मथुरा। गोवर्धन क्षेत्र के पारासोली गांव स्थित सूर श्याम गौशाला एक बार फिर विवादों में घिर गई है। गौशाला में गौ माताओं की दुर्दशा को लेकर गौ रक्षक दल और गौशाला संचालकों के बीच जमकर बहस हो गई। मामला इतना बिगड़ गया कि पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा। गौ रक्षकों का आरोप है कि यहां गौ सेवा के नाम पर भारी फंडिंग की जाती है, लेकिन उसका उपयोग गायों के भले के लिए नहीं हो रहा।
गौ रक्षक दल का कहना है कि गौशाला में गायों की देखरेख ठीक से नहीं की जा रही और मृत गौवंश को खुले में फेंक दिया जा रहा है, जिससे कुत्ते उन्हें नोंचते हैं। उन्होंने मौके पर जाकर कई मृत गायों के अवशेष देखे और उनकी दुर्गति पर दुख जताया। गौ रक्षकों ने इस अमानवीय व्यवहार की कड़ी निंदा की और तत्काल कार्रवाई की मांग की।
गौ सेवा के नाम पर फंडिंग, लेकिन नहीं दिखती सेवा
गौ रक्षक दल के सदस्यों का आरोप है कि सूर श्याम गौशाला में गौ सेवा सिर्फ कागजों में हो रही है। उन्होंने बताया कि गौशाला में बाहर से भारी भरकम आर्थिक सहायता (फंडिंग) आती है, लेकिन उसका उपयोग गायों के खानपान, इलाज या देखभाल पर नहीं किया जाता। इसके बजाय गायों को मरने के बाद गड्ढों में फेंक दिया जाता है और उनके शरीर सड़ते रहते हैं।
गौ रक्षकों ने यह भी बताया कि कुछ गायें बीमार हालत में बिना इलाज के पड़ी हुई थीं, जिनकी स्थिति देखकर किसी का भी दिल पसीज जाए। मृत गायों के आसपास बदबू और गंदगी का माहौल बना हुआ था।
मामले ने पकड़ा तूल, पुलिस को करनी पड़ी दखल
जैसे-जैसे मामला तूल पकड़ता गया, गौ रक्षक दल और गौशाला संचालकों के बीच बहस तेज हो गई। स्थिति बिगड़ने से पहले ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंच गई और दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया। पुलिस की मौजूदगी में गौ रक्षकों ने मृत गायों का अंतिम संस्कार (समाधि) किया और शांति बनाए रखने की अपील की।
गांववालों का कहना है कि वे लंबे समय से इस गौशाला की गतिविधियों को लेकर असहज हैं, लेकिन खुलकर कुछ कह नहीं पाते थे। अब जब गौ रक्षक दल ने आवाज उठाई है तो प्रशासन को इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच करनी चाहिए।
प्रशासन से की गई कार्रवाई की मांग
गौ रक्षकों ने प्रशासन से मांग की है कि इस गौशाला की फंडिंग और खर्च का ऑडिट करवाया जाए और यह जांच की जाए कि गौ सेवा के नाम पर मिलने वाले पैसे आखिर कहां जा रहे हैं। उन्होंने यह भी मांग की कि गौशालाओं में मानक सुविधाओं को सुनिश्चित किया जाए, जैसे कि पशु चिकित्सक की मौजूदगी, उचित चारे-पानी की व्यवस्था और बीमार गायों के लिए अलग देखभाल की सुविधा।