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साल में सिर्फ 1 बार खुलता है ये मंदिर, 24 घंटे बाद फिर लगेगा ताला – जानिए उज्जैन के नागचंद्रेश्वर का रहस्य!

नागपंचमी पर उज्जैन के श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट खोले गए। दुर्लभ प्रतिमा के दर्शन का यह अवसर साल में केवल एक बार मिलता है। जानिए पूरी जानकारी।

On: July 29, 2025 10:06 AM
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उज्जैन नागपंचमी पर खुला नागचंद्रेश्वर मंदिर, दुर्लभ प्रतिमा के हुए दर्शन, महंत विनीतगिरी ने की पूजा नागपंचमी के पावन अवसर पर महाकालेश्वर मंदिर की ऊपरी मंजिल पर स्थित भगवान श्री नागचंद्रेश्वर के मंदिर के पट रात 12 बजे शुभ मुहूर्त में खोले गए। हर साल सिर्फ एक बार, नागपंचमी के दिन दर्शन के लिए खोले जाने वाले इस पवित्र मंदिर में पहले पूजन का सौभाग्य महंत विनीतगिरी महाराज को मिला। उन्होंने विधि-विधान से पूजा अर्चना कर भगवान नागचंद्रेश्वर का अभिषेक किया।


पूजन के समय प्रदेश सरकार के प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री सम्पतिया उइके, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस विभाग के अधिकारी भी मंदिर में मौजूद रहे। पूजन अर्चन के बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के पट खोल दिए गए, जिसके बाद बड़ी संख्या में भक्तों ने भगवान के दर्शन किए।

दुर्लभ और चमत्कारी प्रतिमा
महंत विनीतगिरी महाराज ने बताया कि श्री नागचंद्रेश्वर की यह प्रतिमा अत्यंत अद्भुत और दुर्लभ है। इसे नेपाल से लाकर यहां स्थापित किया गया था। यह प्रतिमा लगभग 11वीं शताब्दी की मानी जाती है। इसमें भगवान शिव के मस्तक पर सात फनों वाला शेषनाग विराजमान है और उनके साथ माता पार्वती, वाहन नंदी और सिंह भी मौजूद हैं।

इस एक ही प्रतिमा में भगवान शिव, मां पार्वती, श्री गणेश, भगवान कार्तिकेय, सूर्य और चंद्रमा की झलक भी मिलती है। यह अनूठी मूर्ति अपने आप में कला और आध्यात्म का बेजोड़ संगम मानी जाती है। यही वजह है कि भक्त सालभर इस एक दिन का बेसब्री से इंतज़ार करते हैं।

पूजा के बाद शुरू हुआ भक्तों का दर्शन
जैसे ही रात 12 बजे मंदिर के कपाट खुले, पूजा अर्चना का सिलसिला शुरू हो गया। महंत और अखाड़े के संतों ने विशेष पूजा की और भगवान को दूध, जल, पंचामृत से स्नान कराकर श्रृंगार किया गया। प्रशासन की मौजूदगी में यह आयोजन बेहद शांतिपूर्ण और श्रद्धा से भरा रहा।

अब यह मंदिर पूरे दिन दर्शन के लिए खुला रहेगा और रात 12 बजे त्रिकाल पूजा के बाद मंदिर के पट फिर एक साल के लिए बंद कर दिए जाएंगे।

दोपहर में होगा शासकीय पूजन और भोग
मंदिर में दोपहर 12 बजे विशेष शासकीय पूजन होगा, जिसमें प्रशासनिक अधिकारी पूजा करेंगे। इसके बाद भगवान को विशेष भोग के रूप में दाल-बाटी अर्पित की जाएगी। माना जाता है कि यह भोग भगवान नागचंद्रेश्वर को अत्यंत प्रिय है।

हर साल लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र
श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर में हर साल नागपंचमी के दिन लाखों भक्तों की भीड़ उमड़ती है। सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस प्रशासन और महाकाल मंदिर समिति की ओर से पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। मंदिर में दर्शन की व्यवस्था सुचारु बनी रहे, इसके लिए विशेष वालंटियर्स भी तैनात किए गए हैं।

निष्कर्ष
उज्जैन के महाकाल परिसर में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर सिर्फ एक दिन के लिए खुलता है, और इस एक दिन का महत्व जितना धार्मिक है, उतना ही सांस्कृतिक और ऐतिहासिक भी। इस अद्भुत परंपरा को देखने हर साल श्रद्धालु दूर-दूर से उज्जैन आते हैं और भगवान के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य मानते हैं।


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