जगदलपुर। Bastar Mati Movie बस्तर की माटी की खुशबू, दर्द, संघर्ष और उम्मीदों की कहानी अब बड़े पर्दे पर दिखने जा रही है। छत्तीसगढ़ी फिल्म “माटी” 14 नवंबर को राज्यभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। यह फिल्म सिर्फ एक प्रेमकथा नहीं है, बल्कि यह बस्तर की उस मिट्टी की आवाज है, जिसने दशकों तक हिंसा, संघर्ष और उम्मीदों के बीच खुद को संभाला है।
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फिल्म की खासियत यह है कि इसमें बस्तर के ही स्थानीय कलाकारों ने अभिनय किया है — जिनमें पूर्व माओवादी, शिक्षक, पत्रकार, स्थानीय जनप्रतिनिधि और आम नागरिक शामिल हैं। फिल्म के निर्देशक अविनाश प्रसाद और निर्माता संपत झा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि “माटी” सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा की अभिव्यक्ति है। Bastar Mati Movie
बस्तर के कलाकारों का प्रयास – अपनी मिट्टी के लिए एक श्रद्धांजलि
निर्देशक अविनाश प्रसाद ने बताया कि यह फिल्म चंद्रिका प्रोडक्शन के बैनर तले बनाई गई है और इसकी पूरी शूटिंग बस्तर में ही की गई है। यह पहला मौका है जब बस्तर के ही कलाकारों और तकनीशियनों ने मिलकर एक पूर्ण लंबाई की फिल्म बनाई है।
फिल्म की कहानी बस्तर के नक्सलवाद पर आधारित है, लेकिन इसमें केवल हिंसा नहीं, बल्कि उस क्षेत्र के लोगों के संघर्ष, जिजीविषा और उम्मीदों को भी दिखाया गया है। निर्देशक ने बताया कि फिल्म में 30 से 40 आत्मसमर्पित माओवादियों ने अपनी भूमिका निभाई है। इसके अलावा DRG (District Reserve Guard) के जवानों और अन्य स्थानीय कलाकारों ने भी अभिनय किया है।
अविनाश प्रसाद ने कहा,
“बस्तर वह इलाका है, जहां फिल्म निर्माण कोई रोजगार का साधन नहीं है। इसके बावजूद यहां के लोगों ने अपने दिल से इस फिल्म में योगदान दिया है। यह फिल्म बस्तर की मिट्टी, उसके संघर्ष और सामाजिक संदेश का प्रतीक है।”
फिल्म का उद्देश्य – बस्तर की असली छवि देश के सामने लाना
फिल्म के निर्माता संपत झा ने बताया कि बस्तर के बारे में बाहर के लोग एक तयशुदा छवि रखते हैं — एक ऐसा इलाका जो सिर्फ नक्सलवाद और हिंसा से जुड़ा है। जबकि हकीकत इससे कहीं अलग और गहरी है। Bastar Mati Movie
उन्होंने कहा,
“दिल्ली या देश के अन्य हिस्सों में बस्तर को लेकर जो बातें सुनते हैं, वह अधूरी हैं। यह फिल्म उस अधूरी तस्वीर को पूरा करेगी। इसमें दिखाया गया है कि बस्तर के लोग कितने संवेदनशील, मेहनती और उम्मीद से भरे हुए हैं।”
संपत झा ने यह भी बताया कि इस फिल्म में करीब 1000 लोगों ने काम किया है — सभी कलाकार बस्तर से ही हैं। फिल्म के माध्यम से बस्तर की खूबसूरत वादियों, संस्कृति, लोकजीवन और संघर्ष को दर्शाया गया है ताकि बस्तर की असली पहचान देश और दुनिया के सामने आ सके। Bastar Mati Movie
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“माटी” सिर्फ फिल्म नहीं, बस्तर की पहचान है
“माटी” एक ऐसी फिल्म है जो यह दिखाती है कि बस्तर की धरती सिर्फ संघर्षों की नहीं बल्कि संवेदनाओं की भी भूमि है। फिल्म के दृश्य बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, आदिवासी परंपराओं और वहां के लोगों की आत्मीयता को बखूबी उकेरते हैं।
14 नवंबर को जब यह फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होगी, तो यह सिर्फ एक मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि बस्तर की सच्ची कहानी बताने वाली दस्तावेज़ जैसी फिल्म होगी। Bastar Mati Movie
बस्तर के लिए गर्व की बात
बस्तर के कलाकारों और तकनीशियनों द्वारा बनाई गई यह फिल्म इस क्षेत्र के लिए गर्व की बात है। यहां के लोगों ने अपनी प्रतिभा, अपने संघर्ष और अपनी कहानियों को बड़े पर्दे पर उतारा है। यह फिल्म न सिर्फ स्थानीय लोगों की आवाज़ है बल्कि उन सभी के लिए प्रेरणा है जो अपनी मिट्टी से जुड़े रहकर बदलाव लाना चाहते हैं। Bastar Mati Movie
“माटी” की टीम का मानना है कि यह फिल्म आने वाले समय में बस्तर के लिए फिल्म इंडस्ट्री में नए अवसर भी खोलेगी और स्थानीय कलाकारों को एक नई पहचान दिलाएगी। Bastar Mati Movie
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रिलीज डेट: 14 नवंबर 2025
निर्माण: चंद्रिका प्रोडक्शन
निर्देशक: अविनाश प्रसाद
निर्माता: संपत झा
शूटिंग लोकेशन: बस्तर, छत्तीसगढ़
“माटी” एक ऐसी फिल्म है जो बस्तर की असलियत को महसूस कराती है — वहां की मिट्टी, वहां के लोग, उनका संघर्ष और उनकी उम्मीदें। यह फिल्म बताती है कि बस्तर की कहानियां सिर्फ सुनने के लिए नहीं, महसूस करने के लिए हैं। Bastar Mati Movie