डिकेशवर शर्मा दुर्गुकोंदल (कांकेर)। सरकारी कामकाज में लापरवाही और भ्रष्टाचार की एक और बानगी दुर्गुकोंदल में सामने आई है, जहां शासकीय लाइब्रेरी भवन की मरम्मत को लेकर ठेकेदार और सब इंजीनियर के बीच खुलेआम बहस और गाली-गलौज हुई। दोनों के बीच पैसे के लेन-देन को लेकर हुए इस झगड़े का वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसने अफसरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला मावा मोदोल स्थित शासकीय लाइब्रेरी भवन की मरम्मत से जुड़ा है, जहां निर्माण कार्य में अनियमितता की शिकायतें पहले से ही सामने आ रही थीं। बताया जा रहा है कि ठेकेदार को भुगतान में धांधली को लेकर सब इंजीनियर से तीखी बहस हुई, जो बाद में पंचायत प्रतिनिधियों के सामने तू-तू मैं-मैं और गाली-गलौज तक पहुंच गई।
झगड़े का वीडियो हुआ वायरल, इंजीनियर को लौटाए पैसे
इस पूरे विवाद का वीडियो किसी ने मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया, जिसमें साफ देखा जा सकता है कि सब इंजीनियर ठेकेदार को पैसे लौटा रहा है। वीडियो सामने आते ही हड़कंप मच गया और यह तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि सरकारी कामों में अक्सर इस तरह की लेन-देन की बातें सामने आती हैं, लेकिन कार्रवाई कभी नहीं होती। इस बार वीडियो के वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की गई।
सब इंजीनियर बुधपाल वासनिक निलंबित
वीडियो वायरल होने के बाद जिला पंचायत सीईओ हरेश मंडावी ने सब इंजीनियर बुधपाल वासनिक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। प्राथमिक जांच में इंजीनियर की भूमिका संदिग्ध पाई गई, जिसके चलते यह सख्त कदम उठाया गया।
प्रशासन की ओर से यह भी संकेत दिए गए हैं कि यदि मामले में ठेकेदार की भी संलिप्तता पाई गई, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। मामले की जांच फिलहाल जिला पंचायत स्तर पर जारी है।
पंचायत प्रतिनिधियों के सामने बिगड़ा मामला
विवाद के वक्त पंचायत के जनप्रतिनिधि भी मौके पर मौजूद थे। उन्होंने इंजीनियर और ठेकेदार के बीच हो रही बहस को शांत कराने की कोशिश की, लेकिन बात इतनी बढ़ गई कि मामला गाली-गलौज से होते हुए हाथापाई तक पहुंच गया। स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी, लेकिन वहां मौजूद समझदार ग्रामीणों ने बीच-बचाव कर किसी बड़ी अनहोनी को टाल दिया।
स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल
स्थानीय ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं कि अगर वीडियो सामने नहीं आता तो क्या इस मामले में कोई कार्रवाई होती? लोगों का कहना है कि इस तरह के लेन-देन और कमीशन की संस्कृति ने सरकारी योजनाओं को मज़ाक बना दिया है। जो पैसा आम जनता की भलाई के लिए आता है, वो अफसर और ठेकेदारों की जेब में चला जाता है।
अब आगे क्या होगा?
अब लोगों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन आगे क्या कदम उठाएगा। जनता को उम्मीद है कि सिर्फ सब इंजीनियर को सस्पेंड कर देने से बात खत्म नहीं होगी। पूरे मामले की गहराई से जांच हो और जो भी दोषी हो—चाहे अधिकारी हो या ठेकेदार—उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो, ताकि आगे से कोई भी सरकारी काम में इस तरह की गड़बड़ी करने की हिम्मत ना कर सके।