रविशंकर सोनी, पन्ना/पवई। Saptashakti Sangam पन्ना जिले के पवई में एक विशेष आयोजन ने समाज में जागरूकता और नारी सशक्तिकरण का संदेश दिया। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के निर्देशन और सरस्वती शिक्षा परिषद महाकौशल प्रांत जबलपुर के तत्वावधान में सरस्वती उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पवई में ‘सप्तशक्ति संगम’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित हुआ।
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कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इस दौरान विद्यालय प्रांगण में बड़ी संख्या में महिलाओं, शिक्षिकाओं, छात्राओं और समाजसेवियों की उपस्थिति रही। मंच पर वक्ताओं ने भारतीय संस्कृति में नारी की भूमिका, शक्ति और सम्मान पर अपने विचार व्यक्त किए। Saptashakti Sangam
भारतीय संविधान और नारी का महत्व
कार्यक्रम में अर्चना सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संविधान में महिलाओं को विशेष स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा,
“आज महिलाएँ हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। वे न सिर्फ घर संभाल रही हैं, बल्कि समाज में भी अपनी अहम भूमिका निभा रही हैं।” Saptashakti Sangam
उन्होंने यह भी बताया कि बच्चे को संस्कार देना, परिवार के सभी सदस्यों की देखभाल करना और समाज में सकारात्मक योगदान देना — ये सभी कार्य महिला की नैसर्गिक जिम्मेदारी हैं। Saptashakti Sangam
अर्चना सिंह ने कहा, “जहाँ नारी का सम्मान होता है, वही समाज सच्चे अर्थों में प्रगति करता है।”
नारी शक्ति के सात रूपों पर ज्योति नाग्याच के विचार
ज्योति नाग्याच जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि नारी शक्ति सात रूपों में समाज में विद्यमान है — माता, बहन, बेटी, पत्नी, शिक्षिका, सेविका और नेत्री। Saptashakti Sangam
उन्होंने कहा,
“नारी हर रूप में त्याग, प्रेम, करुणा और नेतृत्व की मिसाल है। वह समाज की आधारशिला है और जहाँ उसका सम्मान होता है, वहीं समृद्धि और संस्कार फलते-फूलते हैं।”
ज्योति नाग्याच ने आगे कहा कि आज की नारी आत्मनिर्भर, सक्षम और सशक्त है। वह न केवल अपने परिवार का गौरव बढ़ा रही है बल्कि पूरे देश के विकास में भी अग्रणी भूमिका निभा रही है।
उन्होंने सभी उपस्थित लोगों से आग्रह किया कि हमें नारी शक्ति के सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए। Saptashakti Sangam
चांदनी अग्रवाल ने बताया – ‘सप्तशक्ति’ का दार्शनिक अर्थ
कार्यक्रम में चांदनी अग्रवाल जी ने बेहद प्रभावशाली शब्दों में ‘सप्तशक्ति’ की व्याख्या की। उन्होंने कहा कि समस्त सृष्टि, समाज और चेतना का मूल एक ही शक्ति है, जो विभिन्न रूपों में प्रकट होती है। सात दिशाओं, सात तत्वों और सात शक्तियों में विभाजन केवल प्रतीक हैं, जबकि उनका स्रोत एक ही ऊर्जा है। Saptashakti Sangam
उन्होंने कहा,
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“नारी उसी सृजनात्मक शक्ति की प्रतिमूर्ति है, जिसके बिना समाज अधूरा है।”
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएँ हुई शामिल
कार्यक्रम के दौरान जिला सह-संयोजिका मालती रैकवार, सह-संयोजिका शीतल लखेरा, बबीता पाण्डेय, उमा पटेल, जिला सचिव प्रमोद नाग्याच, भवानी प्रसाद पटेल, और विद्यालय के प्राचार्य राजेन्द्र तिवारी सहित संस्था परिवार मौजूद रहा।
महिला शक्ति की बड़ी संख्या में उपस्थिति ने यह दर्शाया कि समाज में आज भी संस्कार और परंपराओं के साथ नारी सशक्तिकरण की भावना मजबूती से जीवित है। Saptashakti Sangam
समाज परिवर्तन की दिशा में प्रेरक कदम
‘सप्तशक्ति संगम’ कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि एक सशक्त और समृद्ध भारत का निर्माण तभी संभव है जब नारी को उसके सभी अधिकारों, सम्मान और अवसरों के साथ समाज में अग्रणी भूमिका दी जाए। Saptashakti Sangam
इस आयोजन ने न केवल नारी शक्ति के महत्व को रेखांकित किया, बल्कि आने वाली पीढ़ी को भी यह प्रेरणा दी कि समाज का उत्थान महिलाओं के सहयोग और सम्मान के बिना अधूरा है। Saptashakti Sangam