Lucknow । new chief secretary उत्तर प्रदेश सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अफसर शशि प्रकाश गोयल को राज्य का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया है। वह 1989 बैच के अफसर हैं और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सबसे करीबी अधिकारियों में गिने जाते हैं। मनोज कुमार सिंह की सेवानिवृत्ति के बाद एसपी गोयल को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। माना जा रहा है कि योगी सरकार के कार्यकाल में एसपी गोयल सबसे ताकतवर मुख्य सचिव साबित हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री के भरोसेमंद और पंचम तल के सबसे सशक्त अफसर
एसपी गोयल बीते साढ़े आठ सालों से यूपी सरकार के प्रशासनिक ढांचे में बेहद अहम भूमिका निभा रहे हैं। वह मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव पद पर तैनात रह चुके हैं और उन्हें सरकार के फैसलों की रीढ़ माना जाता है। पंचम तल यानी सचिवालय की ऊपरी मंजिल पर अधिकारियों की पोस्टिंग से लेकर महत्वपूर्ण फाइलों की मंजूरी तक में उनकी निर्णायक भूमिका रही है।
कई मौकों पर सरकार के मंत्री और विधायक खुलेआम गोयल की कार्यशैली की तारीफ करते नजर आए हैं। वहीं, कुछ नेताओं ने यह भी माना है कि गोयल के रहते ब्यूरोक्रेसी कहीं ज्यादा ताकतवर हो गई है।
लंबा कार्यकाल, 2027 तक मुख्य सचिव रह सकते हैं गोयल
एसपी गोयल का रिटायरमेंट जनवरी 2027 में है, यानी अगले 18 महीनों तक वह मुख्य सचिव पद पर बने रह सकते हैं। अगर उन्हें आगे सेवा विस्तार भी मिल गया तो वे 2027 के विधानसभा चुनाव तक इस पद पर रहेंगे। ऐसे में चुनाव से पहले सरकार की नीतियों को जमीन पर उतारने और योजनाओं की डिलीवरी सुनिश्चित करने की बड़ी जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर होगी।
साफ-सुथरी छवि और दबाव में न झुकने वाला अफसर
एसपी गोयल की छवि एक ईमानदार, निडर और बेबाक अफसर की रही है। वह कभी भी किसी राजनीतिक दबाव में काम नहीं करते। हाल ही में जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह द्वारा भेजी गई इंजीनियरों के ट्रांसफर की फाइल को उन्होंने कई बार लौटा दिया, क्योंकि उन्हें ट्रांसफर की प्रक्रिया तर्कसंगत नहीं लगी।
इसी तरह सैमसंग इंडिया को तय सीमा से ज्यादा सब्सिडी देने की फाइल पर भी उन्होंने सहमति नहीं दी। गोयल हर महीने ऐसे कई मामलों में बिना किसी दबाव के निष्पक्ष फैसले लेने के लिए जाने जाते हैं।
एसपी गोयल, एक आईएएस अधिकारी, अपनी कार्यशैली के कारण अफसरों की जवाबदेही तय करने और सरकार की छवि मजबूत बनाए रखने के लिए जाने जाते हैं.
एसपी गोयल: एक जवाबदेह प्रशासक आईएएस लॉबी में भी एसपी गोयल की कार्यशैली की काफी तारीफ की जाती है. उनके कार्यकाल के दौरान गलत फाइलों को आगे बढ़ाने के मामले कम ही देखने को मिले हैं. पूर्व मुख्य सचिवों का मानना है कि गोयल की मौजूदगी से अफसरों की जवाबदेही तय होती है. इससे न केवल प्रशासन में पारदर्शिता आती है, बल्कि सरकार की छवि भी मजबूत बनी रहती है. उनकी कार्यशैली प्रशासनिक कुशलता और ईमानदारी का एक उदाहरण है.
जनप्रतिनिधियों की शिकायतें और ब्यूरोक्रेसी पर सवाल
हालांकि, सरकार के कुछ विधायक और सांसद यह भी कहते हैं कि नौकरशाही उनकी बात नहीं सुनती। जिलों के डीएम और एसपी जनप्रतिनिधियों को नजरअंदाज कर देते हैं। जब इन शिकायतों की फाइलें सीएम तक पहुंचती हैं तो एसपी गोयल उनका मजबूती से बचाव करते हैं। इससे विधायकों और पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराजगी की संभावना भी बढ़ती है, जो भविष्य में राजनीतिक असर डाल सकती है।
उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी शशि प्रकाश गोयल, जिन्हें आमतौर पर एसपी गोयल के नाम से जाना जाता है, एक अनुभवी प्रशासक हैं.
एसपी गोयल: एक परिचय
एसपी गोयल लखनऊ के निवासी हैं और उन्होंने अपनी शिक्षा में बीएससी (ऑनर्स), एमसीए, और आईआईएफटी से ईएमआईबी (Executive Master of International Business) की डिग्री हासिल की है.
प्रशासनिक करियर
शुरुआत: उन्होंने अपने प्रशासनिक करियर की शुरुआत इटावा से की थी.
जिलाधिकारी (DM) के रूप में: वे अलीगढ़, बहराइच, मेरठ, मथुरा, प्रयागराज और देवरिया जैसे कई जिलों में जिलाधिकारी (DM) के पद पर कार्यरत रहे हैं.
केंद्र सरकार में भूमिका: उन्होंने केंद्र सरकार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जहाँ वे उच्च शिक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर रह चुके हैं.
मुख्यमंत्री कार्यालय में भूमिका: साल 2017 में योगी सरकार बनने के बाद से ही वे मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े रहे हैं, जो उनकी प्रशासनिक दक्षता और मुख्यमंत्री के भरोसे को दर्शाता है.
एसपी गोयल अपने व्यापक अनुभव और विभिन्न प्रशासनिक पदों पर उनकी सेवाओं के लिए जाने जाते हैं.