Pollution from factories poses a threat लखनऊ के बीकेटी (बख्शी का तालाब) क्षेत्र का पहाड़पुर गांव और उसके आसपास के मोहम्मदपुर सरैंया, देवरई कला, अतरौरा और कई अन्य गांव आजकल गंभीर पर्यावरणीय संकट से जूझ रहे हैं। यहां की हवा और पानी में लगातार बढ़ रहा फैक्ट्रियों का प्रदूषण अब आम ग्रामीणों के जीवन के लिए खतरा बन चुका है।
(In the BKT region, the pollution caused by factories in Paharpur and nearby villages has badly affected the health of pregnant women, children, and the elderly. Contaminated air and water are leading to a rapid increase in asthma, COPD, and other serious diseases.)
खासकर गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं और बुजुर्गों की हालत सबसे ज्यादा बिगड़ रही है। डॉक्टरों का कहना है कि इस प्रदूषित वातावरण का असर न केवल पैदा हो चुके बच्चों पर बल्कि गर्भ में पल रहे शिशुओं पर भी पड़ रहा है।
Pollution from factories poses a threat
गर्भवती महिलाओं की बढ़ी चिंता – “सिर्फ स्वस्थ बच्चे की दुआ”
पहाड़पुर, मोहम्मदपुर सरैंया और आसपास के गांवों की हर गर्भवती महिला की एक ही ख्वाहिश है – स्वस्थ बच्चा। लेकिन, फैक्ट्रियों से निकलता जहरीला धुआं और गंदा पानी उनकी उम्मीदों को तोड़ रहा है। डॉक्टरों के मुताबिक, गर्भ में पल रहे बच्चों पर प्रदूषण का असर गंभीर रूप से पड़ता है। इसके कारण समय से पहले डिलीवरी, कम वजन के बच्चे और शिशु मृत्यु जैसी स्थितियां सामने आ सकती हैं।
गांव की महिलाओं का कहना है कि “खुली हवा में सांस लेना भी अब खतरे से खाली नहीं है। बच्चे बाहर खेलते हैं तो उन्हें खांसी और सीने में घर्र-घर्र जैसी समस्या शुरू हो जाती है।” बच्चों की मासूम सांसें भी खतरे में जहां बच्चों के लिए ताजी हवा खेल और विकास का जरिया होती है, वहीं बीकेटी के गांवों में यही हवा उनकी सेहत बिगाड़ रही है।
पहाड़पुर में ग्लूकोज़ फैक्ट्री, मोहम्मदपुर सरैंया के पास फ्लोर मिल, देवरई कला में प्लाईवुड फैक्ट्री
ये सभी फैक्ट्रियां वायु और जल प्रदूषण के नियमों को धता बताते हुए खुलेआम जहरीला धुआं और गंदा पानी छोड़ रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में बच्चों के सीने में घर्र-घर्र की आवाज, बार-बार बुखार, निमोनिया, डायरिया और सर्दी-जुकाम की शिकायतें बढ़ गई हैं।
दूषित पानी से भूजल भी हो रहा जहरीला
प्रदूषण सिर्फ हवा तक ही सीमित नहीं है। फैक्ट्रियों से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी गांवों के भूजल को भी जहरीला बना रहा है। ग्रामीणों के आरोप हैं कि फैक्ट्री मालिक रात में गुपचुप तरीके से जहरीला पानी खाली जमीनों और नालों में बहा देते हैं। इतना ही नहीं, कुछ जगहों पर बोरिंग करके सीधे जमीन में यह केमिकल डाला जा रहा है। इससे हैण्डपंप और कुओं का पानी दूषित हो गया है। गांव वालों का कहना है कि पानी अब हाथ धोने लायक भी नहीं रह गया है, पीना तो दूर की बात है।
प्रदूषण पर लगाम क्यों नहीं?
पिछले महीने प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने फैक्ट्रियों पर जुर्माना भी लगाया था, लेकिन हालात जस के तस हैं। फैक्ट्री मालिकों पर कार्रवाई के बावजूद वायु और जल प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है।https://www.facebook.com/share/1BzYkPvfJf/
ग्रामीणों का आरोप है कि नेताओं और प्रशासन की उदासीनता की वजह से हालात बद से बदतर हो रहे हैं। आज की स्थिति यह है कि बीकेटी का पहाड़पुर, मोहम्मदपुर सरैंया और देवरई कला प्रदेश के टॉप प्रदूषित इलाकों की सूची में शामिल हो चुके हैं।
डॉक्टरों की चेतावनी – “खतरनाक स्तर पर पहुंचा प्रदूषण”
बीकेटी सीएचसी के अधीक्षक डॉ. जे.पी. सिंह का कहना है कि इलाके में अस्थमा और सीओपीडी के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा –
अस्थमा के मरीजों को स्मॉग और प्रदूषित हवा से खासकर बचना चाहिए।
बच्चों और बुजुर्गों को घर से बाहर निकलते समय उच्च गुणवत्ता वाले मास्क पहनने चाहिए।
अगर समस्या ज्यादा हो तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि यहां PM2.5 का स्तर WHO की सिफारिशों से 50% तक ज्यादा है। यह स्तर बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास को रोक सकता है।
विशेषज्ञों की राय – “बच्चों के दिमाग पर असर”
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण का असर सिर्फ सांस और फेफड़ों तक ही सीमित नहीं है।
मस्तिष्क का विकास धीमा हो जाता है।
पढ़ाई और सीखने की क्षमता कम हो जाती है।
चिंता और अवसाद जैसी मानसिक समस्याएं बढ़ सकती हैं।
बच्चों की लंबाई और वजन प्रभावित होता है।
योग से मिल सकता है समाधान
योग शिक्षक नारायण सिंह का कहना है कि आज पूरा विश्व वायु प्रदूषण से परेशान है। जहरीली गैसें फेफड़े, लीवर और त्वचा पर गंभीर असर डालती हैं।
उन्होंने कहा – “योग ही एकमात्र ऐसा उपाय है जो शरीर को इन दुष्प्रभावों से बचा सकता है। प्राणायाम और योगासन करने से फेफड़े मजबूत होते हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।”
ग्रामीणों की मांग – “प्रशासन तुरंत कार्रवाई करे”
गांव वालों का कहना है कि अब धैर्य की सीमा टूट चुकी है। लगातार हो रहे प्रदूषण से उनकी पीढ़ियों का भविष्य खतरे में है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही प्रदूषण पर रोक नहीं लगाई गई तो वे आंदोलन करने पर मजबूर होंगे।