सावन का पावन महीना शुरू होते ही पूरे नगर और अंचल में भगवान शिव की भक्ति का माहौल गहराता जा रहा है। खास तौर पर महिलाओं की आस्था और भक्ति भाव देखने लायक है। नगर की मातृ शक्ति न सिर्फ मंदिरों में भजन-कीर्तन कर रही है, बल्कि घर-घर में भी शिव भक्ति की अलख जगा रही है।
शनिवार को सिलवानी के बजरंग चौराहा स्थित शनि मंदिर परिसर में एक विशेष भजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में नगर की बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं और पूरे वातावरण को संगीतमय भक्ति रस से भर दिया।
भक्ति में डूबीं महिलाएं, गूंजे ढोलक-झांझ और मंजीरे
शनि मंदिर परिसर में दोपहर को जैसे ही ढोलक, झांझ और मंजीरे की ताल पर भजन शुरू हुए, वैसे ही वहां मौजूद हर कोई भक्तिरस में डूब गया। महिलाओं ने मिलकर भगवान शिव और शनिदेव के गुणगान किए। “भोलेनाथ तेरी महिमा अपरंपार”, “जय शंकरा” जैसे भजन गूंजते रहे और श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक सुकून का अनुभव हुआ।
सावन में खास है शिव भक्ति का महत्व
सावन के महीने को भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है। ऐसे में महिलाएं व्रत, पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन के जरिए अपने श्रद्धा भाव को व्यक्त कर रही हैं। मंदिरों के अलावा घरों में भी सुगंधित धूप-दीप और शंखध्वनि के बीच शिवजी की पूजा की जा रही है।
नगर की कई महिलाओं ने बताया कि सावन में वे हर सोमवार को व्रत रखती हैं और विशेष रूप से शिवलिंग पर जलाभिषेक करती हैं। इसके साथ ही अपने परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की लंबी उम्र के लिए शिव आराधना करती हैं।
घर-घर में हो रही पूजा-अर्चना
नगर के अलग-अलग मोहल्लों में महिलाएं अपने-अपने घरों में भी छोटे स्तर पर भजन मंडलियों का आयोजन कर रही हैं। कहीं महिलाएं सामूहिक रूप से भजन गा रही हैं तो कहीं शिव कथा और पूजन विधि का आयोजन किया जा रहा है। हर जगह एक ही उद्देश्य – भोलेनाथ को प्रसन्न करना और उनका आशीर्वाद पाना।
मातृ शक्ति का सामाजिक और धार्मिक नेतृत्व
सावन के इस भक्तिमय माहौल में महिलाओं की भागीदारी सिर्फ पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि वे मंदिरों की साफ-सफाई, सजावट और आयोजन की पूरी व्यवस्था में भी बढ़-चढ़कर योगदान दे रही हैं। उनकी इस सक्रिय भूमिका से यह साफ झलकता है कि समाज में महिलाओं की धार्मिक जागरूकता और नेतृत्व क्षमता लगातार मजबूत हो रही है।
प्रशासन और समाजसेवी भी कर रहे सहयोग
भजन कार्यक्रमों के आयोजन में समाजसेवी संस्थाएं और प्रशासनिक सहयोग भी मिल रहा है। आयोजकों द्वारा बताया गया कि श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पेयजल, छाया और बैठने की व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं।