अशोक सोनी खालवा। Illegal Medicine Sale प्रदेश में हाल ही में विषाक्त कफ सिरप से बच्चों की मौत के बाद सरकार और प्रशासन हरकत में आ गए हैं, लेकिन खालवा और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में अभी भी कई मेडिकल स्टोर फार्मेसी एक्ट का खुला उल्लंघन करते हुए चल रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, यहां कई दवा दुकानों का संचालन ऐसे लोगों द्वारा किया जा रहा है, जिनके पास खुद का वैध फार्मेसी लाइसेंस नहीं है। ये दुकानदार किराए पर किसी अन्य व्यक्ति का लाइसेंस लेकर कारोबार कर रहे हैं, जो दवा अधिनियम के नियमों का सीधा उल्लंघन है।
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स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इन क्षेत्रों में कई मेडिकल स्टोर ऐसे हैं जहां योग्य फार्मासिस्ट की मौजूदगी ही नहीं रहती। ऐसे में दवाओं की बिक्री बिना किसी पेशेवर निगरानी के हो रही है। परिणामस्वरूप, गलत दवाओं का उपयोग और मरीजों की जान पर खतरा बढ़ गया है। Illegal Medicine Sale
गांवों में झोलाछाप डॉक्टर भी खोल रहे मेडिकल
खालवा सहित आसपास के वनांचल इलाकों में कई झोलाछाप डॉक्टर भी मेडिकल खोलकर बैठ गए हैं। ये न तो पंजीकृत हैं और न ही इनके पास फार्मेसी की डिग्री है, लेकिन फिर भी खुलेआम हर बीमारी की दवा बेच रहे हैं। कई मामलों में तो इन कथित डॉक्टरों के “दवाखाने” में बिना पर्चे के एंटीबायोटिक और अन्य खतरनाक दवाएं तक बेची जा रही हैं। Illegal Medicine Sale
जानकारों का कहना है कि यह सब इसलिए संभव हो पा रहा है क्योंकि जिम्मेदार अधिकारी नियमित रूप से जांच नहीं कर रहे। ड्रग्स ऑफिसर की लापरवाही से यह कारोबार लगातार फैलता जा रहा है। Illegal Medicine Sale
कानूनी प्रावधान क्या कहते हैं?
फार्मेसी अधिनियम 1948 की धारा 42 के तहत स्पष्ट रूप से कहा गया है कि केवल पंजीकृत फार्मासिस्ट ही डॉक्टर के पर्चे पर दवाओं का वितरण कर सकता है। यदि कोई गैर-पंजीकृत व्यक्ति दवाओं का विक्रय या वितरण करता है, तो यह कानून का उल्लंघन माना जाएगा और उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। Illegal Medicine Sale
8 अक्टूबर को मध्यप्रदेश फार्मेसी काउंसिल ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए कहा था कि किसी भी मेडिकल स्टोर पर बिना पंजीकृत फार्मासिस्ट की मौजूदगी गैरकानूनी है। इसके बावजूद, कई स्थानों पर इस आदेश को नजरअंदाज किया जा रहा है।
ड्रग्स इंस्पेक्टर के कार्य और जिम्मेदारी
ड्रग्स इंस्पेक्टर का मुख्य कार्य दवा निर्माण इकाइयों और मेडिकल स्टोर्स का निरीक्षण करना होता है। उन्हें यह देखना होता है कि दुकानों पर वैध लाइसेंस है या नहीं, कहीं नकली या घटिया दवाओं की बिक्री तो नहीं हो रही। Illegal Medicine Sale
इसके अलावा, वे नमूने लेकर प्रयोगशाला जांच करवाने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होते हैं। अगर कोई मेडिकल स्टोर बिना अनुमति के चल रहा है, तो उसकी रिपोर्ट बनाकर कार्रवाई की सिफारिश भी उन्हीं के द्वारा की जाती है।
जिम्मेदारों की लापरवाही उजागर
मामले पर जब दवा निरीक्षक मनजीत जामले से बात की गई तो उन्होंने कहा,
“समय मिलेगा तो खालवा के मेडिकलों की जांच कर फार्मासिस्ट की जानकारी ली जाएगी। अगर फार्मासिस्ट मेडिकल पर मौजूद नहीं है, तो यह गलत है।”
उनके इस बयान से साफ जाहिर है कि विभाग के पास न तो नियमित मॉनिटरिंग की व्यवस्था है और न ही तत्काल कार्रवाई की योजना। इस लापरवाही का सीधा खामियाजा ग्रामीण जनता को भुगतना पड़ रहा है, जो इन अवैध मेडिकलों से दवाएं खरीद रही है।
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ग्रामीणों में बढ़ी चिंता
ग्रामीण क्षेत्र के लोगों में अब इस बात को लेकर चिंता बढ़ गई है कि आखिर उनकी सेहत की सुरक्षा किसके जिम्मे है। जिन मेडिकल दुकानों से वे वर्षों से दवाएं ले रहे हैं, क्या वहां की दवाएं सही भी हैं या नहीं? कई लोगों का कहना है कि प्रशासन को जल्द ही सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि झोलाछाप डॉक्टर और बिना लाइसेंस वाले मेडिकल स्टोरों पर अंकुश लग सके।
खालवा और आसपास के इलाकों में किराए के लाइसेंस पर चल रहे मेडिकल स्टोर्स न केवल कानून का उल्लंघन कर रहे हैं, बल्कि लोगों की जान के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हैं। फार्मेसी एक्ट 1948 को कड़ाई से लागू करना और नियमित जांच अभियान चलाना बेहद जरूरी है। जिम्मेदार विभागों को अब केवल “समय मिलेगा तो देखेंगे” जैसी बातें छोड़कर, जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई करनी होगी ताकि ग्रामीणों की सेहत सुरक्षित रह सके। Illegal Medicine Sale