सिलवानी, नगर के हर वार्ड में खाली पड़े प्लॉट और खुली नालियां अब लोगों के लिए सिरदर्द बन गई हैं। बारिश का पानी इन खाली प्लॉटों में जमा हो जाता है, जिससे वहां भारी संख्या में मच्छर पनप रहे हैं। वहीं, खुली नालियों से उठने वाली बदबू ने तो लोगों का घरों में रहना भी मुश्किल कर दिया है। इन मच्छरों की वजह से क्षेत्र में बीमारियों का खतरा लगातार बढ़ रहा है और लोग दिन-रात मच्छरों के प्रकोप से जूझ रहे हैं।
मलेरिया का डर, प्रशासन की अनदेखी
स्थानीय लोगों को सबसे ज्यादा डर मलेरिया जैसी घातक बीमारी का सता रहा है। मच्छरों के काटने से बीमार पड़ने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन नगर परिषद इस समस्या पर कोई ध्यान नहीं दे रही है। लोग लगातार मांग कर रहे हैं कि जल्द से जल्द इन खाली प्लॉटों और नालियों की साफ-सफाई कराई जाए और मच्छर मारने वाली दवा का छिड़काव किया जाए। अगर यही स्थिति बनी रही, तो जल्द ही पूरे क्षेत्र में बीमार लोगों की संख्या में भारी बढ़ोतरी हो सकती है।
सालों से खाली पड़े प्लॉट, मच्छरों का बसेरा
नगर के सभी 15 वार्डों में ऐसे अनगिनत खाली प्लॉट हैं, जिन पर सालों से न तो कोई निर्माण हुआ है और न ही पानी निकासी की कोई व्यवस्था है। नतीजा यह है कि इन प्लॉटों में बारिश का पानी दो-दो फीट तक भरा हुआ है। यह जमा पानी मच्छरों के लिए स्वर्ग बन गया है, और उन्होंने इन प्लॉटों को अपना स्थायी घर बना लिया है।
स्थानीय निवासी अमित कुमार बताते हैं, “इन खाली प्लॉटों में भरे बरसाती पानी से कई तरह के मच्छर और कीट पनप रहे हैं, जो लोगों को बीमार कर रहे हैं।” हैरत की बात यह है कि नगर परिषद ने कभी ऐसे लापरवाह भूखंड मालिकों को नोटिस तक जारी नहीं किए, जिनकी लापरवाही का खामियाजा आसपास के लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
आखिर कब मिलेगी राहत?
सवाल यह उठता है कि नगर परिषद कब जागेगी और इस गंभीर समस्या पर ध्यान देगी? लोगों का स्वास्थ्य दांव पर लगा है और प्रशासन की उदासीनता समझ से परे है। नगर वासियों की एक ही गुहार है कि जल्द से जल्द कार्रवाई की जाए ताकि वे स्वस्थ और सुरक्षित जीवन जी सकें।