सांची, मध्यप्रदेश। सांची बौद्ध-भारतीय ज्ञान अध्ययन विश्वविद्यालय में विद्या परिषद की अहम बैठक संपन्न हुई, जिसमें कई बड़े शैक्षणिक और सांस्कृतिक निर्णय लिए गए। कुलपति प्रोफेसर वैद्यनाथ लाभ की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में तय हुआ कि जनवरी या फरवरी 2026 में विश्वविद्यालय का दीक्षांत समारोह आयोजित किया जाएगा। इस बार दीक्षांत समारोह में पारंपरिक वेशभूषा और विषय चयन पर भी चर्चा की गई, ताकि कार्यक्रम की गरिमा बनी रहे।
श्रीलंका के उपतिस्स नायक थैरो को मिलेगी मानद उपाधि
विद्या परिषद की बैठक में सबसे महत्वपूर्ण फैसला यह रहा कि श्रीलंका की महाबोधि सोसायटी के वरिष्ठ बौद्ध विद्वान पूज्य उपतिस्स नायक थैरो को विश्वविद्यालय की ओर से मानद उपाधि (Honorary Degree) प्रदान की जाएगी। यह उपाधि उन्हें बौद्ध धर्म और सांची क्षेत्र के प्रति उनके अमूल्य योगदान के लिए दी जा रही है।
पाठ्यक्रमों में होंगे बदलाव, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप होगा सिलेबस
बैठक में यह भी तय किया गया कि विश्वविद्यालय के सभी विषयों का पाठ्यक्रम (सिलेबस) अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुसार अपडेट किया जाएगा। इसके लिए हर विषय की बोर्ड ऑफ स्टडीज की बैठक बुलाकर पाठ्यक्रम में जरूरी बदलाव किए जाएंगे।
स्वदेशी सुरक्षा तकनीकों को बढ़ावा देने की तैयारी
भारतीय प्राचीन सुरक्षा विधाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय में अब स्वरक्षा और प्राचीन सुरक्षा तकनीकों पर आधारित डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्स शुरू किए जाएंगे। इस कदम से युवाओं में आत्मरक्षा के साथ-साथ भारत की समृद्ध परंपरा के प्रति समझ और सम्मान भी बढ़ेगा।
PhD प्रवेश के लिए लागू होंगे राष्ट्रीय पात्रता नियम
विद्या परिषद ने यह भी तय किया कि अब विश्वविद्यालय में PhD (विद्या वाचस्पति) में प्रवेश के लिए UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) के नियमों को अपनाया जाएगा। इससे शैक्षणिक गुणवत्ता और पारदर्शिता दोनों में सुधार होगा।
विभागों के नाम में भी हुआ बदलाव
शैक्षणिक समरूपता बनाए रखने के लिए विश्वविद्यालय के भारतीय दर्शन विभाग का नाम अब सिर्फ ‘दर्शन विभाग’ कर दिया गया है। इससे पहले वैकल्पिक शिक्षा विभाग का नाम बदलकर ‘शिक्षा विभाग’ किया जा चुका है। इन बदलावों का उद्देश्य विभागों की पहचान को व्यापक और स्पष्ट बनाना है।
विशेषज्ञों की मौजूदगी में हुई चर्चा
बैठक में देशभर के प्रतिष्ठित संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञों ने भी भाग लिया। इसमें डॉ. अंबिकादत्त शर्मा (हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर), प्रो. पुष्पलता सिंह (बीएचयू, वाराणसी) और डॉ. शाश्वती मुत्सुद्दि (कोलकाता विश्वविद्यालय, पालि विभाग) शामिल रहीं। बैठक की कार्यवाही का संचालन कुलसचिव प्रो. नवीन कुमार मेहता ने किया।
सांची विश्वविद्यालय आगे बढ़ रहा है नए सोच के साथ
इन निर्णयों से स्पष्ट है कि सांची विश्वविद्यालय सिर्फ परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि आधुनिक सोच और राष्ट्रीय नीतियों के साथ कदमताल कर रहा है। आने वाला दीक्षांत समारोह न सिर्फ छात्रों के लिए एक बड़ा अवसर होगा, बल्कि यह विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और सांस्कृतिक योगदान को भी नई ऊंचाई देगा।