Mandsaur Civil Hospital मध्यप्रदेश को लेकर अक्सर कहा जाता है—“एमपी अजब है, सबसे गजब है।” और इस बार मंदसौर जिले का सीतामऊ इस कहावत को बिल्कुल सच साबित करता नजर आ रहा है। यहां करीब 19 करोड़ 80 लाख रुपए की लागत से एक आधुनिक सिविल हॉस्पिटल तैयार तो कर दिया गया, लेकिन हैरानी की बात ये है कि अस्पताल के निर्माण में सबसे जरूरी सुविधाएँ ही छोड़ दी गईं। इंजीनियर न केवल पोस्टमार्टम रूम (PM Room) बनाना भूल गए, बल्कि ड्रेनेज सिस्टम डालना भी मिस कर दिया।
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ये चूक इतनी बड़ी है कि पूरा हॉस्पिटल बनकर तैयार होने के बावजूद छह महीनों से ताला लगाए खड़ा है। करोड़ों की इमारत धूल खा रही है और लोग बेहतर चिकित्सा सुविधा का इंतजार कर रहे हैं। Mandsaur Civil Hospital
19.80 करोड़ की लागत से बना 35 कमरों वाला आधुनिक हॉस्पिटल
सीतामऊ में जो नया सिविल हॉस्पिटल बनाया गया है, वह कागजों में एक मॉडल हेल्थ सेंटर बताया गया है। अस्पताल में इस तरह की सभी आधुनिक सुविधाएँ शामिल की गईं—
- अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर
- ब्लड बैंक
- 3 ओपीडी
- 50 बेड की व्यवस्था
- एक्स-रे रूम
- सोनोग्राफी रूम
- लैब, दवाई वितरण केंद्र सहित कई मेडिकल सेक्शन
कागजों और फाइलों में सब कुछ बिल्कुल शानदार दिख रहा है। निर्माण एजेंसी भी दावा कर चुकी है कि बिल्डिंग पूरी तरह तैयार है और हैंडओवर के लिए तैयार है।
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लेकिन असलियत में तस्वीर कुछ और ही है।
इंजीनियरों की भयंकर चूक—पोस्टमार्टम रूम तक नहीं बनाया
हर बड़े हॉस्पिटल में PM रूम बनाना अनिवार्य होता है। यहां डॉक्टर शवों का पोस्टमार्टम करते हैं और जरूरत पड़ने पर कुछ समय तक उन्हें सुरक्षित भी रखा जाता है। Mandsaur Civil Hospital
लेकिन सीतामऊ के इस करोड़ों के हॉस्पिटल में PM रूम है ही नहीं। Mandsaur Civil Hospital
यह चूक इतनी बेसिक है कि किसी भी अस्पताल परियोजना में इसे भूलना लगभग नामुमकिन माना जाता है। लेकिन यहां ऐसा हुआ। Mandsaur Civil Hospital
ड्रेनेज लाइन भी नहीं डाली, मेडिकल वेस्ट का निस्तारण कैसे होगा?
मामला यहीं खत्म नहीं होता। अस्पताल में ड्रेनेज सिस्टम तक नहीं डाला गया।
जबकि अस्पताल में—
- डिलीवरी
- ऑपरेशन
- कई प्रकार की सर्जरी
- दवाइयों और मेडिकल वेस्ट का उपयोग
होता है और इससे बड़ी मात्रा में बायो-मेडिकल वेस्ट निकलता है। बिना ड्रेनेज सिस्टम के इसका निस्तारण नामुमकिन है। Mandsaur Civil Hospital
यानी अस्पताल कागजों में चाहे जितना आधुनिक क्यों न हो, जमीन पर वह उपयोग के लायक ही नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग ने हैंडओवर लेने से किया इनकार
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने साफ कहा है कि—
- पीएम रूम के बिना
- ड्रेनेज लाइन के बिना
अस्पताल को चालू करना न सिर्फ असंभव, बल्कि जोखिमपूर्ण भी है।
इसी वजह से विभाग ने बिल्डिंग का हैंडओवर लेने से इंकार कर दिया है। इससे सीधे-सीधे करोड़ों की इमारत बेकार पड़ी है। Mandsaur Civil Hospital
6 महीने से अस्पताल बंद, मरीज परेशान
नई बिल्डिंग तैयार होने के बाद भी मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
- मरीज बेहतर सुविधा की राह ताक रहे हैं
- पुरानी व्यवस्था से लोग परेशान हैं
- करोड़ों की लागत से बना अस्पताल बंद पड़ा है
लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हो गई?
“एमपी अजब है—गजब है” फिर सच साबित
यह पूरा मामला इस कहावत को फिर सच करता है।
जब 19.80 करोड़ की लागत से आधुनिक अस्पताल बनाया जा रहा था, तब सबसे बुनियादी चीजें ही छूट गईं। Mandsaur Civil Hospital
इसी वजह से अब लोग मजाक में ही सही, लेकिन सवाल पूछ रहे हैं—
“आखिर किसने ऐसी ड्राइंग पास की जिसमें न पीएम रूम था, न ड्रेनेज लाइन?”
किसकी गलती? जिम्मेदार कौन?
अब सबसे बड़ा सवाल यही बन गया है—
- क्या निर्माण एजेंसी की चूक है?
- या इंजीनियरों ने ड्राइंग और प्लानिंग में लापरवाही की?
- क्या स्वास्थ्य विभाग ने निरीक्षण के दौरान यह कमी नहीं देखी?
जवाब अभी किसी के पास नहीं है, लेकिन इस लापरवाही की कीमत जनता चुका रही है।
सरकार और विभाग की भूमिका पर भी सवाल
जब इतना बड़ा प्रोजेक्ट बन रहा था, तब कई स्तरों पर निरीक्षण होना चाहिए था। लेकिन अगर सब कुछ सही चलता तो ऐसी गलती कभी हो ही नहीं सकती थी। Mandsaur Civil Hospital
अस्पताल शुरू होगा या फिर करोड़ों की इमारत बर्बाद होगी?
यह समय बताएगा कि—
- क्या जल्द ही पीएम रूम और ड्रेनेज सिस्टम जोड़कर अस्पताल चालू होगा,
या - यह बिल्डिंग वर्षों तक यूं ही ताला लगाए खड़ी रह जाएगी।
फिलहाल तो यह मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बनी हुई है।
सीतामऊ का यह अस्पताल बताता है कि सरकारी परियोजनाओं में लापरवाही किस हद तक पहुंच सकती है। Mandsaur Civil Hospital
लोग आधुनिक सुविधाओं वाले अस्पताल का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन प्रोजेक्ट में हुई छोटी-सी लेकिन महत्वपूर्ण भूल पूरे काम को रोककर खड़ा कर चुकी है।
और यही वजह है कि लोग फिर कह रहे हैं—
“एमपी अजब है, सबसे गजब है।”