फरसगांव। शारदीय नवरात्रि का शुभ पर्व शुरू होने ही वाला है और श्रद्धालु माता ( Dongargarh Padayatra ) की भक्ति में लीन होकर जगह-जगह दर्शन के लिए निकल पड़े हैं। इसी कड़ी में कोंडागांव जिले के मुनगापदर मोहलई गांव के 11 श्रद्धालु युवक नवरात्रि से तीन दिन पूर्व ही नंगे पैर डोंगरगढ़ की ओर रवाना हो गए हैं। यह सभी भक्त बमलेश्वरी माता के दर्शन कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करेंगे।
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दंतेवाड़ा की जगह इस बार डोंगरगढ़ चुना
इन युवकों ने बताया कि वे पिछले पांच सालों से हर नवरात्र पर पैदल यात्रा कर दंतेवाड़ा स्थित दंतेश्वरी माता के दर्शन करने जाते रहे हैं। लेकिन इस बार उन्होंने निर्णय लिया कि वे डोंगरगढ़ में बमलेश्वरी माता के दर्शन करेंगे। इस यात्रा की लंबाई लगभग 300 किलोमीटर है, जिसे पूरा करने में उन्हें कई दिन लगेंगे। ( Dongargarh Padayatra )
यात्रा दल ने 19 सितंबर की शाम अपने गांव से कदम बढ़ाए और शनिवार की सुबह फरसगांव नगर पहुंचा। यहां गुरुद्वारा में कुछ देर विश्राम करने के बाद शाम 4 बजे वे पुनः यात्रा पर निकल पड़े। ( Dongargarh Padayatra )
50 से 60 किलोमीटर रोज तय कर रहे सफर
यात्रा में शामिल लचछीन सोढ़ी, कांतिलाल सोढ़ी और उनके साथी बताते हैं कि ग्रामीण अंचल में मेहनतकश होने की वजह से वे रोजाना 50 से 60 किलोमीटर तक पैदल चल लेते हैं। समूह में चलते हुए उन्हें थकान का अहसास नहीं होता, बल्कि आपसी बातचीत, भक्ति गीत और उत्साह से यात्रा और भी आनंदमय हो जाती है। उनका कहना है कि इस तरह की यात्रा में एक सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है, जो भक्तिभाव को और गहरा कर देती है। ( Dongargarh Padayatra )
स्वास्थ्य जागरूकता का भी है संदेश
यह पैदल यात्रा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें स्वास्थ्य का संदेश भी छुपा हुआ है। युवकों का कहना है कि आधुनिक समय में लोग आलसी हो गए हैं और ज्यादातर समय मोबाइल और अन्य बेकार की चीजों में गंवा देते हैं। लोग स्वास्थ्य को लेकर बिल्कुल भी चिंतित नहीं रहते, जिसकी वजह से तरह-तरह की बीमारियां बढ़ रही हैं। ( Dongargarh Padayatra )
युवकों ने बताया कि उनका उद्देश्य लोगों को पैदल चलने के फायदे समझाना भी है। हर व्यक्ति को दिन में कम से कम 2 से 3 किलोमीटर पैदल जरूर चलना चाहिए। इससे शरीर फिट रहता है और कई बीमारियां पास भी नहीं आतीं।
नंगे पैर कर रहे यात्रा
विशेष बात यह है कि पूरा दल नंगे पैर यात्रा कर रहा है। उनका मानना है कि माता तक इस तरह की कठिन यात्रा कर पहुंचना आस्था को और भी दृढ़ बनाता है। नंगे पैर चलना श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक है, और इस तरह का संकल्प यात्रा को और भी पवित्र बना देता है। ( Dongargarh Padayatra )
गांव-गांव से मिल रहा सहयोग
जब ये यात्री किसी कस्बे या गांव से गुजरते हैं तो स्थानीय लोग उनका स्वागत करते हैं। कहीं पानी पिलाया जाता है तो कहीं भोजन या विश्राम की व्यवस्था कर दी जाती है। फरसगांव पहुंचने पर भी गुरुद्वारे ने इन्हें कुछ देर रुकने का अवसर दिया। इस दौरान स्थानीय लोग भी उनसे बातचीत कर उनकी यात्रा के उद्देश्य को समझते हैं और उन्हें शुभकामनाएं देते हैं। ( Dongargarh Padayatra )
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यात्रा का धार्मिक और सामाजिक महत्व
नवरात्रि के दौरान इस तरह की यात्राएं केवल भक्ति का प्रदर्शन नहीं हैं, बल्कि यह सामाजिक जुड़ाव का भी माध्यम बनती हैं। जब लोग सामूहिक रूप से कठिन यात्राएं करते हैं तो उनमें अनुशासन, सामूहिकता और एकजुटता की भावना मजबूत होती है। डोंगरगढ़ पहुंचकर ये श्रद्धालु माता बमलेश्वरी के चरणों में माथा टेकेंगे और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करेंगे।
कौन-कौन हैं यात्रा में शामिल
इस पैदल यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं के नाम हैं –
लचछीन सोढ़ी, कांतिलाल सोढ़ी, मुकेश सोढ़ी, गुड्डू सोढ़ी, तम्मू सोढ़ी, दिनेश नाग, नरेंद्र नाग, पूरन सोढ़ी, गिरधर कश्यप, भारत सोढ़ी और लकेश्वर सोढ़ी। ये सभी एक साथ मिलकर उत्साहपूर्वक यात्रा कर रहे हैं। ( Dongargarh Padayatra )
कोंडागांव जिले के मुनगापदर मोहलई के इन युवाओं की यह यात्रा आस्था, भक्ति और स्वास्थ्य जागरूकता का संगम है। करीब 300 किलोमीटर का सफर तय करना आसान नहीं, लेकिन जब इरादा मजबूत हो और भक्ति का भाव साथ हो तो हर मुश्किल आसान लगती है। नवरात्रि के शुभ अवसर पर इस तरह का संकल्प समाज के लिए प्रेरणा है कि जीवन में श्रद्धा और स्वास्थ्य दोनों का महत्व है।