रविशंकर सोनी पन्ना/पवई। Sant Namdev Jayanti संत शिरोमणि नामदेव जी महाराज की 755वीं जयंती के अवसर पर शनिवार को नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। नामदेव समाज के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह लगभग 10 बजे जगदीश स्वामी मंदिर से शुरू हुई शोभायात्रा में सैकड़ों श्रद्धालु, महिलाएं, बच्चे और युवा शामिल हुए।
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यह शोभायात्रा गांधी चौक, झंडा बाजार, मिलोनीगंज, करही तिराहा होते हुए कन्या शाला पहुंची, जहां से आगे कार्यक्रम स्थल कलेही मंदिर में जाकर सम्पन्न हुई। पूरे नगर में जगह-जगह पुष्पवर्षा और स्वागत द्वारों से शोभायात्रा का स्वागत किया गया। भक्तों के जयघोष और भजन की धुनों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। Sant Namdev Jayanti
पूजा-अर्चना और सुंदरकांड पाठ का आयोजन
कार्यक्रम स्थल कलेही मंदिर में पहुंचकर श्रद्धालुओं ने विधिवत पूजा-अर्चना की। इस दौरान सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया और आरती के बाद प्रसाद वितरण हुआ। भक्तों ने कहा कि यह दिन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भक्ति, प्रेम और समानता का संदेश देने का अवसर है। Sant Namdev Jayanti
गांधी चौक स्थित शिव मंदिर में भी नामदेव समाज द्वारा सुंदरकांड पाठ और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया, जहां समाज के सैकड़ों लोग एकत्रित हुए। भक्तों ने घंटों तक भजन गाकर संत नामदेव जी के जीवन और उनकी शिक्षाओं को याद किया।
नामदेव जी की भक्ति और जीवन दर्शन
कहा जाता है कि संत शिरोमणि नामदेव जी बचपन से ही भगवान विट्ठल जी के परम भक्त थे। वे मंदिर में बैठकर घंटों भक्ति किया करते थे। जब परिवारजन उन्हें अन्य कार्यों में लगाना चाहते, तो वे कहते थे— “मेरा जीवन विट्ठल की सेवा में ही सार्थक है।”
एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, एक बार मंदिर के पुजारी ने उन्हें बाहर निकाल दिया। तब नामदेव जी मंदिर की दीवार के दूसरी ओर बैठ गए और भजन करने लगे। तभी भगवान विट्ठल स्वयं प्रकट हो गए और भक्त की सच्ची भक्ति का मान रखा। Sant Namdev Jayanti
उनका जीवन सिखाता है कि ईश्वर के प्रति सच्ची निष्ठा और भक्ति किसी जाति या धर्म की सीमा में नहीं बंधी होती। नामदेव जी समाज में समानता, प्रेम और भक्ति का संदेश देते हुए कहते थे— “भगवान सबके भीतर हैं, बस भक्ति सच्चे मन से करनी चाहिए।”
नगर में उमड़ा श्रद्धा और उत्साह का माहौल
पवई नगर में संत नामदेव जी की जयंती पर श्रद्धा का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। महिलाएं पारंपरिक परिधान में सजी थीं, वहीं युवाओं ने समाज के झंडे और बैनर लेकर शोभायात्रा में भाग लिया। बच्चों ने भजन गाए और जगह-जगह मिठाई एवं जल वितरण की व्यवस्था की गई। Sant Namdev Jayanti
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कार्यक्रम के अंत में समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि संत नामदेव जी की शिक्षाएं आज भी समाज में समानता और मानवता का मार्ग दिखाती हैं। उन्होंने बताया कि आने वाले वर्षों में इस जयंती को और भव्य रूप से मनाने की योजना बनाई जा रही है, ताकि अधिक से अधिक लोग उनके विचारों से प्रेरित हो सकें। Sant Namdev Jayanti
संत नामदेव जी की 755वीं जयंती का यह उत्सव भक्ति, प्रेम और एकता का प्रतीक बन गया। लोगों ने भजन, कीर्तन और सुंदरकांड पाठ के माध्यम से पूरे दिन वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया। Sant Namdev Jayanti