डिकेश शर्मा दुर्गकोंदल ब्लॉक के ग्रामीणों को समय पर सही इलाज नहीं मिल पा रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की व्यवस्था दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है। मरीजों को जरूरी इलाज और दवाएं तक नहीं मिल रहीं, जिससे स्थानीय लोग काफी परेशान हैं। इस बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर अब कांग्रेस पार्टी ने मोर्चा खोल दिया है।
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी और जनप्रतिनिधियों ने मिलकर स्वास्थ्य सेवाओं को जल्द दुरुस्त करने की मांग को लेकर एक ज्ञापन सौंपा है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि जल्द सुधार नहीं हुआ, तो वे बड़े स्तर पर धरना-प्रदर्शन और उग्र आंदोलन करेंगे।
मधुमक्खी के काटने से हुई मौत बना वजह
ज्ञापन सौंपने के दौरान कांग्रेस नेताओं ने बताया कि हाल ही में हाहालद्दी गांव में मधुमक्खी के काटने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। यदि समय पर बेहतर इलाज उपलब्ध होता, तो शायद उसकी जान बच सकती थी। इस दुखद घटना ने पूरे ब्लॉक में स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोल दी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पतालों में न तो पर्याप्त स्टाफ है, न ही जरूरी दवाइयां और न ही इमरजेंसी सुविधा। हालत यह है कि प्राथमिक उपचार के लिए भी मरीजों को ब्लॉक मुख्यालय या जिला अस्पताल का रुख करना पड़ता है, जिससे कई बार समय पर इलाज नहीं मिल पाता और जान जोखिम में पड़ जाती है।
कांग्रेस ने दी आंदोलन की चेतावनी
कांग्रेस पार्टी के जनप्रतिनिधियों ने इस स्थिति को गंभीर बताते हुए प्रशासन को अल्टीमेटम दिया है। उनका कहना है कि अगर स्वास्थ्य सेवाओं में जल्द सुधार नहीं लाया गया, तो वे मजबूर होकर जनआंदोलन करेंगे।
ज्ञापन सौंपने वालों में प्रमुख रूप से जनपद अध्यक्ष गोपी बढ़ाई, जनपद उपाध्यक्ष आनंद तेता, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष शॉपसिंह आंचला, रजमन कवाची, नरेंद्र जैन, महेश दुग्गा, सियाराम दरो, उदय पुरामें, करण मांझी, दीनदयाल पटेल, जीवन उईके, सूकचंद प्रजापति, तोरण दुग्गा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और एनएसयूआई के सदस्य उपस्थित थे।
जनता परेशान, सरकार बेपरवाह?
ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की यह स्थिति कोई नई नहीं है, लेकिन जब किसी की जान इस लापरवाही की भेंट चढ़ जाए, तो यह सवाल खड़े करता है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि सरकार और प्रशासन की लापरवाही से ग्रामीणों की जान पर बन आई है।
लोगों का कहना है कि दुर्गकोंदल जैसे आदिवासी बाहुल्य इलाकों में पहले से ही सुविधाएं सीमित हैं। अगर अस्पतालों में डॉक्टर नहीं होंगे, तो इलाज कैसे मिलेगा? मरीजों को साधारण बुखार या चोट के इलाज के लिए भी भटकना पड़ता है।
क्या बोले स्थानीय लोग?
ग्रामीणों ने बताया कि कई बार वे बीमार पड़ने पर अस्पताल जाते हैं, लेकिन वहां डॉक्टर नहीं मिलते। कुछ जगहों पर तो महीने में सिर्फ एक-दो बार ही डॉक्टर आते हैं। दवाओं की भी भारी किल्लत है। कई बार बाहर से दवाएं खरीदनी पड़ती हैं, जो गरीब परिवारों के लिए संभव नहीं होता।
प्रशासन को चेताया
ज्ञापन सौंपते वक्त कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन को सख्त शब्दों में चेतावनी दी कि यदि आने वाले दिनों में स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो जनभावनाओं को देखते हुए उग्र आंदोलन होगा। साथ ही, वे स्वास्थ्य मंत्री और मुख्यमंत्री को भी ज्ञापन भेजने की योजना बना रहे हैं।