नगर को साफ-सुथरा और स्वच्छ बनाए रखने के लिए नगर परिषद हर महीने लाखों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। शहर के कई इलाकों में जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं, जिनसे उठती बदबू और मच्छरों के प्रकोप ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। हालात ये हैं कि नगर परिषद के दावों की पोल अब आमजनता के सामने खुल चुकी है।
कचरे के ढेर बने लोगों की परेशानी की वजह
सिलवानी के कई मोहल्लों, मुख्य सड़कों और बाजारों के किनारे कचरे के अंबार लगे हुए हैं। इन कचरे के ढेरों में मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है, जो न सिर्फ गंदगी फैला रहे हैं बल्कि राह चलते लोगों के लिए मुसीबत बन रहे हैं। कई बार मवेशी आपस में लड़ पड़ते हैं और सड़क पर खड़े या चलते वाहनों से मवेशियों टकरा जाते हैं, जिस कारण हादसों की आशंका रहती है।
बदबू और गंदगी से बीमारियों का डर बढ़ा
स्थानीय रहवासियों का कहना है कि इन कचरे के ढेरों से निकलने वाली बदबू से उनका घरों में रहना मुश्किल हो गया है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा जैसी बीमारियों से पीड़ित लोगों को हो रही है। स्कूल जाते वक्त बच्चे इन कचरे के पास से गुजरते हैं और प्रदूषित हवा का शिकार हो जाते हैं, जिससे सर्दी, खांसी, एलर्जी और पेट से जुड़ी बीमारियां फैल रही हैं।
स्वच्छ भारत अभियान में सिर्फ खानापूर्ति
नगर परिषद ने स्वच्छ भारत अभियान के तहत शहर में डस्टबिन लगाने की योजना चलाई थी। मुख्य चौराहों, बाजारों और मोहल्लों में डस्टबिन लगाए गए ताकि लोग सूखा और गीला कचरा अलग-अलग डाल सकें। लेकिन अब वही डस्टबिन खुद गंदगी का केंद्र बन चुके हैं। ना तो उनकी समय पर सफाई की जा रही है और ना ही उनकी स्थिति पर कोई ध्यान दिया जा रहा है।
डस्टबिन में नहीं, खाली प्लॉटों में फेंका जा रहा कचरा
कई मोहल्लों में रहने वाले लोग अब अपने घर का कचरा पास ही में मौजूद खाली प्लॉट में फेंकने लगे हैं। नगर परिषद के कर्मचारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे, जिससे यह कचरा वहीं सड़ता रहता है। इन जगहों पर मच्छर और मक्खियाँ पनप रहे हैं, जिससे मलेरिया, उल्टी-दस्त जैसी बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है।
जिम्मेदारों की अनदेखी बनी मुख्य वजह
लोगों का कहना है कि नगर परिषद केवल कागजों में सफाई दिखा रही है। कई बार शिकायत करने के बाद भी ना तो नियमित कचरा उठाया जा रहा है और ना ही सफाई कर्मचारियों की निगरानी हो रही है। कुछ लोग तो यहां तक कहते हैं कि अधिकारियों की मिलीभगत से ठेकेदार काम में लापरवाही बरत रहे हैं, लेकिन किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती।
स्थानीय लोगों की मांग – हो सख्त कार्रवाई
स्थानीय निवासियों ने नगर परिषद से मांग की है कि साफ-सफाई के काम में पारदर्शिता लाई जाए, जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो और नियमित रूप से कचरा उठाने की व्यवस्था की जाए। साथ ही डस्टबिन की देखरेख, खाली प्लॉटों की सफाई और मच्छर रोधी दवाओं का छिड़काव किया जाए, ताकि बीमारी और गंदगी से लोगों को राहत मिल सके।