महाराष्ट्र से शुरू होकर अब छत्तीसगढ़ की महिलाएं लिख रही हैं पर्यावरण संरक्षण की नई कहानी
कांकेर, छत्तीसगढ़।
हरियाली, आजीविका और महिला सशक्तिकरण – इन तीनों को एक साथ साधने का काम कर रही है चैतन्य संस्था की हरित भारत परियोजना, जो आज छत्तीसगढ़ के कांकेर, चारामा और नरहरपुर के 25 से ज्यादा गांवों में बदलाव की कहानी लिख रही है। महाराष्ट्र से शुरू हुई ये संस्था अब छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिलाओं को पर्यावरण के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी मजबूत बना रही है।
परियोजना की शुरुआत और उद्देश्य
2017 में संस्था ने छत्तीसगढ़ में जेंडर समानता कार्यक्रम से अपने कार्य की शुरुआत की थी। घरेलू हिंसा से लड़ने के लिए 15 संगिनी परामर्श केंद्र स्थापित किए गए, जिनका संचालन गांव की महिलाएं खुद कर रही हैं। आज यही महिलाएं ‘हरित भारत परियोजना’ के तहत पर्यावरण संरक्षण और आजीविका संवर्धन में भी अहम भूमिका निभा रही हैं। इस कार्य को राज्य प्रमुख सुधा कोठारी के मार्गदर्शन और जिला समन्वयक दुर्गा प्रसाद साहू, स्वार फेलो प्रियांशु शर्मा, एसोसिएट भागवत पोटाई सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं की मदद से अंजाम दिया जा रहा है।
मछली पालन और जलसंरचना – आत्मनिर्भरता की ओर कदम
परियोजना के तहत कांकेर के कोकपुर और चारामा के चुचरुंगपुर गांव में तीन तालाब बनाए गए हैं। यहां 300 से अधिक देव बाड़ी महिला समूहों ने मत्स्य पालन शुरू किया है, जिससे उन्हें वैकल्पिक आय का साधन मिला है।
आजीविका संवर्धन – नर्सरी, खाद और बीज बैंक
नर्सरी: कांकेर, नरहरपुर और चारामा ब्लॉक में 5 नर्सरी लगाई गईं, जहां 7000 से ज्यादा औषधीय और फलदार पौधे (सहजन, आँवला, काजू, नींबू आदि) तैयार किए गए।
वर्मी कंपोस्ट: 50 महिलाओं की भागीदारी से 5 इकाइयों में 30 क्विंटल जैविक खाद बनाई गई।
बीज बैंक: स्थानीय सब्जियों, फलों और वानिकी बीजों के संरक्षण के लिए बीज बैंक बनाया गया, जिससे आदान-प्रदान और वितरण की सुविधा मिली।
पोषण वाटिका (किचन गार्डन): 30 परिवारों ने अपने घरों में सब्जियों की खेती शुरू की जिससे पोषण के साथ-साथ आमदनी भी बढ़ रही है।
पौधरोपण अभियान – हरियाली से खुशहाली
परियोजना के तहत चारामा के चुचरुंगपुर गांव की 70 महिलाओं को 5000 सर्पगंधा और 5000 शतावरी के पौधे वितरित किए गए। राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान रायपुर का इसमें विशेष सहयोग रहा।
इसके अतिरिक्त कांकेर, चारामा और नरहरपुर विकासखंड के 25 गांवों की लगभग 2500 महिलाओं को काजू, आम, अमरूद, सहजन, नींबू, हर्रा और बेहड़ा जैसे औषधीय एवं फलदार पौधों का वितरण किया गया। तालाबों के समीप निवास करने वाली महिलाओं को विशेष रूप से 20-20 पौधे दिए गए, जिससे जल स्रोतों के चारों ओर हरियाली बनी रहे और पर्यावरण संतुलन भी बना रहे।
तिथिवार झलक – गांव-गांव पहुंचा हरियाली का संदेश
7 जुलाई: मयाना गांव में पौधरोपण, स्कूल प्राचार्य और ईको क्लब की भागीदारी।
8 जुलाई: चुचरुंगपुर, आवरी, साल्हेटोला समेत कई गांवों में पौधे वितरण।
10 जुलाई: बिरनपुर से डुमरपानी तक पौधारोपण अभियान जारी।
12 जुलाई: नाथियानवागांव, माकड़ी, सिंगराय और पांडरवाही में भी वितरण।
14 जुलाई: कोकपुर में सरपंच, उपसरपंच और स्कूल के बच्चों के साथ पौधारोपण।
असर और परिणाम – महिलाएं बनीं हरियाली की नायिका
चैतन्य संस्था की यह परियोजना ग्रामीण महिलाओं को सिर्फ पौधे नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और सम्मान की ओर बढ़ने का रास्ता दे रही है। बीज बैंक, मत्स्य पालन, जैविक खाद निर्माण और पोषण वाटिकाएं – ये सभी गतिविधियां पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आजीविका को भी नया आधार दे रही हैं।
गांव की महिलाएं अब सिर्फ घर संभालने वाली नहीं, बल्कि अपने गांव को हरा-भरा और समृद्ध बनाने वाली पर्यावरण प्रहरी बन चुकी हैं।