डिकेश शर्मा कांकेर। छत्तीसगढ़ का कांकेर जिला एक बार फिर नक्सली हिंसा की वजह से सुर्खियों में है। बीते दिनों जिले के नक्सल प्रभावित बिनागुंडा गांव में माओवादियों ने कथित जन अदालत लगाकर आदिवासी ग्रामीण मनेश नुरेटी की बेरहमी से हत्या कर दी। नक्सलियों ने उस पर पुलिस का मुखबिर होने का आरोप लगाया।
(In Binagunda village of Kanker district of Chhattisgarh, Maoists held a Jan Adalat and killed a tribal youth, Manish Nureti. The allegation is that he was a police informer. Whereas in the video, the youth was seen hoisting the tricolour at the Naxal memorial along with the children. The villagers believe that the Naxals got angry due to the celebration of Independence Day and committed the crime.)
माओवादियों ने हत्या के बाद मौके पर बैनर और पोस्टर छोड़े, जिसमें साफ तौर पर लिखा गया कि मनेश पुलिस के लिए गोपनीय सैनिक का काम करता था। हालांकि गांव के लोगों और पुलिस की जांच में एक अलग ही पहलू सामने आया है।
स्वतंत्रता दिवस का जश्न बना विवाद का कारण?
पुलिस अधीक्षक आई के एलिसेला ने बताया कि हत्या से पहले का एक वीडियो सामने आया है। इसमें मृतक मनेश नुरेटी 15 अगस्त के दिन गांव के बच्चों और ग्रामीणों के साथ स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि वह बच्चों को लेकर नक्सलियों द्वारा बनाए गए स्मारक पर पहुंचता है और वहां पर तिरंगा झंडा फहराकर भारत माता की जय के नारे लगाता है।
पुलिस का मानना है कि संभव है, इसी वजह से नक्सली उससे नाराज हो गए हों। जांच में यह भी पाया गया है कि मनेश गांव के विकास कार्यों को लेकर अक्सर चर्चा करता था और ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य योजनाओं से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करता था।
ग्रामीणों की राय – नाराजगी की वजह झंडा फहराना
गांव के लोगों का कहना है कि मनेश का कसूर बस इतना था कि उसने बच्चों के साथ मिलकर आज़ादी का पर्व मनाया और नक्सलियों के स्मारक पर तिरंगा फहराया। ग्रामीणों को शक है कि इसी घटना से गुस्साए माओवादी उसे खत्म करना चाहते थे।
गांव में चर्चा है कि मनेश की देशभक्ति और विकास की सोच नक्सलियों को रास नहीं आई। स्वतंत्रता दिवस का वीडियो जब इलाके में वायरल हुआ तो शायद नक्सलियों की नजर भी उस पर गई और उन्होंने साजिश रचकर उसे मौत के घाट उतार दिया।
पुलिस कर रही जांच
कांकेर एसपी ने कहा है कि पूरे मामले की जांच जारी है। उन्होंने स्वीकार किया कि नक्सलियों का लगाया गया आरोप अभी तक पुख्ता नहीं है। पुलिस का कहना है कि किसी भी ग्रामीण को विकास की राह में आगे बढ़ने से रोकना नक्सलियों की पुरानी रणनीति रही है।
एसपी ने लोगों से अपील की है कि वे नक्सलियों के डर से झुकें नहीं और प्रशासन पर भरोसा रखें। वहीं, घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है और लोग अब खुले तौर पर जश्न मनाने से हिचकिचा रहे हैं।