लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार अब ग्रामीण सड़कों के निर्माण और मरम्मत में वेस्ट प्लास्टिक का उपयोग कर रही है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में चल रहे इस अनोखे प्रयोग से न सिर्फ क्षतिग्रस्त सड़कों को दुरुस्त किया जा रहा है, बल्कि पर्यावरण की रक्षा की दिशा में भी यह एक सराहनीय पहल साबित हो रही है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत प्रदेश के 35 जिलों में 171 मार्गों पर कुल 1121.383 किमी लंबाई में सड़कों के नवीनीकरण का काम किया जा रहा है। इसमें वेस्ट प्लास्टिक मिलाकर बिटुमिनस कंक्रीट से सड़क की मरम्मत की जा रही है। अब तक 605.79 किमी सड़कों का काम पूरा कर लिया गया है, जिसमें 690 टन वेस्ट प्लास्टिक का उपयोग किया गया है।
कचरे से कर रहे हैं निर्माण, पर्यावरण को हो रहा फायदा
राज्य ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण (UPRRDA) के सीईओ अखण्ड प्रताप सिंह ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य केवल सड़कों को दुरुस्त करना ही नहीं, बल्कि ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन को भी कम करना है। प्लास्टिक से बनी ये सड़कें न केवल मजबूत होती हैं, बल्कि टिकाऊ भी होती हैं और इससे वातावरण को नुकसान नहीं पहुंचता।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार से मिली प्रोत्साहन राशि (इंसेंटिव मनी) से 306 मार्गों (कुल 1911.30 किमी) की मरम्मत कार्य किया जा रहा है। इसमें चार नई तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है:
30 एमएम मोटाई की सीजीबीएम तकनीक
कोल्ड मिक्स के साथ बिटुमिनस कॉन्क्रीट
एमएसएस तकनीक
वेस्ट प्लास्टिक युक्त बिटुमिनस कंक्रीट
इन सभी तकनीकों के जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सड़कें न केवल मजबूती से बनें, बल्कि पर्यावरण को भी नुकसान न पहुंचे।
कई फायदे, एक समाधान
राज्य तकनीकी अधिकारी डीडी पाठक और समन्वयक बीके दुबे ने बताया कि इस तकनीक से बनी सड़कों की सतह बेहद चिकनी होती है, जिससे वाहन आसानी से चलते हैं। इससे सड़क दुर्घटनाओं की संभावनाएं भी कम हो जाती हैं।
इतना ही नहीं, मरम्मत के बाद सड़क की उम्र भी बढ़ जाती है और व्यापार, पर्यटन जैसी गतिविधियों को भी रफ्तार मिलती है। इससे गांवों में विकास की गति तेज होती है।
उपमुख्यमंत्री ने की सराहना
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इस पहल को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया। उन्होंने कहा कि “वेस्ट प्लास्टिक के इस उपयोग से जहां एक तरफ सड़कों की गुणवत्ता और मजबूती में इजाफा हो रहा है, वहीं दूसरी ओर प्लास्टिक प्रदूषण को भी नियंत्रित करने में मदद मिल रही है।”
उन्होेंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस तकनीक का इस्तेमाल प्रदेश के अधिक से अधिक जिलों में किया जाए, ताकि भविष्य में सड़कों के नवीनीकरण में पारंपरिक तरीकों के स्थान पर यह पर्यावरण अनुकूल तरीका अपनाया जा सके।