जगदलपुर। Bastar Dussehra छत्तीसगढ़ का बस्तर दशहरा पर्व अपनी अनोखी परंपराओं और भव्यता के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। यहां हर साल आयोजित होने वाले इस अद्वितीय त्योहार का महत्व सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक भी है। शुक्रवार 26 सितंबर को इस पर्व का एक अहम हिस्सा फूल रथ की तीसरी परिक्रमा पूरे रीति-रिवाजों और उत्साह के साथ संपन्न हुई।
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इस मौके पर शहर के अलग-अलग हिस्सों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक जुटे। परिक्रमा का मार्ग जगदलपुर के जगन्नाथ मंदिर से शुरू होकर गोल बाजार चौक और गुरु नानक चौक से होते हुए वापस मां दंतेश्वरी मंदिर तक रहा। इस दौरान पूरा शहर भक्ति और आस्था के रंग में रंगा दिखाई दिया। Bastar Dussehra
परंपरा और आस्था का संगम
फूल रथ की परिक्रमा बस्तर दशहरा का एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। इस परंपरा के अनुसार रथ में मां दंतेश्वरी के छत्र को विराजमान किया जाता है। जैसे ही छत्र रथ पर स्थापित होता है, वैसे ही पूरा वातावरण श्रद्धा से गूंज उठता है। इस बार भी जैसे ही छत्र रखा गया, मौके पर मौजूद पुलिस जवानों ने हर्ष फायर कर सलामी दी। यह नजारा श्रद्धालुओं के लिए बेहद भावुक और यादगार बन गया।
जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी
इस आयोजन की विशेषता यह रही कि इसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों से लेकर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल हुए। जगदलपुर विधायक किरण देव पूरे समय परिक्रमा में मौजूद रहे और श्रद्धालुओं के साथ इस अनूठी परंपरा के गवाह बने।
इसके अलावा बस्तर संभाग के कमिश्नर डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी, कलेक्टर हरिस एस और पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा भी कार्यक्रम का हिस्सा बने। अधिकारियों ने परिक्रमा में भाग लेकर ग्रामीणों और श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ाया। रथ खींच रहे ग्रामीणों के साथ मिलकर उन्होंने इस अनूठे पर्व का महत्व साझा किया। Bastar Dussehra
सुरक्षा और व्यवस्था पर प्रशासन की नजर
इतने बड़े आयोजन को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न करने के लिए प्रशासन की ओर से विशेष तैयारियां की गई थीं। शहर में जगह-जगह पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो। वरिष्ठ अधिकारियों ने परिक्रमा के दौरान सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया और मौके पर मौजूद पुलिस-प्रशासनिक टीमों को दिशा-निर्देश भी दिए। Bastar Dussehra
पर्यटकों और श्रद्धालुओं की भीड़
बस्तर दशहरा सिर्फ स्थानीय लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन चुका है। फूल रथ की परिक्रमा देखने के लिए इस बार भी दूर-दराज से आए पर्यटक मौजूद रहे। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि इस अनूठे आयोजन का हिस्सा बनना उनके लिए सौभाग्य की बात है। Bastar Dussehra
सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक
बस्तर दशहरा की खासियत यही है कि यह किसी एक देवी-देवता तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की परंपरा में मां दंतेश्वरी के साथ-साथ स्थानीय देवी-देवताओं का भी विशेष स्थान है। फूल रथ की परिक्रमा इस गहरी आस्था और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है। यह आयोजन बस्तर की समृद्ध विरासत और स्थानीय समुदाय की सहभागिता को दिखाता है। Bastar Dussehra
विश्व मंच पर बस्तर की पहचान
हर साल बस्तर दशहरा की भव्यता और अनोखी परंपराएं इसे विश्व स्तर पर अलग पहचान दिलाती हैं। प्रशासन और स्थानीय लोग मिलकर इस त्योहार को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। फूल रथ की परिक्रमा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि बस्तर की संस्कृति कितनी समृद्ध और जीवंत है। Bastar Dussehra
बस्तर दशहरा का हर अनुष्ठान अपने आप में खास होता है, लेकिन फूल रथ की परिक्रमा का महत्व अलग ही है। यह आयोजन जहां एक ओर श्रद्धालुओं की आस्था को मजबूत करता है, वहीं दूसरी ओर बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर को भी जीवंत बनाए रखता है। इस साल की परिक्रमा में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की मौजूदगी ने न केवल आयोजन की गरिमा बढ़ाई, बल्कि यह संदेश भी दिया कि इस धरोहर को सुरक्षित रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। Bastar Dussehra
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