लखनऊ। पिछड़ा मुस्लिम मोमिन समाज संगठन के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद अकील खान ने कैराना की सांसद इकरा हसन के खिलाफ दर्ज की गई आपत्तिजनक टिप्पणी की लगातार निंदा की है। करणी सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष योगेंद्र राणा द्वारा ‘निकाह कुबूल’ और ‘घर में नमाज पढ़ने की इजाजत’ जैसी टिप्पणी न केवल व्यक्तिगत रूप से अपमानजनक है, बल्कि यह धार्मिक और लैंगिक आधार पर शर्मनाक भी है।
अकील खान ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “जब एक निर्वाचित महिला सांसद के सम्मान के साथ इस तरह का खिलवाड़ हो सकता है, तो आम महिलाओं की सुरक्षा की कल्पना ही डरावनी है। अगर सांसद तक सुरक्षित नहीं हैं, तो देश की आम बेटियों की हालत क्या होगी?” उन्होंने आगे कहा कि इस तरह की भाषा समाज में नफरत और बंटवारे की भावना को हवा देती है, जो हमारे लोकतांत्रिक मूल्यों के बिल्कुल खिलाफ है।
क्या कहा अकील खान ने?
“यह टिप्पणी महिलाओं के खिलाफ अभद्रता है और जनभावनाओं को चोट पहुंचाती है।”
“यह सांसद और लोकतांत्रिक मूल्यों का अपमान है।”
“ऐसी मानसिकता को समाज में कोई जगह नहीं मिलनी चाहिए।”
उन्होंने योगेंद्र राणा की टिप्पणी को संवेदनशील, संप्रदायिक, और समाज के लिए अस्वीकार्य बताया। यह उन्हें व्यक्तिगत अपमान के साथ धार्मिक और सामाजिक सौहार्द को तोड़ने वाली मानसिकता पर आधारित टिप्पणी बताया।
महिलाओं की गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला
मोहम्मद अकील खान ने कहा:
“एक निर्वाचित महिला सांसद की गरिमा को ठेस पहुंचाना, महिलाओं के साथ जनहित और लोकतंत्र पर हमला है।”
उन्होंने चेताया कि कहीं अगर सांसद जैसे पदाधिकारियों के साथ इस तरह का बर्ताव बर्दाश्त किया गया, तो आम समाज में महिलाओं की स्थिति और भी कमजोर होगी। यह टिप्पणी महिलाओं के खिलाफ संवेदनहीनता और विभाजनकारी राजनीति की ओर इशारा करती है।
कौन करता है ऐसी टिप्पणियाँ?
करणी सेना के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष योगेंद्र राणा द्वारा इकरा हसन पर की गई टिप्पणी ने सबको चौंका दिया है, जिसमें वे खुद को उनकी तरफदारी निभाने वाला दिखा रहे हैं। साथ ही, यह बयान सिद्ध करता है कि कुछ ताकतें महिलाओं और बहुसंख्यक/अल्पसंख्यक धर्मों के बीच खाई बनाने का प्रयास कर रही हैं।
अकील खान की मांगें
मोहम्मद अकील खान ने राज्य सरकार, Election Commission तथा प्रशासन से तात्कालिक कार्रवाई की मांग की है—
योगेंद्र राणा के खिलाफ त्वरित कानूनी कार्रवाई हो।
इस तरह की टिप्पणियों पर लगे प्रतिबंध सुनिश्चित हों।
विपक्षी राजनीतिक ध्रुवीकरण से समाज को बचाने के लिए मजबूत सामाजिक जागरूकता बढ़ाई जाए।
सामाजिक सौहार्द बनाए रखना जरूरी
अकील खान ने कहा कि यह मामला केवल एक महिला सांसद के सम्मान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की शांति, धर्मों के बीच सौहार्द और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा हुआ गंभीर मुद्दा है।
“महिलाओं के खिलाफ इस तरह का बयान सीधे तौर पर हिंसा व समाज में नफरत को प्रेरित करता है।”
अंतिम शब्द
मोहम्मद अकील खान की स्पष्ट मांग है:
“सांसद इकरा हसन के साथ एक बार हुए अस्वीकार्य व्यवहार को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। इस तरह की टिप्पणियों को गंभीरता से लिया जाए और दोषी पर कड़ी कार्रवाई हो।”
इस घटना ने देश में लोकतांत्रिक मानदंडों, धार्मिक भावनाओं और महिलाओं की गरिमा को लेकर सवाल उठाए हैं। सवाल यह है— क्या हम इनके लिए खड़े होंगे?