लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की गति को और तेज करने के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत 18 अरब 83 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि जारी की है। यह फंड सामग्री मद (Material Component) के तहत स्वीकृत किया गया है, जिससे गांवों में निर्माण कार्यों को बढ़ावा मिलेगा।
इस राशि की मंजूरी प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के निर्देशों पर ग्राम्य विकास विभाग द्वारा दी गई है। इसके लिए शासन की तरफ से आवश्यक आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
राशि का वितरण कैसे हुआ?
इस कुल राशि ₹18,83,12,00,000 (अठ्ठारह अरब तिरासी करोड़ बारह लाख रुपये) का वितरण दो भागों में किया गया है:
केंद्रांश (प्रथम किश्त): ₹14,12,34,00,000 (चौदह अरब बारह करोड़ चौंतीस लाख रुपये)
राज्यांश (1/3 भाग): ₹4,70,78,00,000 (चार अरब सत्तर करोड़ अठहत्तर लाख रुपये)
इस तरह कुल मिलाकर प्रदेश के विभिन्न जिलों में मनरेगा के तहत सामग्री की खरीद और निर्माण कार्यों के लिए बड़ी धनराशि उपलब्ध कराई गई है।
किन कामों में होगा इस राशि का उपयोग?
यह धनराशि गांवों में रोजगार सृजन और निर्माण कार्यों के लिए खर्च की जाएगी। जैसे:
पंचायत भवनों का निर्माण
सीसी रोड और नालियों का निर्माण
सार्वजनिक स्थलों की मरम्मत और सुधार
खेत तालाब, मिट्टी कार्य और अन्य ग्रामीण आधारभूत संरचनाएं
यह सभी कार्य मनरेगा के दिशा-निर्देशों और मितव्ययिता से जुड़े नियमों के अनुसार होंगे।
सख्त निगरानी और नियमों का पालन अनिवार्य
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि यह राशि ससमय और पारदर्शी तरीके से खर्च होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि धनराशि निकालने और खर्च करने में वित्तीय अनुशासन और शासन द्वारा समय-समय पर जारी किए गए मितव्ययिता से जुड़े निर्देशों का पूरी तरह पालन किया जाए।
क्या बोले केशव प्रसाद मौर्य?
उपमुख्यमंत्री ने कहा:
“मनरेगा एक महत्वपूर्ण योजना है जो न सिर्फ ग्रामीणों को रोजगार देती है बल्कि गांवों के विकास में भी अहम भूमिका निभाती है। सरकार की कोशिश है कि योजना का लाभ हर ज़रूरतमंद तक पहुंचे और हर गांव आत्मनिर्भर बन सके।”
क्या मिलेगा इसका असर?
इस फंड के जरिए प्रदेश के लाखों ग्रामीणों को रोजगार के मौके मिलेंगे और साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं मजबूत होंगी। निर्माण सामग्री की उपलब्धता से निर्माण कार्यों में तेजी आएगी और गांवों में बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी।