रायसेन। शहर के वार्ड नंबर 3 में संचालित बेबी कॉवेंट स्कूल विवादों में आ गया है। यहां छोटे बच्चों को पढ़ाने के लिए वितरित किए गए पट्टी पहाड़े में हिंदी वर्णमाला के साथ मस्जिद, नमाज और काबा के चित्र छपे मिले। यह मामला सामने आते ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने विरोध दर्ज कराया, जिसके बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर विवादित पट्टी पहाड़े जब्त कर लिए। (Baby Convent School Controversy in Raisen: Mosque, Namaz and Kaaba in Patti Pahad, ABVP opposes)
मामला ऐसे आया सामने
शुक्रवार सुबह करीब 11:30 बजे स्कूल में पढ़ाई के दौरान नर्सरी और शुरुआती कक्षाओं के बच्चों को प्राचार्य आईए कुरैशी ने पट्टी और पहाड़े बांटे। इनमें ‘म से मस्जिद’, ‘न से नमाज’, ‘क से काबा’ और ‘औ से औरत’ में हिजाब पहने महिला की तस्वीर छपी थी। घर पर पढ़ाई के वक्त एक बच्ची के चाचा ने जब इसे देखा, तो उन्हें शक हुआ। उन्होंने तुरंत इसकी तस्वीर खींचकर सोशल मीडिया पर डाल दी, जो देखते ही देखते वायरल हो गई।
अभाविप ने जताया विरोध
सोशल मीडिया पर मामला फैलते ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारी और कार्यकर्ता स्कूल पहुंचे और विरोध जताया। अभाविप ब्लॉक संयोजक अश्वनी पटेल का कहना है कि यह पट्टी पहाड़ा दुकानों पर उपलब्ध नहीं है, बल्कि इसे खासतौर पर स्कूल द्वारा तैयार कराया गया है। उन्होंने कहा, “हमने भी पट्टी पहाड़े से पढ़ाई की है, लेकिन इस तरह की सामग्री कभी नहीं देखी। हमने जिला शिक्षा अधिकारी को शिकायत दी है और स्कूल की मान्यता रद्द करने की मांग करेंगे।”
पुलिस की कार्रवाई
कोतवाली थाना प्रभारी नरेंद्र गोयल पुलिस टीम के साथ स्कूल पहुंचे और विवादित पट्टी पहाड़े जब्त कर लिए। उनका कहना है कि सामग्री में कुछ आपत्तिजनक चित्र और शब्द मिले हैं, जिसकी जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी को दे दी गई है।
प्राचार्य का बयान
स्कूल की प्राचार्य आईए कुरैशी ने गलती स्वीकार की और कहा, “हमें पता नहीं था कि इस पट्टी पहाड़े में हिंदी की जगह उर्दू शब्द और धार्मिक चित्र हैं। यह सामग्री भोपाल से मंगाई गई थी। हमने 30 साल से स्कूल चलाया है, हमारे मन में किसी धर्म के प्रति पक्षपात नहीं है। मैंने परिजनों से भी पट्टी पहाड़े वापस करने को कहा है।”
मूल्य पर भी उठे सवाल
जानकारी के अनुसार, पट्टी पहाड़े की असल कीमत 10 रुपए थी, लेकिन उस पर यह अंक मिटाकर 50 रुपए कीमत दर्ज कर दी गई। यह भी जांच का विषय है कि बच्चों को यह सामग्री कैसे और किसके निर्देश पर उपलब्ध कराई गई।
शिक्षा विभाग का रुख
प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी डीडी रजक ने कहा, “स्कूल की मान्यता गाइडलाइन के मुताबिक ऐसी सामग्री बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। मामले की जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी।”