मिट्टी की जांच से मिलेगी बेहतर पैदावार की राह
12 पैरामीटर के आधार पर जारी किया जा रहा कार्ड
कांकेर।
किसानों की मेहनत तभी रंग लाती है जब खेत की मिट्टी उपजाऊ हो और उसमें पौधों को बढ़ने के लिए जरूरी पोषक तत्व मौजूद हों। यही वजह है कि अब कांकेर जिले में किसानों को उनकी जमीन की मिट्टी के स्वास्थ्य की पूरी जानकारी दी जा रही है – वो भी मृदा स्वास्थ्य कार्ड के जरिए।
कृषि विभाग द्वारा जिले के अलग-अलग विकासखंडों में “स्वायल हेल्थ एंड फर्टिलिटी योजना” के तहत किसानों के खेतों से मिट्टी के नमूने लिए जा रहे हैं। इन नमूनों की जांच के बाद हर किसान को उसकी जमीन के अनुसार रंगीन मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) दिया जा रहा है। इससे उन्हें यह जानने में मदद मिल रही है कि कौन-सी फसल उनके खेत के लिए उपयुक्त है और किस उर्वरक का कितना इस्तेमाल करना चाहिए।
मिट्टी में क्या होता है खास?
फसल उत्पादन के लिए लगभग 17 प्रकार के पोषक तत्व बेहद जरूरी माने जाते हैं। इनमें से तीन – नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश को मुख्य पोषक तत्व कहा जाता है, जो फसल की अच्छी बढ़वार के लिए बड़ी मात्रा में चाहिए होते हैं।
इसके अलावा कैल्शियम, सल्फर और मैग्नीशियम जैसे तत्व भी मध्यम मात्रा में जरूरी होते हैं। वहीं कुछ सूक्ष्म तत्व जैसे जिंक, आयरन, मैगनीज, कॉपर, बोरॉन, मॉलिब्डेनम, क्लोरीन और निकिल भी पौधों के लिए आवश्यक हैं – भले ही उनकी मात्रा कम हो।
क्या है मृदा स्वास्थ्य कार्ड में?
मृदा स्वास्थ्य कार्ड में कुल 12 मापदंड (पैरामीटर) के आधार पर मिट्टी की गुणवत्ता का पूरा विवरण दिया जाता है। इसमें pH वैल्यू, इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी (EC), ऑर्गेनिक कार्बन (OC), नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), पोटाश (K), सल्फर (S), बोरॉन (B), जिंक (Zn), आयरन (Fe), मैगनीज (Mn), और कॉपर (Cu) जैसे तत्व शामिल हैं।
मिट्टी की सेहत से तय होगी फसल की किस्म
अगर मिट्टी में किसी पोषक तत्व की कमी या अधिकता होती है, तो उसी के अनुसार उर्वरकों और जैविक खादों की संतुलित मात्रा देने की सलाह दी जाती है। इससे किसान ना सिर्फ फसल की उपज बढ़ा सकते हैं, बल्कि अपनी जमीन की उर्वरता को भी लंबे समय तक बनाए रख सकते हैं।
स्थानीय भाषा में कार्ड और समझाइश भी
कृषि विभाग द्वारा मृदा स्वास्थ्य कार्ड हिंदी भाषा में, रंगीन प्रिंट में किसानों को दिए जा रहे हैं, ताकि उन्हें कार्ड में दी गई जानकारी आसानी से समझ आ सके। इसके अलावा फसल प्रदर्शन, जागरूकता अभियान और प्रशिक्षण के माध्यम से भी किसानों को मिट्टी की जांच और संतुलित खाद उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
मैदानी कृषि अमला जब कार्ड वितरण करता है, तब मौके पर ही किसान को यह भी समझाता है कि उसे अपने खेत में किस फसल के लिए कौन-सा उर्वरक और कितना देना है।
फायदे में किसान – उपज में वृद्धि और लागत में कटौती
मिट्टी की जांच कर मृदा स्वास्थ्य कार्ड के अनुसार खेती करने से किसान अब उर्वरकों की बेकार की खपत से बच रहे हैं। इससे उनकी उत्पादन लागत घट रही है, और उपज में बढ़ोत्तरी भी देखी जा रही है। खास बात यह है कि खेत की उर्वरता भी लंबे समय तक बनी रहती है।
कृषि विभाग की यह पहल निश्चित ही किसानों को वैज्ञानिक और स्मार्ट खेती की ओर ले जा रही है, जिससे उन्हें अधिक लाभ और पर्यावरण को संतुलन मिलने की उम्मीद है।