Lucknow के बीकेटी स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्राम्य विकास संस्थान में हाल ही में एक खास आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसका मकसद सरकारी, अर्धसरकारी और सामाजिक संस्थाओं के अधिकारियों व कर्मचारियों को ग्राम्य विकास से जुड़ी योजनाओं की जानकारी देना और उनकी कार्यदक्षता बढ़ाना था।
यह तीन दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यक्रम 28 जुलाई से शुरू होकर 31 जुलाई तक चला। इसमें जनपद और ब्लॉक स्तर के अधिकारियों, महिला स्वयं सहायता समूह की पदाधिकारियों और चयनित जिलों के अटल भूजल योजना से जुड़े अधिकारियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की देखरेख संस्थान के महानिदेशक एल. वेंकटेश्वर लू और अपर निदेशक सुबोध दीक्षित के निर्देशन में की गई।
महिला सशक्तिकरण और योजनाओं की जानकारी
29 से 31 जुलाई तक महिला सशक्तिकरण पर आधारित विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया, जिसमें राज्यभर से आई प्रगतिशील महिलाओं और स्वयं सहायता समूहों की पदाधिकारी महिलाओं को सरकार की योजनाओं की विस्तार से जानकारी दी गई। वहीं 30 और 31 जुलाई को अटल भूजल योजना पर दो दिवसीय ‘ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स’ (टीओटी) कार्यक्रम का आयोजन भी हुआ।
कर्म को केंद्र में रखते हुए प्रेरणा
प्रशिक्षण के दौरान संस्थान के महानिदेशक एल. वेंकटेश्वर लू ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए ‘कर्म’ की भावना पर जोर दिया। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि अच्छे कर्म कभी व्यर्थ नहीं जाते। हमें अपने कार्य को ईमानदारी और निष्ठा से करना चाहिए, बिना फल की चिंता किए। यही सोच ग्राम विकास के क्षेत्र में बदलाव ला सकती है।
कार्यक्रम का समापन और प्रेरणादायक वक्तव्य
प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन अवसर पर “मिशन कर्मयोगी” के अंतर्गत दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इसमें कई विशिष्ट अतिथियों ने अपने अनुभव साझा किए और प्रतिभागियों को प्रेरित किया।
इस अवसर पर आध्यात्मिक गुरु दिव्य मिताली दास (इस्कॉन), वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ. किशन वीर सिंह शाक्य (पूर्व सदस्य, लोक सेवा आयोग, उत्तर प्रदेश) और मानवोदय सेवा संस्थान के संस्थापक अध्यक्ष वरुण विद्यार्थी जैसे वक्ताओं ने विचार रखे। इन सत्रों से 198 प्रतिभागियों को प्रेरणा मिली और उन्हें अपने दायित्वों को और बेहतर तरीके से निभाने की समझ विकसित हुई।
आयोजन में अधिकारियों और विशेषज्ञों की अहम भूमिका
इस पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में संस्थान की उपनिदेशक डॉ. नीरजा गुप्ता, सरिता गुप्ता, सहायक निदेशक डॉ. राजकिशोर यादव, डॉ. सीमा राठौर, डॉ. सत्येंद्र कुमार गुप्ता, विषय विशेषज्ञ डॉ. उदय प्रताप सिंह और संकाय सदस्य यशवीर सिंह, मोहित यादव, उपेंद्र कुमार दूबे व मोहम्मद शहंशाह का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
सत्र निदेशक डॉ. गरिमा सिंह ने प्रशिक्षण के दौरान कम्युनिकेशन और लाइजनिंग का कार्य बड़ी कुशलता से निभाया।