भोपाल। मध्य प्रदेश के ग्राम पंचायत भवनों में वर्षों से बंद पड़े वाई-फाई को लेकर अब पंचायत प्रतिनिधियों ने सरकार से सवाल पूछना शुरू कर दिया है। इस मुद्दे को लेकर मध्यप्रदेश राज्य पंचायत परिषद के प्रदेश संगठन मंत्री एवं ग्राम पंचायत किरगी खुर्द जिला -रायसेन के सरपंच हेमराज सिंह चौहान ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल को पत्र लिखकर शिकायत दर्ज कराई है। (Wi-Fi was closed in the Gram Panchayat buildings for years, the state organization minister wrote a letter to the Panchayat Minister and raised the demand.)
हेमराज सिंह ने अपने पत्र में साफ लिखा है कि वर्ष 2018 और 2019 में पंचायत भवनों में वाई-फाई लगवाया गया था, लेकिन अफसोस की बात है कि आज तक वह चालू नहीं हो सका है। ठेकेदारों द्वारा केवल वायरिंग और उपकरण लगाए गए, लेकिन इंटरनेट सेवा शुरू नहीं हुई। स्थिति यह है कि प्रदेशभर के ज्यादातर पंचायत भवनों में लगे वाई-फाई सिस्टम बस शो-पीस बनकर रह गए हैं।
कामकाज में आ रही दिक्कतें
हेमराज सिंह ने बताया कि पंचायतों में डिजिटली कामकाज को बढ़ावा देने के लिए वाई-फाई बेहद जरूरी है, लेकिन जब इंटरनेट ही चालू नहीं होगा तो न तो ऑनलाइन योजनाएं अपडेट होंगी और न ही सरकारी पोर्टलों पर समय से जानकारी भेजी जा सकेगी। इससे पंचायत सचिवों और सरपंचों को काम करने में रोजाना दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि शासन द्वारा पूरे मध्यप्रदेश में इस योजना पर भारी बजट खर्च किया गया, लेकिन इसका कोई लाभ जमीन पर नहीं दिख रहा है। सरकार की मंशा अच्छी होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर लापरवाही और ठेकेदारों की सुस्ती की वजह से यह सुविधा अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी।
प्रदेशभर की पंचायतें प्रभावित
पत्र में लिखा गया है कि राज्यभर की हजारों पंचायतों में वाई-फाई तो लगाया गया, लेकिन उसका कनेक्शन चालू नहीं किया गया। इस वजह से सरपंचों और पंचायत सचिवों को डिजिटली फाइल भेजने, पोर्टल पर जानकारी भरने, जनसुनवाई से संबंधित दस्तावेज अपलोड करने जैसे कई जरूरी कामों में परेशानी होती है।
राज्य सरकार से की विशेष अपील
सरपंच हेमराज सिंह चौहान ने पंचायत मंत्री से गुहार लगाई है कि वे इस मामले में विशेष हस्तक्षेप करें और पंचायत भवनों में जल्द से जल्द वाई-फाई सेवा को सक्रिय कराएं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में कामकाज की रफ्तार बढ़ेगी और डिजिटल इंडिया मिशन को भी मजबूती मिलेगी।
प्रदेश संगठन मंत्री ने चेताया है कि यदि समय रहते यह सुविधा शुरू नहीं की गई तो पंचायत प्रतिनिधियों में असंतोष और बढ़ सकता है, क्योंकि इससे पंचायत की कार्यप्रणाली और जवाबदेही सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है।