रामकुमार भारद्वाज, कोंडागांव
छत्तीसगढ़ की माटी, संस्कृति और परंपराओं का प्रतीक हरेली तिहार प्रदेश में बड़े ही उत्साह और श्रद्धा से मनाया जाता है। इसी पावन मौके पर कोंडागांव जिला पंचायत के उपाध्यक्ष हीरासिंह नेताम ने प्रदेशवासियों, क्षेत्रवासियों और खासकर किसान भाइयों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।
उन्होंने कहा कि हरेली सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता जताने का पर्व है। जब खेतों में हरियाली की बहार छा जाती है और किसान भाई अपने खेतों में मेहनत की शुरुआत करते हैं, तब यह त्यौहार नई उम्मीदें और उमंग लेकर आता है।
किसानों का पहला पर्व, प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक
नेताम ने बताया कि छत्तीसगढ़ में खेती-किसानी के काम की शुरुआत के साथ ही गांव-गांव में हरेली पर्व की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस दिन किसान अपने कृषि औजारों को साफ करके उनकी पूजा करते हैं, जिससे खेती में शुभता बनी रहे और फसलें लहलहाएं।
उन्होंने कहा,
“हरेली पर्व हमें प्रकृति के प्रति धन्यवाद व्यक्त करने का मौका देता है। हमें यह कामना करनी चाहिए कि प्रकृति यूं ही हरियाली से सजी रहे और हम सबका जीवन भी खुशहाल रहे।”
परंपरा, पकवान और परिवार का संगम
छत्तीसगढ़ की संस्कृति में पकवानों का खास महत्व है और हरेली तिहार पर इसका रंग और भी गहरा हो जाता है। नेताम ने बताया कि इस दिन गुड़ का चीला, गुलगुला, चावल का फरा जैसे पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं। पूरा परिवार एक साथ बैठकर इन व्यंजनों का आनंद लेता है, जो सामाजिक और पारिवारिक एकता का प्रतीक होता है।
नारियल फेंकना, गेड़ी चढ़ना जैसी परंपराएं बनाती हैं त्योहार को खास
हीरासिंह नेताम ने हरेली पर्व से जुड़ी परंपराओं का जिक्र करते हुए बताया कि इस दिन नारियल फेंकने और गेड़ी चढ़ने जैसी गतिविधियां बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए उत्साह और आनंद का कारण बनती हैं। यह सब छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है, जिसे आज भी गांव-गांव में जीवंत रूप में देखा जा सकता है।
सोशल मीडिया के ज़रिए दी शुभकामनाएं
जिपं उपाध्यक्ष हीरासिंह नेताम ने सोशल मीडिया के माध्यम से भी सभी क्षेत्रवासियों और प्रदेश के लोगों को हरेली पर्व की शुभकामनाएं देते हुए उनके सुखद, समृद्ध और हरियाली से भरपूर जीवन की कामना की है।
उन्होंने यह भी कहा कि
“समाज का असली विकास तभी संभव है जब हम अपनी संस्कृति और परंपराओं को संजोकर रखें। हरेली जैसे पर्व हमें अपनी जड़ों से जोड़ते हैं और सामूहिकता का संदेश देते हैं।”
हरेली पर्व – छत्तीसगढ़ की आत्मा से जुड़ा त्योहार
छत्तीसगढ़ का हरेली पर्व सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि एक एहसास है – प्रकृति से, मिट्टी से, खेतों से और हमारी परंपराओं से जुड़ने का। यह दिन जहां किसानों के लिए नई शुरुआत का प्रतीक है, वहीं आम लोगों के लिए सांस्कृतिक आनंद और परिवारिक मिलन का दिन भी होता है।
निष्कर्ष
हरेली पर्व की ये खुशबू और हरियाली छत्तीसगढ़ की पहचान है। कोंडागांव जिला पंचायत के उपाध्यक्ष हीरासिंह नेताम की बधाई संदेश सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि संस्कृति, परंपरा और प्रकृति के सम्मान का एहसास दिलाता है।इस हरेली तिहार पर हम सभी यह संकल्प लें कि हम अपनी परंपराओं को सहेजेंगे, प्रकृति का सम्मान करेंगे और गांव, खेत और संस्कृति को जोड़ने वाले इन त्योहारों को अगली पीढ़ी तक पहुंचाएंगे।