बलरामपुर। (Chhattisgarh News) छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस की रजत जयंती धूमधाम से मनाई जा रही है। पूरे प्रदेश में जश्न और उत्सव का माहौल है, लेकिन इसी बीच बलरामपुर जिले के आदिवासी समाज में नाराज़गी का माहौल देखने को मिला। छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष बसंत कुजूर ने जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य के गठन के 25 साल बाद भी आदिवासी समाज अपने मूल अधिकारों से वंचित है।
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बसंत कुजूर ने कहा कि राज्य गठन का असली उद्देश्य था कि आदिवासी समाज को जल, जंगल और जमीन पर उसका हक़ मिले, लेकिन आज भी यह अधिकार केवल कागज़ों तक सीमित हैं। उन्होंने बताया कि बलरामपुर जैसे आदिवासी बहुल जिलों में भी बाहरी लोगों द्वारा जमीन पर कब्ज़ा और अतिक्रमण लगातार बढ़ रहा है, लेकिन प्रशासन इस पर आंख मूंदे बैठा है। (Chhattisgarh News)
प्रशासन पर पक्षपात के आरोप
कुजूर ने जिला प्रशासन और सहायक आयुक्त जनजाति विभाग पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्योत्सव जैसे बड़े कार्यक्रम में भी आदिवासी समाज की अनदेखी की गई। उन्होंने बताया कि बलरामपुर में आयोजित राज्योत्सव कार्यक्रम में आदिवासी समाज के किसी भी प्रतिनिधि को आमंत्रित नहीं किया गया। (Chhattisgarh News)
उनके अनुसार, “आदिवासी संस्कृति को केवल नाच-गाने तक सीमित कर दिया गया है, जबकि हमारी परंपरा, संघर्ष और संस्कृति की गहराई को कोई मंच नहीं मिला।” (Chhattisgarh News)
“मूल अधिकार ही हमारी मांग”
बसंत कुजूर ने स्पष्ट कहा कि आदिवासी समाज सरकार से कोई विशेष सुविधा नहीं मांग रहा, बल्कि केवल अपने मूल अधिकार चाहता है — जैसे आरक्षण, जल-जंगल-जमीन पर अधिकार, स्वास्थ्य और शिक्षा की गारंटी। (Chhattisgarh News)
उन्होंने कहा कि यदि सरकार और प्रशासन केवल महोत्सव मनाने तक सीमित रहेंगे और धरातल पर विकास की दिशा में कदम नहीं बढ़ाएंगे, तो राज्योत्सव का वास्तविक अर्थ ही खत्म हो जाएगा। (Chhattisgarh News)
“सिर्फ उत्सव नहीं, सुधार भी ज़रूरी”
कुजूर ने कहा कि आज भी आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित हैं, स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, और रोजगार के अवसर न के बराबर हैं। उन्होंने कहा कि राज्य स्थापना दिवस केवल उत्सव मनाने का नहीं बल्कि 25 साल के विकास की समीक्षा करने का समय है। (Chhattisgarh News)
उन्होंने यह भी कहा कि अगर सरकार वास्तव में छत्तीसगढ़ के ‘गांव, गरीब और जंगल’ के विकास की बात करती है, तो उसे आदिवासी समाज को निर्णय प्रक्रिया में बराबर की हिस्सेदारी देनी चाहिए। (Chhattisgarh News)
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आंदोलन की चेतावनी
छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष ने जिला प्रशासन के रवैये की कड़ी आलोचना करते हुए चेतावनी दी है कि अगर आदिवासी समाज की अनदेखी जारी रही तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। (Chhattisgarh News)
उन्होंने कहा, “हम शांतिपूर्वक अपने हक़ की बात कर रहे हैं, लेकिन यदि प्रशासन ने हमारी आवाज़ नहीं सुनी तो आंदोलन की राह अपनाई जाएगी। अब आदिवासी समाज चुप नहीं बैठेगा।” (Chhattisgarh News)
राज्य स्थापना के 25 साल पूरे होने पर जहां सरकार प्रदेश की उपलब्धियां गिना रही है, वहीं आदिवासी समाज का यह आरोप प्रदेश के विकास मॉडल पर गंभीर सवाल खड़े करता है। बसंत कुजूर ने कहा कि सरकार को अब केवल उत्सव नहीं बल्कि आदिवासी समाज के जीवन में वास्तविक सुधार लाने की दिशा में काम करना चाहिए, तभी राज्य स्थापना का उद्देश्य पूरा होगा।