हेमराज भारद्वाज फरसगांव, छत्तीसगढ़: अक्सर कहानियों में ही ऐसा होता है, लेकिन इस बार असल ज़िंदगी में एक भाई को उसकी खोई हुई बहन पूरे चार साल बाद वापस मिली है. छत्तीसगढ़ के फरसगांव में पुलिस के “ऑपरेशन तलाश” ने एक बार फिर कमाल कर दिखाया है, और इस सफलता से पूरे इलाके में खुशी की लहर है.
कैसे शुरू हुई ये तलाश?
यह कहानी शुरू होती है 3 सितंबर, 2021 को. फरसगांव थाने में गंगाराम नेताम नाम का एक युवक रिपोर्ट लिखवाने पहुंचा. उसने बताया कि उसकी 20 साल की बहन, कुमारी भागवती नेताम, जनवरी 2020 में बिना बताए घर से कहीं चली गई थी. गंगाराम और उसके परिवार ने उसे आस-पड़ोस और रिश्तेदारों में हर जगह ढूंढा, लेकिन भागवती का कहीं कोई सुराग नहीं मिला. जब कोई चारा नहीं बचा, तो फरसगांव थाने में गुम इंसान की रिपोर्ट (नंबर 21/2021) दर्ज की गई और भागवती की तलाश शुरू हुई.
पुलिस ने नहीं मानी हार
किसी गुमशुदा व्यक्ति को खोजना, खासकर जब इतने साल बीत गए हों, बहुत मुश्किल काम होता है. लेकिन फरसगांव पुलिस ने हार नहीं मानी. पुलिस अधीक्षक वाय. अक्षय कुमार (भा.पु.से) के सख्त निर्देश, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कौशलेन्द्र देव पटेल के मार्गदर्शन और एसडीओपी फरसगांव अभिनव उपाध्याय की देखरेख में थाना प्रभारी संजय सिन्दे ने अपनी टीम के साथ लगातार खोजबीन जारी रखी. यह दिखाता है कि पुलिस कितनी गंभीरता से ऐसे मामलों को लेती है और लोगों को उनके अपनों से मिलाने के लिए कितनी मेहनत करती है.
एक मोबाइल नंबर ने बदल दी किस्मत
कई महीनों और सालों की मेहनत के बाद, हाल ही में पुलिस को एक बड़ी लीड मिली – भागवती का एक मोबाइल नंबर! यह एक ऐसी उम्मीद की किरण थी जिसकी सबको तलाश थी. पुलिस ने तुरंत उस नंबर पर संपर्क किया और भागवती को फरसगांव बस स्टैंड पर बुलाया. जब उससे पूछताछ की गई, तो उसने अपना नाम भागवती नेताम, निवासी पुसापाल बताया, और पुष्टि हुई कि यह वही लड़की है जिसे परिवार पिछले चार सालों से ढूंढ रहा था.
लॉकडाउन ने रोका, काम ने थाम लिया
भागवती ने अपनी कहानी बताते हुए बताया कि 2020 में वह अपनी एक सहेली के साथ राजस्थान के झुंझुनू जिले के बासयाल गांव घूमने गई थी. तभी अचानक कोविड-19 का लॉकडाउन लग गया. यातायात बंद होने और घर वापस न आ पाने के कारण उसे वहीं रुकना पड़ा. उसने बताया कि वह वहीं काम कर रही थी और इस दौरान परिवार से उसका संपर्क टूट गया था. यह बताता है कि कैसे कोरोना महामारी ने न जाने कितने लोगों की जिंदगी पर गहरा असर डाला और उन्हें अपनों से दूर कर दिया.
खुशी के आंसू और पुलिस का आभार
भागवती को सकुशल बरामद करने के बाद, पुलिस ने उसे उसके परिवार को सौंप दिया. चार साल बाद अपनी बेटी को देखकर परिवार की आंखें नम हो गईं. उनके लिए यह एक अविश्वसनीय क्षण था. उन्होंने फरसगांव पुलिस को दिल से धन्यवाद दिया और भावुक होकर अपना आभार व्यक्त किया. यह पल पुलिस की मेहनत और उनके समर्पण का सच्चा इनाम था.
“ऑपरेशन तलाश” – एक बड़ी सफलता
फरसगांव पुलिस का “ऑपरेशन तलाश” वाकई एक सराहनीय पहल है. इस ऑपरेशन के तहत अब तक 10 गुमशुदा व्यक्तियों को खोज निकाला गया है. यह सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि 10 परिवारों की खुशियां हैं, जिन्हें पुलिस ने वापस लौटाई हैं. इस उपलब्धि के लिए पूरे क्षेत्र में पुलिस की जमकर तारीफ हो रही है.
इस सफल कार्यवाही में थाना प्रभारी संजय सिन्दे, महिला प्रधान आरक्षक ममता ठाकुर (क्रमांक 283) और आरक्षक दीपक हलदार की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही. उनकी लगन और मेहनत ने इस असंभव से लगने वाले काम को मुमकिन कर दिखाया.
(Lost sister found after four years: Operation Talaash proved amazing again!)