तक सुनते हैं और समाधान कब तक निकलता है।