प्रदीप कुमार दुर्ग, छत्तीसगढ़। दुर्ग जिले के जामुल नगर में इस बार धर्म और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। 28 दिसंबर 2025 से 06 जनवरी 2026 तक शिवपुरी स्टेडियम में “सनातन उत्सव” नाम से एक भव्य श्रीराम कथा महोत्सव का आयोजन होने जा रहा है। यह आयोजन न केवल रामकथा के माध्यम से भक्ति का संदेश देगा, बल्कि इसमें कई पंथों और संप्रदायों के प्रमुख संतों की उपस्थिति भी इस कार्यक्रम को और विशेष बनाएगी।
इस महोत्सव की सबसे खास बात यह है कि यह धार्मिक एकता और समरसता का सजीव उदाहरण बनेगा। इस आयोजन के जरिए अलग-अलग पंथों के संत एक ही मंच पर एकत्र होंगे, जिससे न केवल श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक लाभ मिलेगा, बल्कि सांस्कृतिक समन्वय और धार्मिक सौहार्द को भी बढ़ावा मिलेगा।
कबीर पंथ और रामानुज संप्रदाय का मिलन
इस आयोजन में विशेष आकर्षण होंगे — कबीर पंथ के नवोदित वंशाचार्य पंथ श्री उदितमुनि नाम साहेब जी, जिन्हें खासतौर पर आमंत्रित किया गया है। यह आमंत्रण श्रीधाममठाधीश्वर, जगद्गुरु रामानुजाचार्य डॉ. स्वामी श्री राघवाचार्य जी महाराज की ओर से दिया गया है, जो अयोध्या धाम स्थित श्रीरामलला जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र से जुड़े हुए हैं।
स्वामी राघवाचार्य जी महाराज ने स्वयं उदितमुनि नाम साहेब जी से इस महोत्सव में भाग लेने का आग्रह किया, जिसे उदितमुनि नाम साहेब जी ने सहर्ष स्वीकार कर लिया है। यह घटना दर्शाती है कि अब कबीर पंथ और रामानुज संप्रदाय के बीच एक नया संवाद और सहयोग शुरू हो रहा है, जो आने वाले समय में समाज के लिए सकारात्मक दिशा में एक बड़ा संदेश देगा।
भव्य आयोजन की तैयारी जोरों पर
श्रीराम कथा महोत्सव की तैयारी पूरे जोर-शोर से चल रही है। आयोजकों के मुताबिक, यह कार्यक्रम हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में संपन्न होगा। इस अवसर पर स्वामी श्री राघवाचार्य जी महाराज अपनी अमृतवाणी से श्रीराम कथा का वाचन करेंगे। उनके वचनों में श्रद्धा और ज्ञान का ऐसा संगम होता है, जो सीधे हृदय को स्पर्श करता है।
वहीं पंथ श्री उदितमुनि नाम साहेब जी की गरिमामयी उपस्थिति भी श्रद्धालुओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी। यह आयोजन धार्मिक ही नहीं बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे अलग-अलग पंथों और विचारधाराओं के बीच भाईचारा, संवाद और सहिष्णुता को मजबूती मिलती है।
धार्मिक सद्भाव की मिसाल बनेगा “सनातन उत्सव”
आज के समय में जब समाज में वैचारिक और धार्मिक मतभेद कई बार टकराव का कारण बनते हैं, ऐसे में इस तरह के आयोजन हमें यह याद दिलाते हैं कि भारत की सनातन संस्कृति का मूल ही समरसता और एकता में निहित है। “सनातन उत्सव” केवल एक श्रीराम कथा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह उन मूल्यों का प्रचार करेगा जिन पर भारतीय संस्कृति टिकी हुई है।
इस आयोजन से यह उम्मीद की जा रही है कि यह समाज में एक नई ऊर्जा और धार्मिक चेतना का संचार करेगा। सभी धर्मों और पंथों को साथ लेकर चलने की भावना, आज की सबसे बड़ी जरूरत बन चुकी है और यह महोत्सव उसी दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।