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ई-अटेंडेंस के खिलाफ अतिथि शिक्षकों का फूटा गुस्सा, देवरी में तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन: ‘स्मार्टफोन नहीं, तो अटेंडेंस कैसे लगाएं

ई-अटेंडेंस के खिलाफ अतिथि शिक्षकों का प्रदर्शन: देवरी में तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन, पुरानी मांगें भी दोहराईं | एमपी अतिथि शिक्षक

मध्य प्रदेश के अतिथि शिक्षक, जो लंबे समय से कम वेतन पर बच्चों को पढ़ा रहे हैं, एक बार फिर नई चुनौती का सामना कर रहे हैं। इस बार उन्हें सरकार का ई-अटेंडेंस (डिजिटल हाज़िरी) का फरमान परेशान कर रहा है। इसी के विरोध में आज देवरी में अतिथि शिक्षक संघ ने तहसीलदार चंचल जैन को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इसमें उन्होंने ई-अटेंडेंस बंद करने के साथ-साथ अपनी कई पुरानी मांगों को पूरा करने की भी अपील की है।

‘कम सैलरी में स्मार्टफोन कहां से लाएं?’
अतिथि शिक्षकों की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि उन्हें शिक्षा विभाग ने ‘हमारे शिक्षक ऐप’ के ज़रिए ई-अटेंडेंस लगाने का आदेश दिया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि अगर अटेंडेंस नहीं लगी, तो सैलरी नहीं मिलेगी। लेकिन, अतिथि शिक्षकों का कहना है कि उनकी सैलरी इतनी कम है कि इस महंगाई में गुज़ारा करना मुश्किल है, स्मार्टफोन खरीदना तो दूर की बात है।

ज्ञापन में अतिथि शिक्षकों ने साफ-साफ कहा है, “हम पहले से ही बहुत कम वेतन पर काम कर रहे हैं। हममें से कई शिक्षकों के पास स्मार्टफोन नहीं है, तो हम यह ई-अटेंडेंस कैसे लगाएंगे? इस महंगाई में हमें अपने परिवार पालने के लाले पड़े हैं, ऐसे में नया फोन खरीदना हमारे लिए मुमकिन नहीं है।” उनकी मांग है कि जब तक उनकी सैलरी नहीं बढ़ती, तब तक ई-अटेंडेंस का नियम हटा दिया जाए।

शिवराज सिंह चौहान के वादे भूले, हम आज भी अल्प वेतन में!
अतिथि शिक्षकों ने ज्ञापन में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुराने वादों की भी याद दिलाई। उन्होंने कहा कि शिवराज सिंह चौहान ने महापंचायत में वादा किया था कि अतिथि शिक्षकों को 12 महीने का सेवाकाल मिलेगा और उन्हें गुरुजी की तरह विभागीय परीक्षा लेकर परमानेंट (नियमित) किया जाएगा। लेकिन, ये वादे आज तक पूरे नहीं हुए हैं।
अतिथि शिक्षकों का कहना है कि वे सालों से स्थाई नौकरी या कम से कम एक सम्मानजनक सैलरी की उम्मीद में हैं, पर हर बार उन्हें सिर्फ़ मायूसी ही मिलती है।

हिला अतिथि शिक्षकों को भी चाहिए सुविधाएं
ज्ञापन में महिला अतिथि शिक्षकों के लिए भी कुछ अहम मांगें रखी गई हैं। उन्होंने प्रसूति अवकाश (मैटरनिटी लीव) और सरकारी शिक्षकों की तरह CL (आकस्मिक अवकाश) दिए जाने की मांग की है। उनका कहना है कि जब वे भी सरकारी स्कूलों में पढ़ा रही हैं, तो उन्हें भी सरकारी शिक्षकों की तरह सभी सुविधाएं मिलनी चाहिए। इसके साथ ही, ‘समान कार्य, समान वेतन’ की पुरानी मांग भी दोहराई गई है, यानी जो काम सरकारी शिक्षक कर रहे हैं, उसी काम के लिए अतिथि शिक्षकों को भी उतनी ही सैलरी मिलनी चाहिए।

सरकार से अपील: हमारी समस्याओं पर ध्यान दें!
अतिथि शिक्षक संघ देवरी के नीरज छिपा, अमित श्रीवास्तव, मनीष राजपूत, राहुल रघुवंशी, जितेंद्र भनारिया और बड़ी संख्या में अन्य अतिथि शिक्षक इस दौरान मौजूद थे। उन्होंने एकजुट होकर सरकार से अपील की कि उनकी समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और जल्द से जल्द उनका समाधान किया जाए।

अतिथि शिक्षकों का कहना है कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे अपने हक़ के लिए आगे भी आंदोलन करने को मजबूर होंगे। यह सिर्फ ई-अटेंडेंस का मुद्दा नहीं, बल्कि उन हजारों अतिथि शिक्षकों के भविष्य का सवाल है जो सालों से शिक्षा व्यवस्था को सहारा दे रहे हैं।


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