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Ulhas Navbharat Saksharta खंडवा: साक्षरता परीक्षा में गलत प्रश्न, विभागीय लापरवाही से असाक्षरों की परीक्षा बनी सवालों के घेरे में MPNEWS

Ulhas Navbharat Saksharta खंडवा जिले के खालवा में साक्षरता मिशन की परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्रों में गंभीर गलतियां सामने आईं। गलत उत्तर विकल्प और त्रुटिपूर्ण सवालों ने शिक्षकों व परीक्षार्थियों को उलझाया, जिससे विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए।

On: September 21, 2025 2:12 PM
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Ulhas Navbharat Saksharta

अशोक सोनी, खालवा (खंडवा) ( Ulhas Navbharat Saksharta ) खंडवा जिले के खालवा विकासखंड से शिक्षा व्यवस्था की बड़ी लापरवाही सामने आई है। असाक्षरों को साक्षर बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे ‘उल्हास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम’ के तहत शनिवार को आयोजित परीक्षा में प्रश्नपत्रों में कई गंभीर गलतियां पकड़ी गईं।

दरअसल, यह परीक्षा प्रदेशभर में आयोजित की गई थी। खालवा सहित पूरे जिले में मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मक मूल्यांकन परीक्षा कराई गई। लेकिन परीक्षा के दौरान वितरित प्रश्नपत्रों में चार ऐसे सवाल थे, जिनमें या तो उत्तर ही मौजूद नहीं था या फिर सवाल ही गलत तरीके से पूछा गया था। इस वजह से परीक्षार्थी तो उलझे ही, साथ ही शिक्षक भी सही उत्तर तय करने में परेशान होते रहे। ( Ulhas Navbharat Saksharta )

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गलतियों से भरे प्रश्नपत्र ने खोली तैयारी की पोल

परीक्षा के गणित वाले प्रश्नपत्र में सबसे ज्यादा गड़बड़ी पाई गई।

प्रश्न क्रमांक 3 में वस्तुओं के मूल्य को सही नोट से मिलाने का सवाल दिया गया। मोबाइल कवर की कीमत 250 रुपए बताई गई थी, लेकिन उसका सही उत्तर विकल्प ही मौजूद नहीं था। ( Ulhas Navbharat Saksharta )

प्रश्न क्रमांक 4 (ख) में पूछा गया कि अगर 22,500 रुपए का मोबाइल 1,150 रुपए की मासिक किस्त पर खरीदा जाए तो कितनी किश्तें बनेंगी। सवाल के हिसाब से कोई सटीक उत्तर निकल ही नहीं रहा था।

इसी तरह क्रमवार संख्या लिखने वाले सवाल में दिए गए विकल्प भी भोपाल स्तर से ही गलत थे।

इतना ही नहीं, पुलिस सेवा का नंबर 100 दिया गया, जबकि सही नंबर 112 है।

ऐसे में यह साफ हो गया कि विभागीय स्तर पर प्रश्नपत्र तैयार करने और जांचने में भारी लापरवाही बरती गई।

शिक्षक भी उलझे, गलतियों पर दिए सही नंबर

परीक्षा के दौरान जब प्रतिभागियों ने सवाल हल करने शुरू किए तो कई जगह शिक्षक खुद ही जवाबों में उलझ गए। गणित के सवालों में सही विकल्प न होने पर कई शिक्षक धड़ल्ले से गलत जवाबों पर भी ✔ (सही) का निशान लगाते नजर आए। ( Ulhas Navbharat Saksharta )

शाम को जब कॉपियां जांचने का काम शुरू हुआ, तब शिक्षकों को इन गड़बड़ियों का एहसास और भी ज्यादा हुआ। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि प्रश्नपत्रों की पहले ही वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जांच कर ली जाती, तो ऐसी शर्मनाक स्थिति पैदा नहीं होती।

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हजारों परीक्षार्थियों का भविष्य दांव पर

खंडवा जिले के आदिवासी बहुल विकासखंड खालवा में इस परीक्षा का बड़ा लक्ष्य रखा गया था।

कुल 27,058 पंजीकृत असाक्षरों में से 16,172 को परीक्षा में शामिल करने का लक्ष्य था।

इसके लिए जिले में 211 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे।

महिलाओं, पुरुषों और युवाओं ने बड़ी संख्या में परीक्षा में हिस्सा लिया।

लेकिन सवालों में हुई इन गलतियों ने न सिर्फ परीक्षा की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए, बल्कि प्रतिभागियों के मनोबल को भी प्रभावित किया।

विभागीय कार्यशैली पर सवाल

यह कोई साधारण परीक्षा नहीं थी, बल्कि असाक्षरों को पढ़ाई की ओर प्रोत्साहित करने वाला बड़ा अभियान था। ऐसे में जब प्रश्नपत्र ही गलतियां से भरे होंगे, तो प्रतिभागियों का भरोसा कैसे कायम रहेगा?

स्थानीय जानकारों का कहना है कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि साक्षरता अभियान के प्रति उदासीन रवैया है। परीक्षा का उद्देश्य असाक्षरों को आत्मविश्वास देना था, लेकिन इस तरह की गलतियों ने उल्टा उन्हें और हताश कर दिया। ( Ulhas Navbharat Saksharta )

अधिकारियों ने क्या कहा?

जब यह मामला अधिकारियों के संज्ञान में आया, तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा:

पी. एस. सोलंकी, जिला परियोजना समन्वयक एवं सचिव, जिला साक्षरता मिशन प्राधिकरण खंडवा ने बताया—
“प्रश्नपत्र भोपाल स्तर से उपलब्ध कराए गए थे। अगर प्रश्नों में कोई त्रुटि है तो इसे भोपाल के वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में लाया जाएगा।” ( Ulhas Navbharat Saksharta )

प्रदेशभर में असाक्षरों को साक्षर बनाने की इस परीक्षा का उद्देश्य भले ही अच्छा था, लेकिन प्रश्नपत्र में की गई गलतियों ने पूरे प्रयास की साख को धूमिल कर दिया। हजारों परीक्षार्थियों और शिक्षकों को परेशानी झेलनी पड़ी। यह घटना साफ करती है कि साक्षरता मिशन जैसे बड़े कार्यक्रमों की सफलता सिर्फ घोषणाओं से नहीं, बल्कि पारदर्शी तैयारी और जिम्मेदारी से सुनिश्चित की जा सकती है। ( Ulhas Navbharat Saksharta )

लोगों का कहना है कि सरकार और शिक्षा विभाग को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए और आगे ऐसी गलतियां न हों, इसके लिए सख्त कदम उठाने चाहिए। आखिरकार, यह परीक्षा सिर्फ एक औपचारिकता नहीं बल्कि असाक्षरों के जीवन में नई रोशनी लाने का माध्यम है। ( Ulhas Navbharat Saksharta )

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