मथुरा। Govardhan news गोवर्धन कस्बे में उस वक्त गहरा सन्नाटा छा गया, जब क्षेत्र के जाने-माने समाजसेवी और पूर्व नगर चेयरमैन गोर गोपाल मुखिया के निधन की खबर फैली। मुखियाजी के नाम से मशहूर गोर गोपाल न केवल राजनीतिक क्षेत्र में सक्रिय थे, बल्कि उन्होंने धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में भी अपनी एक अलग पहचान बनाई थी।
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उनके निधन की खबर मिलते ही गोवर्धन सहित आसपास के इलाकों में शोक की लहर दौड़ गई। हर किसी के जुबान पर यही बात थी कि “मुखियाजी जैसा मिलनसार और सादगीभरा इंसान अब दोबारा नहीं मिलेगा।”
रामलीला में रावण के रूप में छोड़ी थी अमिट छाप
गोवर्धन की ऐतिहासिक रामलीला में गोर गोपाल मुखिया की भूमिका हमेशा याद की जाएगी। वर्षों तक उन्होंने इस रामलीला में रावण का किरदार निभाया और अपनी प्रभावशाली आवाज़, दमदार संवाद अदायगी और जीवंत अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया।
उनकी संवाद शैली इतनी असरदार थी कि लोग कहते थे—“जब मुखियाजी मंच पर आते, तो पूरा मैदान तालियों से गूंज उठता था।” रावण के संवादों में उनकी आवाज़ की गूंज आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है। Govardhan news
जनता के बीच लोकप्रिय चेहरा
चेयरमैन के रूप में गोर गोपाल मुखिया हमेशा जनता के बीच रहते थे। आम लोगों के सुख-दुख में शामिल होना, हर व्यक्ति से आत्मीयता के साथ मिलना उनकी आदत थी। राजनीतिक और सामाजिक दोनों ही मोर्चों पर वे हमेशा सक्रिय रहे। लोगों की छोटी-बड़ी समस्याओं को सुनना और उनका समाधान निकालना उनकी पहचान थी। Govardhan news
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गोवर्धन के लोग बताते हैं कि वे सच्चे अर्थों में जनसेवक थे। उन्होंने अपने कार्यकाल में नगर के विकास को हमेशा प्राथमिकता दी। चाहे सड़क निर्माण का मामला हो या धार्मिक आयोजनों की व्यवस्था, मुखियाजी हर कार्य में अग्रणी रहते थे। Govardhan news
अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
शुक्रवार को जब उनके पार्थिव शरीर को अंतिम यात्रा के लिए ले जाया गया, तो पूरा गोवर्धन जैसे ठहर गया। लोग अपने प्रिय नेता और मित्र को अंतिम विदाई देने उमड़ पड़े। नगर की गलियां “मुखियाजी अमर रहें” के नारों से गूंज उठीं। Govardhan news
अंतिम संस्कार के दौरान विधायक ठाकुर मेघश्याम सिंह, चेयरमैन प्रतिनिधि मनीष लंबरदार, व्यापार मंडल जिला उपाध्यक्ष संजीव लालाजी, पूर्व विधायक प्रतिनिधि जीतू ठाकुर, कुंवर नरेंद्र सिंह, दानघाटी मंदिर सेवायत लाला पंडित, ठाकुर परशुराम, चौधरी भगवान सिंह, रामधन पहलवान, पंकज मुखिया, कान्हा मुखिया, संजय मुखिया, मोहित मुखिया, लखन, मुकंद सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोग मौजूद रहे। Govardhan news
उनका अंतिम संस्कार केशव मुखिया द्वारा किया गया। इस दौरान उपस्थित लोगों की आंखें नम थीं। सभी ने मुखियाजी के निधन को गोवर्धन की सामाजिक और सांस्कृतिक दुनिया के लिए “अपूरणीय क्षति” बताया। Govardhan news
सादगी और समर्पण का प्रतीक थे मुखियाजी
मुखियाजी का जीवन सादगी, अनुशासन और समर्पण से भरा हुआ था। उन्होंने हमेशा समाज की सेवा को प्राथमिकता दी और धर्म-संस्कृति को अपने जीवन का अहम हिस्सा बनाया। उनके करीबी बताते हैं कि वे हर त्योहार और धार्मिक आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। Govardhan news
रामलीला मंचन के दौरान वे हर कलाकार की मदद करते और पूरे आयोजन को परिवार की तरह संभालते थे। उनका यह व्यवहार ही था जिसने उन्हें गोवर्धन के हर घर में सम्मान और अपनापन दिलाया। Govardhan news
लोगों की जुबान पर बस एक ही बात—”ऐसा इंसान फिर नहीं मिलेगा”
मुखियाजी के निधन से हर वर्ग में शोक की लहर है। व्यापारी, राजनेता, कलाकार और आम नागरिक सभी ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। लोगों ने कहा कि मुखियाजी जैसे सरल और कर्मठ व्यक्ति की कमी अब लंबे समय तक महसूस की जाएगी। उनका जीवन समाज के लिए प्रेरणा रहेगा। Govardhan news
गोवर्धन की गलियों में आज भी लोग उनकी यादों को साझा कर रहे हैं। कोई उनके रामलीला के संवाद याद कर रहा है तो कोई उनके साथ बिताए पल। Govardhan news
मुखियाजी ने भले ही इस दुनिया को अलविदा कह दिया हो, लेकिन उनकी स्मृतियाँ, उनका योगदान और उनकी आवाज़ हमेशा गोवर्धन की पहचान बनी रहेंगी। Govardhan news