रायगढ़।
एनटीपीसी लारा से निकलने वाली फ्लाई ऐश की अवैध डंपिंग का मामला अब गंभीर होता जा रहा है। पर्यावरण विभाग ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। विभाग की टीम ने मौके पर छापा मारकर 6 ट्रकों को फ्लाई ऐश गैरकानूनी तरीके से खाली करते हुए पकड़ लिया। इस पर कार्रवाई करते हुए संबंधित वाहनों पर कुल ₹4 लाख 5 हजार का जुर्माना ठोका गया है। साथ ही, सभी ट्रकों को तुरंत एनटीपीसी लारा प्लांट में वापस भेजने का आदेश भी दिया गया है।
इस कार्रवाई के बाद एनटीपीसी लारा ने भी तत्काल कदम उठाते हुए, फ्लाई ऐश के ट्रांसपोर्टेशन का काम देख रही कंपनी रेफेक्स के “लो लाइन” कार्य को अगले आदेश तक रोक दिया है।
रेफेक्स के सीनियर मैनेजर की भूमिका पर सवाल
एनटीपीसी लारा में फ्लाई ऐश ट्रांसपोर्टिंग का ठेका रेफेक्स नामक कंपनी के पास है। इस कंपनी ने अलग-अलग ट्रांसपोर्टरों को काम बांट रखा है। लेकिन अब यह सामने आ रहा है कि कुछ वेंडर्स द्वारा ट्रकों में ब्लैकबग जीपीएस जैमर की सेटिंग के नाम पर गड़बड़ी की जा रही है। सूत्रों की मानें तो हर ट्रक मालिक से 15 से 17 हजार रुपये वसूले जा रहे हैं, जिससे मालभाड़ा हेरफेर का खेल चल रहा है।
इस पूरे घोटाले में रेफेक्स के सीनियर मैनेजर सच्चिनाथ (लारा) की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि वह कुछ पसंदीदा ट्रांसपोर्टरों के साथ मिलकर इस गोरखधंधे को अंजाम दे रहे थे। इतना ही नहीं, अनधिकृत रूप से डंप की गई फ्लाई ऐश की रिसीविंग व अनलोडिंग की प्रक्रिया भी इन्हीं के निर्देश पर पूरी की जाती थी, जिससे उन्हें हर महीने मोटी कमाई होती थी।
अब बड़ा सवाल ये उठ रहा है कि क्या रेफेक्स कंपनी खुद अपने सीनियर मैनेजर की जांच करवाकर उस पर कार्रवाई करेगी?
सीनियर मैनेजर के खिलाफ उठे ये सवाल
1 “अवैध डंपिंग की शिकायतें बार-बार मिलने के बाद भी सीनियर मैनेजर ने अपने ऊपर के अधिकारियों को सूचना देना जरूरी क्यों नहीं समझा?”
- यदि उन्हें पता था कि एनटीपीसी रेफेक्स को ब्लैकलिस्ट कर सकती है, तो वह अब तक चुप क्यों थे?
- जिन गाड़ियों से अवैध डंपिंग हो रही थी, उन्हें चालान की रसीद कैसे मिल रही थी?
- जिन वाहनों को एनटीपीसी ब्लैकलिस्ट कर चुकी थी, उन्हीं गाड़ियों को दोबारा लोडिंग क्यों दी जा रही थी?
रायगढ़ को भुगतना पड़ रहा नुकसान
एनटीपीसी से निकलने वाली फ्लाई ऐश पूरी तरह से गीली होती है, जिससे हर ट्रक में करीब 50 टन राख लोड होती है। यह राख सड़क निर्माण में इस्तेमाल होनी चाहिए, लेकिन इसके बजाय रायगढ़ जिले के विभिन्न इलाकों में अवैध तरीके से डंप की जा रही है। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि स्थानीय लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थिति यह है कि एनटीपीसी उन ट्रांसपोर्ट कंपनियों को भी पेमेंट कर रही है, जो वास्तव में डिलीवरी कर ही नहीं रही हैं। कई बार तो बिना GPS के ही डंपिंग की रिसीविंग पावती बना दी जाती है। स्थानीय ट्रांसपोर्टरों की मिलीभगत से यह गड़बड़ी लगातार जारी है।
आगे क्या?
पर्यावरण विभाग की इस कार्रवाई से अब यह साफ हो गया है कि फ्लाई ऐश ट्रांसपोर्टिंग में बड़े स्तर पर अनियमितता हो रही है। यदि रेफेक्स कंपनी समय रहते अपने सीनियर मैनेजर की भूमिका की निष्पक्ष जांच नहीं कराती, तो आने वाले समय में एनटीपीसी लारा से उसका टेंडर रद्द होना तय माना जा रहा है।
निष्कर्ष
“इस पूरे मामले से साफ झलकता है कि गड़बड़ी सिर्फ ट्रांसपोर्टरों या ड्राइवरों तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसके पीछे कंपनी के कुछ बड़े अधिकारियों की मिलीभगत भी थी। अब सवाल ये है कि क्या प्रशासन और एनटीपीसी इस गड़बड़ी पर सख्त एक्शन लेंगे या फिर मामला यूं ही दबा दिया जाएगा?”