भोपाल। लोकायुक्त पुलिस ने सोमवार को राजधानी भोपाल में एक बड़ी ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया। यह कार्रवाई पुलिस महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख के सख्त निर्देश पर की गई। लोकायुक्त जबलपुर इकाई की टीम ने अनुसूचित जाति विकास विभाग में पदस्थ सहायक ग्रेड-1 जीवन लाल बरार (61 वर्ष) को उनके घर से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
कैसे हुई कार्रवाई?
लोकायुक्त को शिकायत उषा दाभीरकर (60 वर्ष), निवासी छिंदवाड़ा ने दी थी। वह वाणिज्य कर कार्यालय छिंदवाड़ा में सहायक ग्रेड-2 के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकायुक्त को बताया कि उनके जाति प्रमाण पत्र की जांच भोपाल स्थित राजीव गांधी भवन, अनुसूचित जाति विकास विभाग में चल रही थी।
आरोप है कि आरोपी जीवन लाल बरार ने जांच रिपोर्ट को दबाए रखने के एवज में उनसे 5 लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी। जब पीड़िता ने पूरी राशि देने में असमर्थता जताई तो आरोपी ने पहली किस्त के तौर पर 1 लाख रुपए की मांग की।
घटनास्थल से दबोचा गया अधिकारी
18 अगस्त 2025 को लोकायुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया। आरोपी जैसे ही अपने घर मकान नंबर G-21, पंचशील नगर (प्रशासनिक अकादमी के सामने, भोपाल) पर रिश्वत की रकम लेने पहुँचा, टीम ने घेराबंदी कर उसे रंगे हाथ दबोच लिया। मौके से पूरी रिश्वत राशि बरामद की गई और आरोपी को औपचारिक तौर पर गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई।
किन धाराओं में हुई कार्रवाई?
लोकायुक्त पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन 2018) की धारा 7, 13(1)(B), 13(2) के तहत मामला दर्ज किया है। इन धाराओं के तहत दोषी पाए जाने पर कड़ी सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
कौन थे ट्रैप दल में शामिल?
लोकायुक्त जबलपुर इकाई की इस सफल कार्रवाई में उप पुलिस अधीक्षक श्रीमती नीतू त्रिपाठी दल प्रभारी रहीं। उनके साथ निरीक्षक रेखा प्रजापति, निरीक्षक उमा कुशवाहा और निरीक्षक जितेंद्र यादव सहित लोकायुक्त की पूरी टीम मौजूद रही।
लोकायुक्त की सख्त नजर
पुलिस महानिदेशक लोकायुक्त योगेश देशमुख लगातार भ्रष्टाचार के मामलों पर सख्त रुख अपना रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि किसी भी स्तर पर रिश्वतखोरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।