लखनऊ के बीकेटी विधानसभा क्षेत्र का फलपट्टी इलाका इन दिनों गंभीर प्रदूषण की चपेट में है। गांवों में हरियाली तो है, लेकिन फैक्ट्रियों की चिमनियों से निकलता ज़हरीला धुआं और नालों में बहता गंदा पानी यहां के लोगों के लिए एक बड़ी परेशानी बन चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि फैक्ट्रियों से हो रहा वायु और जल प्रदूषण दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है, लेकिन कोई इसे गंभीरता से नहीं ले रहा। चुनावी मौसम में नेता भले ही बड़े-बड़े वादे करते हों, लेकिन फलपट्टी की जमीनी सच्चाई यह है कि यहां प्रदूषण सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बना मूकदर्शक
फलपट्टी क्षेत्र के दर्जनों गांव जैसे कि बाबागंज, कुम्हरावां रोड, इटौंजा, कठवारा, महिंगवां, रामपुर देवरई आदि में बड़ी संख्या में फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं। ये फैक्ट्रियां हर दिन जहरीला धुआं और रसायनयुक्त पानी छोड़ रही हैं, जिससे न सिर्फ हवा खराब हो रही है बल्कि जमीन और जल स्रोत भी प्रदूषित हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। अधिकारी आते हैं, निरीक्षण करते हैं और फिर सबकुछ जस का तस रह जाता है।
फैक्ट्रियों से निकलता धुआं और फ्लाई ऐश बढ़ा रहा बीमारी
बीकेटी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में लोग सांस की बीमारी, फेफड़ों के संक्रमण और आंखों की जलन जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। सबसे चिंताजनक बात ये है कि इन बीमारियों का मुख्य कारण है फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं, जिसमें सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन जैसे खतरनाक तत्व होते हैं।
इसके साथ ही फैक्ट्रियों से निकलने वाला फ्लाई ऐश (डस्ट) आसपास के खेतों और घरों में फैल रहा है, जिससे धूल की मोटी परत हर जगह जम रही है।
गंदा पानी खेतों में छोड़ा जा रहा, फसलें और पर्यावरण दोनों प्रभावित
रात के समय चोरी-छिपे फैक्ट्रियों का गंदा, रासायनिक पानी खेतों में बहा दिया जाता है। ये पानी सीधे गांव के जल स्रोतों में मिलकर न केवल फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि पशुओं और इंसानों की सेहत के लिए भी खतरा बन चुका है।
किसानों का कहना है कि खेतों की मिट्टी बंजर होती जा रही है, और सिंचाई के लिए स्वच्छ जल स्रोत अब लगभग खत्म हो चुके हैं। इससे न केवल उनकी आमदनी घट रही है, बल्कि भविष्य को लेकर भी चिंता बढ़ रही है।
गांव वालों ने कहा – अब चुनाव में दिखेगी ताकत
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अबकी बार चुनाव में जो भी उम्मीदवार वोट मांगने आएगा, उसे प्रदूषण नियंत्रण के लिए स्पष्ट रोडमैप देना होगा। केवल वादे और भाषण नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर काम चाहिए।
ग्रामीणों के मुताबिक फलपट्टी की अधिसूचना के बावजूद यहां हानिकारक फैक्ट्रियों का संचालन हो रहा है। किसान नेता रामप्रकाश सिंह ने कहा कि कई बार फैक्ट्रियों को बंद कराने की मांग की गई, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
विभाग ने क्या कहा?
इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के निदेशक बी.पी. राम ने कहा:
“फलपट्टी के तीन किलोमीटर दायरे में अगर हानिकारक फैक्ट्रियां संचालित हो रही हैं तो यह नियमों के खिलाफ है। हमें जानकारी मिली है, और हम डीएचओ से जांच करवाकर कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। हरियाली बरकरार रखना हमारी प्राथमिकता है।”
वोटर चाहते हैं हल, वादे नहीं
बीकेटी के करीब 82 गांवों को फलपट्टी क्षेत्र में अधिसूचित किया गया है। इन गांवों में अवैध खनन, टूटी सड़कें, छुट्टा मवेशी और फैक्ट्रियों से फैल रहा प्रदूषण प्रमुख समस्याएं हैं। अब जनता बदलाव चाहती है – वह ऐसा नेता चाहती है जो सिर्फ वादा नहीं, समाधान भी लाए।
“फिलहाल लोग मीडिया और जन आंदोलनों के माध्यम से अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं। यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो आगामी चुनावों में यह मुद्दा सभी राजनीतिक दलों की कसौटी बनेगा।”