सिलवानी। गणेश चतुर्थी अभी दूर है, लेकिन मूर्तिकारों की तैयारी जोरों पर है। बारिश और समय की चुनौती को देखते हुए इस बार कारीगरों ने दो महीने पहले से ही भगवान गणेश की मिट्टी प्रतिमाओं का निर्माण शुरू कर दिया है। उदयपुरा रोड पर स्थित मूर्तिकार जयकुमार साहू और उनकी टीम दिन-रात जुटी है ताकि समय पर ऑर्डर तैयार कर सकें।
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इस बार खास बात ये है कि पीओपी (प्लास्टर ऑफ पेरिस) पर बैन लगने के बाद मिट्टी से बनी प्रतिमाओं की मांग काफी बढ़ गई है। झांकी आयोजक अब पर्यावरण के प्रति जागरूक होकर सिर्फ मिट्टी की प्रतिमाओं को प्राथमिकता दे रहे हैं।
बारिश बनी चुनौती, फिर भी नहीं रुकी तैयारी
मूर्तिकार जयकुमार साहू ने बताया कि मिट्टी की प्रतिमाएं बनाना आसान नहीं है। इनकी एक-एक परत को सूखने में समय लगता है और बारिश के मौसम में यह और मुश्किल हो जाता है। लगातार बारिश के कारण मिट्टी देर से सूखती है, जिससे निर्माण कार्य में देरी होती है।
“कई बार हमें हीटर और लकड़ी के चूल्हे की मदद से प्रतिमाएं सुखानी पड़ती हैं, जिससे लागत भी बढ़ जाती है,” जयकुमार ने बताया। उन्होंने कहा कि समय से काम शुरू करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आखिरी वक्त पर कोई मानसिक दबाव नहीं रहता और सजावट के लिए भी पूरा समय मिल जाता है।
ढांचों से लेकर सजावट तक—चल रहा है बारीक काम
इस समय कारीगर प्रतिमाओं के ढांचे तैयार करने से लेकर डिज़ाइनिंग और सजावट में जुटे हुए हैं। प्रतिमा निर्माण की शुरुआत ढांचे से होती है, जिसमें मिट्टी की मोटी परतें धीरे-धीरे चढ़ाई जाती हैं। सूखने के बाद इन्हें चिकनाई दी जाती है, फिर पेंटिंग और सजावट की प्रक्रिया शुरू होती है।
इस बार गणेश प्रतिमाएं 3 फीट से लेकर 10 फीट तक बनाई जा रही हैं। जयकुमार साहू ने बताया कि 5 फीट की मूर्तियों की मांग सबसे ज्यादा है, क्योंकि इन्हें स्थापित करने और बाद में विसर्जन करने में आसानी होती है।
रिद्धि-सिद्धि संग विराजेंगे गजानन
इस बार की प्रतिमाएं न सिर्फ पर्यावरण के अनुकूल होंगी बल्कि दिखने में भी बेहद आकर्षक होंगी। गणेश जी को रिद्धि और सिद्धि के साथ विराजमान दिखाया जा रहा है, जिससे श्रद्धालु और भी ज्यादा भावुक और जुड़े हुए महसूस कर सकें।
कारीगरों का कहना है कि हर मूर्ति को इस बार खास पैटर्न, डिज़ाइन और रंगों से सजाया जा रहा है। यह मूर्तियां बाजार में थोड़ी महंगी जरूर हैं, लेकिन इनकी क्वालिटी और मेहनत इसे वाजिब बनाती है।
सैकड़ों पंडालों में स्थापित होंगी प्रतिमाएं
इस बार नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में सैकड़ों गणेश प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। सार्वजनिक पंडालों में छोटे और मझोले आकार की मूर्तियों की मांग सबसे अधिक है। आयोजक भी अब ऐसी मूर्तियों को तरजीह दे रहे हैं, जिन्हें आसानी से विसर्जित किया जा सके और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।
जयकुमार साहू ने बताया कि जैसे-जैसे गणेश चतुर्थी नजदीक आ रही है, मूर्तियों को अंतिम रूप देने का काम भी तेज हो गया है। कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं ताकि समय पर सभी ऑर्डर पूरे किए जा सकें।