कोंडागांव पुलिस ने गांजा तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए मध्यप्रदेश के दो युवकों को गिरफ्तार किया है। ये दोनों तस्कर दिखावे में चटाई बेचने का काम करते थे, लेकिन असल में वे चटाई के नीचे गांजा छिपाकर उसका परिवहन किया करते थे। पुलिस ने इनके कब्जे से 39 किलो से ज्यादा गांजा, दो मोटरसाइकिल और अन्य सामान जब्त किया है।
मामला कैसे खुला?
8 अगस्त 2025 को बांसकोट चौकी पुलिस टीम इलाके में गश्त कर रही थी। उसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि उड़िसा से आने वाले रास्ते पर दो युवक मोटरसाइकिल से गांजा ले जा रहे हैं। इस सूचना पर चौकी प्रभारी नरेश साहू के नेतृत्व में पुलिस टीम ने संदिग्ध वाहनों की जांच शुरू की।
पुलिस ने जैसे ही Hero HF Deluxe (MP 43 EG 1017) और Honda Shine (MP 13 ZS 2830) बाइक को रोका, दोनों चालकों से पूछताछ की गई। जब गाड़ियों में बंधे बोरे और चटाई की तलाशी ली गई, तो उनमें से भारी मात्रा में गांजा बरामद हुआ।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
पुलिस पूछताछ में दोनों आरोपियों ने अपना नाम और पता बताया।
विक्रम बंजारा, पिता बहादुर बंजारा, उम्र 23 साल, निवासी नागजरी, थाना उनेल, जिला उज्जैन (मध्यप्रदेश)
सुरेश बंजारा, पिता बाबूलाल बंजारा, उम्र 23 साल, निवासी नागजरी, थाना उनेल, जिला उज्जैन (मध्यप्रदेश)
दोनों आरोपी लंबे समय से गांजा तस्करी कर रहे थे और पकड़ से बचने के लिए वे खुद को चटाई बेचने वाला बताते थे।
पुलिस ने जब्त किया सामान
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों से कुल 39.450 किलो गांजा बरामद किया, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 3.98 लाख रुपए बताई जा रही है। इसके अलावा पुलिस ने उनसे—
दो मोटरसाइकिल (कीमत करीब 90,000 रुपए)
दो मोबाइल फोन (कीमत 11,000 रुपए)
06 नग चटाई (कीमत 1,000 रुपए)
नगद राशि 2,262 रुपए
5.11 लाख का माल जब्त किया।
पुलिस की रणनीति और कार्रवाई
कोंडागांव के पुलिस अधीक्षक वाय. अक्षय कुमार ने जिले के सभी थाना और चौकी प्रभारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि नशे का कारोबार करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। इसी कड़ी में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कौशलेंद्र देव पटेल और एसडीओपी केशकाल अरुण नेताम के मार्गदर्शन में टीम बनाई गई थी।
इस टीम ने बांसकोट और आसपास के इलाकों में लगातार निगरानी रखी। जब सूचना मिली तो त्वरित कार्रवाई कर गांजा तस्करों को रंगे हाथ पकड़ लिया गया।
NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज
दोनों आरोपियों पर एनडीपीएस एक्ट की धारा 20 (बी) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। पुलिस का कहना है कि सीमावर्ती उड़िसा क्षेत्र से आने वाले तस्करों पर आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
कौन-कौन से पुलिसकर्मी थे शामिल?
इस ऑपरेशन में चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक नरेश साहू, सहायक उपनिरीक्षक दिनेश पटेल, प्रधान आरक्षक रामनारायण जगत, आरक्षक रमेश नाग, सोमेश कश्यप, मनोज शांडिल्य, चंद्रप्रभाष नेताम, और एमटी संजय पांडे शामिल रहे।
गांजा तस्करी का नेटवर्क
पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि यह नेटवर्क मध्यप्रदेश से लेकर उड़िसा और छत्तीसगढ़ तक फैला हुआ है। चटाई, सब्जी या अन्य सामान की आड़ में तस्कर गांजा की खेप इधर-उधर भेजते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के कच्चे रास्तों का इस्तेमाल वे इसलिए करते हैं ताकि पुलिस की चेकिंग से बच सकें।
पुलिस की बड़ी चुनौती
छत्तीसगढ़ और उड़िसा की सीमाओं पर अक्सर ऐसे मामले सामने आते रहते हैं। गांजा तस्कर छोटे-छोटे गांवों से होकर निकलने वाले कच्चे रास्तों का फायदा उठाते हैं। पुलिस के लिए इन्हें पकड़ना आसान नहीं होता, लेकिन इस बार मुखबिर की सटीक जानकारी से सफलता मिली।
क्या कहती है पुलिस?
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने साफ किया कि जिले में अवैध नशे का कारोबार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सीमावर्ती क्षेत्रों में चेकिंग और गश्त को और कड़ा किया जाएगा ताकि ऐसे नेटवर्क को जड़ से खत्म किया जा सके।