हिमांशु अग्रवाल छतरपुर
मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से एक बेहद दुखद और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। यहां लवकुशनगर थाना क्षेत्र के हटवां गांव में सोमवार को एक खेत में बने तालाब में डूबने से तीन मासूम भाई-बहनों की मौत हो गई। तीनों की उम्र महज 10 साल से 4 साल के बीच थी। यह हादसा तब हुआ जब बच्चे स्कूल से लौटकर आम तोड़ने खेत की ओर चले गए थे। देर रात तक घर न लौटने पर परिजन जब खोज में निकले, तो गांव के पास ही खेत के तालाब में उनके शव तैरते मिले।
आम तोड़ने निकले थे, लौटे ही नहीं
हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों की पहचान लक्ष्मी (10), तनु (8) और लोकेंद्र (4) के रूप में हुई है। तीनों सगे भाई-बहन थे। उनके पिता प्रतिपाल सिंह ने बताया कि सोमवार की दोपहर तीनों बच्चे स्कूल से लौटे और आम तोड़ने की बात कहकर खेत की ओर चले गए। जब रात के 8:30 बज गए और बच्चे वापस नहीं आए, तो परिजनों को चिंता हुई। खोजबीन शुरू हुई और करीब एक घंटे बाद खेत के पास तालाब में तीनों के शव दिखाई दिए।
फिसलकर तालाब में गिरने की आशंका
परिजनों का कहना है कि बच्चे खेत में आम तोड़ने गए थे और वहीं मौजूद तालाब के पास खेलते हुए शायद फिसलकर पानी में गिर पड़े। यह तालाब खेत की सिंचाई के लिए बनाया गया था और किनारे काफी फिसलन भरे थे। आशंका जताई जा रही है कि पहले एक बच्चा फिसला होगा, और बाकी दो उसे बचाने के चक्कर में तालाब में गिर गए होंगे।
डॉक्टरों ने मृत घोषित किया
परिजन तुरंत बच्चों को बारीगढ़ अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया। रात करीब 9:30 बजे पुलिस को सूचना दी गई।
पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे गए
बीएमओ एसएस चौहान ने जानकारी दी कि बच्चों के शवों का पोस्टमार्टम लवकुश नगर अस्पताल में किया गया। रिपोर्ट के बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया गया है।
प्रशासन ने जताया दुख, जांच जारी
हादसे की जानकारी मिलते ही स्थानीय प्रशासन हरकत में आया। लवकुशनगर एसडीओपी नवीन दुबे ने बताया कि घटना बेहद दुखद है। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है। परिजनों के बयान दर्ज किए जाएंगे और यदि किसी प्रकार की लापरवाही पाई गई तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गांव में मातम, हर आंख नम
गांव में इस हादसे के बाद मातम का माहौल है। तीन मासूम बच्चों की एक साथ मौत ने सभी को झकझोर कर रख दिया है। गांववालों की आंखें नम हैं और हर कोई इस दर्द को महसूस कर रहा है।
सबक सिखाने वाला हादसा
हटवां गांव की यह त्रासदी सिर्फ एक परिवार का नहीं, पूरे समाज के लिए चेतावनी है। ग्रामीण इलाकों में खेतों के पास बने जल स्रोतों के आसपास सुरक्षा के पर्याप्त इंतज़ाम नहीं होते। अक्सर इन तालाबों के किनारे न तो कोई घेराव होता है और न ही चेतावनी बोर्ड लगाए जाते हैं। ऐसे में बच्चों के लिए ये जगहें खेल का मैदान बन जाती हैं, जो कभी-कभी जानलेवा साबित होती हैं। अब वक्त आ गया है कि प्रशासन और स्थानीय समुदाय मिलकर ऐसे खतरनाक स्थानों को सुरक्षित बनाएं, ताकि भविष्य में कोई मासूम इस लापरवाही की कीमत अपनी जान से न चुकाए।