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राजधानी में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम गायब! जल संकट की ओर बढ़ता लखनऊ, जिम्मेदारों की लापरवाही भारी: हर साल बह जाता है करोड़ों लीटर बारिश का पानी

लखनऊ में जल संकट गहराता जा रहा है, और इसका बड़ा कारण है रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की अनदेखी। राजधानी की 80% से ज्यादा इमारतों में या तो यह सिस्टम लगा ही नहीं या फिर खराब हालत में है। सरकारी घोषणाएं तो खूब हुईं, लेकिन क्रियान्वयन न के बराबर है। अगर अब भी बारिश का पानी नहीं सहेजा गया, तो राजधानी को पानी के लिए जूझना पड़ेगा।

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राजधानी लखनऊ में बारिश का पानी सहेजने के लिए जरूरी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की हालत बेहद खराब है। सरकारी से लेकर निजी बिल्डिंगों तक, लगभग 80 फीसदी भवनों में यह सिस्टम या तो लगा ही नहीं है या फिर पूरी तरह से निष्क्रिय हो चुका है। सरकार की मंशा थी कि भूजल स्तर को बचाने के लिए प्रदेश भर में दो लाख से अधिक इमारतों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाएगा, लेकिन ज़मीनी हकीकत इसके उलट है।

रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम: योजना सिर्फ कागज़ों तक सीमित
भूजल स्तर बढ़ाने के मकसद से प्रदेश सरकार ने कई साल पहले रेन वाटर हार्वेस्टिंग योजना की शुरुआत की थी। पहले चरण में जिला स्तर पर इसका खूब प्रचार हुआ, लेकिन वर्तमान में यह व्यवस्था महज दिखावे की बनकर रह गई है। राजधानी लखनऊ के मंडलायुक्त कार्यालय, कलेक्ट्रेट, नगर निगम, सचिवालय, बलरामपुर अस्पताल, हाई कोर्ट और विश्वविद्यालय जैसे बड़े सरकारी भवनों में यह सिस्टम तो लगाया गया, लेकिन रखरखाव की कमी के चलते अब ये सिस्टम बुरी तरह जर्जर हो चुके हैं।

भूजल संकट की बढ़ती आहट
लखनऊ के बख्शी का तालाब, जानकीपुरम, मड़ियांव, सरोजनी नगर, आशियाना जैसे कई क्षेत्रों में जल संकट दिन-ब-दिन गंभीर होता जा रहा है। हर साल बरसात में करोड़ों लीटर पानी नालियों में बहकर व्यर्थ चला जाता है, जिससे ज़मीन के नीचे पानी का स्तर रिचार्ज नहीं हो पाता। ऐसे में यह बड़ा सवाल बनता जा रहा है कि अगर अब भी वर्षा जल को नहीं सहेजा गया, तो आने वाले वर्षों में राजधानी के लिए पीने के पानी की भी भारी किल्लत हो सकती है।

80% इमारतों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम गायब
विशेषज्ञों का कहना है कि लखनऊ की लगभग 80 फीसदी सरकारी और निजी इमारतों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की व्यवस्था ही नहीं है। जबकि एलडीए और आवास विकास परिषद द्वारा पास किए जाने वाले नक्शों में यह सिस्टम अनिवार्य रूप से शामिल होता है। इसके बावजूद अधिकांश लोग इसे नजरअंदाज कर निर्माण करा लेते हैं। अफसरों की मिलीभगत या लापरवाही के चलते यह गंभीर चूक बार-बार दोहराई जाती है, जिसका खामियाजा पूरा शहर भुगत रहा है।

नियम हैं, लेकिन पालन नहीं
सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक 300 वर्ग मीटर से बड़े आवासीय और 1000 वर्ग मीटर से ज्यादा निर्माण क्षेत्र वाली व्यावसायिक इमारतों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य है। लेकिन न तो इसकी मॉनिटरिंग होती है और न ही अनुपालन न करने पर कोई ठोस कार्रवाई की जाती है। कुछ मामलों में नक्शा रद्द कर दिया जाता है, लेकिन किसी डेवलपर या बिल्डर पर जुर्माना नहीं लगाया जाता।

लोगों को नहीं दी गई पर्याप्त जानकारी
रेन वॉटर हार्वेस्टिंग जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर आम जनता को जागरूक करने के मामले में संबंधित विभागों की भूमिका अब तक बेहद सीमित रही है। यदि लोगों को इस सिस्टम की उपयोगिता और इसके फायदों के बारे में सही जानकारी दी जाए, तो अनुमान है कि 30 से 40 प्रतिशत लोग स्वेच्छा से अपने घरों में यह व्यवस्था लगवा सकते हैं। लेकिन दुर्भाग्य से अब तक इस दिशा में कोई ठोस जागरूकता अभियान नहीं चलाया गया है।

सरकारी बजट में किया गया ज़िक्र, लेकिन जमीनी काम कमजोर
हाल में ही प्रदेश सरकार द्वारा पेश किए गए बजट में यह साफ किया गया कि सभी सरकारी भवनों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाएगा। लेकिन जिस तरह से पहले से लगे सिस्टम की स्थिति है, उससे यह साफ है कि घोषणा और क्रियान्वयन में ज़मीन-आसमान का फर्क है।

जरूरत है सख्त नियमों और मॉनिटरिंग की
अब वक्त आ गया है कि सरकार रेन वॉटर हार्वेस्टिंग को लेकर केवल घोषणाओं तक सीमित न रहे, बल्कि सख्त कार्रवाई, नियमों का पालन और मॉनिटरिंग पर जोर दे। जल संकट से बचने का एकमात्र रास्ता यही है कि वर्षा जल का संरक्षण हर घर, हर दफ्तर और हर इमारत में हो।

जरूरी कदम
सभी सरकारी और निजी बिल्डिंग्स में रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य हो

जनता को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए

नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना और कार्रवाई तय हो

हर साल सिस्टम की मॉनिटरिंग और ऑडिट की जाए

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अजय सिंह चौहान लखनऊ

अजय सिंह चौहान – एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार अजय सिंह चौहान लखनऊ (उत्तर प्रदेश) निवासी एक वरिष्ठ और सम्मानित पत्रकार हैं, जिन्होंने पत्रकारिता और जनसंचार के क्षेत्र में पिछले ढाई दशकों से उल्लेखनीय योगदान दिया है। वर्ष 2009 में उन्होंने आगरा से पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद वे निरंतर पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहे और उत्तर प्रदेश के विभिन्न प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में लखनऊ जिले के संवाददाता के रूप में कार्य करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई। अपने 25 वर्षों के व्यापक अनुभव के दौरान अजय सिंह चौहान ने जमीनी स्तर की रिपोर्टिंग, जनहित से जुड़े मुद्दों और क्षेत्रीय समाचारों को मजबूती से उठाया। उन्होंने पत्रकारिता को केवल एक पेशा न मानकर, समाज सेवा का सशक्त माध्यम माना और हमेशा निष्पक्ष, निर्भीक व जनपक्षधर लेखन को प्राथमिकता दी। वर्तमान में अजय सिंह चौहान मध्य प्रदेश के प्रमुख हिन्दी दैनिक स्वदेश के लखनऊ संस्करण में ब्यूरो प्रमुख के रूप में कार्यरत हैं। उनकी लेखन शैली, अनुभव और जनसरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता ने उन्हें न केवल एक कुशल पत्रकार, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा स्रोत भी बना दिया है।

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