डिकेश्वर शर्मा, दुर्गुकोंदल Dandakotum movie छत्तीसगढ़ की धरती पर एक बार फिर आदिवासी संस्कृति और परंपराओं की झलक सिनेमा के जरिए सामने आने जा रही है। बस्तर के गहराई वाले जंगलों में फिल्म ‘दण्डाकोटुम’ की शूटिंग शुरू हो गई है। यह फिल्म छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज की जड़ से जुड़ी हुई कहानी को पेश करेगी, जिसमें जंगल, जमीन और संस्कृति के अटूट रिश्ते को बड़े पर्दे पर दिखाया जाएगा।
यह फिल्म ‘जोहार फिल्म प्रोडक्शन’ और ‘कोया फिल्म प्रोडक्शन’ के संयुक्त सहयोग से बनाई जा रही है। इसके निर्माता तिरु रमेशचन्द्र श्याम और निर्देशक तिरु अमलेश नागेश हैं। Dandakotum movie
आदिवासी जीवन और परंपराओं की असली झलक
‘दण्डाकोटुम’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के मूल आदिवासी जीवन की आत्मा को सामने लाने का एक सशक्त प्रयास है। फिल्म में यह दिखाया जाएगा कि हमारे पूर्वज देवी-देवता किस तरह से प्रकृति के हर तत्व — पेड़, नदी, पहाड़ और मिट्टी में बसते हैं। Dandakotum movie
आदिवासी समाज का जीवन जंगल, जमीन और जल के बिना अधूरा है, और फिल्म का मूल संदेश भी यही है कि प्रकृति ही उनका अस्तित्व है। Dandakotum movie
फिल्म के संवाद और दृश्य पूरी तरह स्थानीय बोली-बानी में फिल्माए जा रहे हैं, जिससे यह फिल्म छत्तीसगढ़ के साथ-साथ पूरे देश में आदिवासी जीवन का असली रूप दर्शाएगी। Dandakotum movie
बस्तर के जंगल बने शूटिंग लोकेशन
फिल्म की शूटिंग बस्तर के दूरस्थ वनांचल इलाकों में की जा रही है, जहां प्रकृति अपनी सबसे खूबसूरत और प्राचीन रूप में मौजूद है। घने जंगल, झरने और मिट्टी की खुशबू फिल्म के हर फ्रेम में झलकती है। Dandakotum movie
फिल्म के लिए किसी कृत्रिम सेट का उपयोग नहीं किया गया, बल्कि असली गांव और जंगलों को ही सजीव मंच के रूप में चुना गया है।
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शुभारंभ में जुटा छत्तीसगढ़ का फिल्म जगत
फिल्म ‘दण्डाकोटुम’ के शुभारंभ अवसर पर छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री के कई नामचीन कलाकार और निर्देशक मौजूद रहे। इस मौके पर पद्मश्री तिरु पंडीराम मंडावी, जो कि आदिवासी कला और साहित्य के लिए देशभर में प्रसिद्ध हैं, विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। Dandakotum movie
साथ ही आदिवासी जीवन और आदिवासियत पर गहन जानकारी रखने वाले दादा शेर सिंह आचला ने भी कार्यक्रम में शिरकत की। उनके साथ क्षेत्र के अनेक स्थानीय कलाकार, युवा और ग्रामीण बड़ी संख्या में शामिल हुए। Dandakotum movie
फिल्म का उद्देश्य – “हमारी जड़ें, हमारी पहचान”
निर्देशक अमलेश नागेश का कहना है कि इस फिल्म का मकसद सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक संदेश देना है — कि हमारी जड़ें प्रकृति में हैं। जंगल और जमीन को बचाना, हमारी संस्कृति को बचाना है। Dandakotum movie
उन्होंने कहा, “दण्डाकोटुम” के हर दृश्य में आदिवासी जीवन की आत्मा बसती है। यह फिल्म आने वाली पीढ़ियों को यह याद दिलाएगी कि हमारी परंपराएं सिर्फ लोककथाएं नहीं, बल्कि जीवन की सच्चाई हैं। Dandakotum movie
दर्शकों में उत्साह
फिल्म की घोषणा के बाद से ही स्थानीय लोगों में भारी उत्साह है। कई युवा कलाकारों को इस फिल्म में अभिनय का मौका भी मिला है, जिससे उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। Dandakotum movie
दुर्गुकोंदल सहित आसपास के क्षेत्रों में फिल्म की शूटिंग देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ उमड़ रही है।
छत्तीसगढ़ी सिनेमा को नई पहचान
‘दण्डाकोटुम’ छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है। जिस तरह इस फिल्म में स्थानीय बोली, लोकधुन, रीति-रिवाज और आदिवासी जीवनशैली को दिखाया जा रहा है, वह सिनेमा को एक नई दिशा देगा।
निर्माता रमेशचंद्र श्याम का कहना है कि “हम चाहते हैं कि छत्तीसगढ़ की कहानियां सिर्फ प्रदेश तक सीमित न रहें, बल्कि देश और विदेश तक पहुंचे।” Dandakotum movie
‘दण्डाकोटुम’ सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ की मिट्टी, संस्कृति और विरासत का सजीव चित्रण है। यह फिल्म आने वाले महीनों में रिलीज के लिए तैयार की जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि यह फिल्म न केवल राज्य में, बल्कि पूरे देश में छत्तीसगढ़ी सिनेमा की नई पहचान बनाएगी। Dandakotum movie