बलरामपुर। ( Atal Bihari Vajpayee Statue ) छत्तीसगढ़ राज्योत्सव की रौशनी पूरे प्रदेश को जगमगा रही है। राजधानी रायपुर से लेकर गांव की गलियों तक हर जगह उत्सव का माहौल है, झिलमिल लाइटों और सजावट से हर कोना चमक रहा है। लेकिन इसी बीच बलरामपुर जिले का अटल परिसर अब भी अंधेरे में डूबा है — मानो विकास की रफ्तार यहां आकर रुक गई हो।
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शहीद पार्क चौक के सामने लाखों रुपये की लागत से बना यह परिसर कभी जिले की पहचान और शान बनने का सपना था, पर आज वह तिरपाल के नीचे छिपा एक अधूरा सपना बनकर रह गया है। जिस प्रतिमा के अनावरण का सभी को इंतजार था, वह अब सिर्फ राजनीतिक उपेक्षा और प्रशासनिक उदासीनता की मिसाल बन गई है। ( Atal Bihari Vajpayee Statue )
भूमि पूजन हुआ, लेकिन अनावरण गायब
इस परिसर का भूमि पूजन बड़ी धूमधाम से हुआ था। उस दिन कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने मुस्कराते हुए नींव रखी थी, नारियल फोड़ा गया, माइक गूंजे और तस्वीरें खिंचीं। हर किसी को लगा था कि जल्द ही यह ( Atal Bihari Vajpayee Statue ) परिसर जनता को समर्पित होगा।
पर आज, महीनों बाद भी अटल जी की प्रतिमा तिरपाल में ढकी खामोश खड़ी है। ऐसा लगता है मानो विकास की फाइलें किसी टेबल पर धूल खा रही हों।
राज्योत्सव की चमक में छिपा अंधेरा
राज्य सरकार के निर्देशों के अनुसार पूरे प्रदेश में राज्योत्सव के अवसर पर भवनों को सजाने और रोशन करने के आदेश दिए गए। हर जिले में दीप प्रज्ज्वलित हो रहे हैं, मंच सजे हैं, भाषण हो रहे हैं। ( Atal Bihari Vajpayee Statue )
लेकिन विडंबना यह है कि बलरामपुर में वही अटल जी की प्रतिमा — जो जिले की शान बननी थी — अब भी अंधेरे में तिरपाल के नीचे कैद है।
नागरिकों का कहना है कि “अगर अटल जी जैसे महान नेता की प्रतिमा को भी ऐसी उपेक्षा झेलनी पड़े, तो यह सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि नैतिक विफलता है।” ( Atal Bihari Vajpayee Statue )
प्रतीक बन गया है अटल परिसर
अटल परिसर अब सिर्फ एक स्मारक नहीं, बल्कि राजनीतिक उपेक्षा और सम्मान की अनदेखी का प्रतीक बन चुका है। जहां कभी उद्घाटन की बातें होती थीं, अब वहां सन्नाटा पसरा है। लोग गुजरते हैं, देखते हैं, पर कोई जवाब नहीं देता।
एक स्थानीय नागरिक ने कहा — “अटल जी ने देश के विकास की नींव रखी थी, और यहां उनकी प्रतिमा की नींव रखकर उसे ढक दिया गया। क्या यही श्रद्धांजलि है?” ( Atal Bihari Vajpayee Statue )
समारोह कुछ कदम दूर, पर नजरें झुकीं
इसी बीच चिंतामणि महाराज ने जिले में राज्योत्सव रजत जयंती समारोह का शुभारंभ किया। मंच सजा, फूल बरसे, माइक गूंजे, बैनर लहराए। लेकिन उसी मंच से कुछ ही कदम की दूरी पर अटल जी की प्रतिमा धूल और तिरपाल में ढकी खड़ी रही।
यह नज़ारा मानो खुद लोकतंत्र की आंखें झुका देने वाला था। ( Atal Bihari Vajpayee Statue )
जनता की मांग — “अब तो अनावरण करो”
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि अब और देरी न की जाए। राज्योत्सव जैसे गौरवशाली अवसर पर अटल परिसर को भी रोशन किया जाए और प्रतिमा का अनावरण तुरंत किया जाए। ( Atal Bihari Vajpayee Statue )
नागरिकों का कहना है कि “अटल जी केवल एक नेता नहीं, बल्कि विचार थे — और विचारों को तिरपाल में कैद नहीं रखा जा सकता।” ( Atal Bihari Vajpayee Statue )
विकास का प्रतीक बने, उपेक्षा का नहीं
अटल जी की यह प्रतिमा जिले के लिए प्रेरणा का केंद्र बन सकती है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि अधिकारी और जनप्रतिनिधि राजनीतिक भाषणों से आगे बढ़कर संवेदनशीलता दिखाएं। ( Atal Bihari Vajpayee Statue )
क्योंकि अगर एक महान नेता की प्रतिमा भी सम्मान की प्रतीक्षा में ढकी रह जाए, तो विकास के सारे वादे सिर्फ पोस्टरों तक सिमट कर रह जाएंगे।( Atal Bihari Vajpayee Statue )
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राज्योत्सव की जगमगाहट में जब पूरा छत्तीसगढ़ जश्न मना रहा है, तब बलरामपुर की यह तिरपाल में कैद प्रतिमा हमें यह याद दिला रही है कि विकास सिर्फ रोशनी लगाने से नहीं, संवेदनाओं को जगाने से होता है।( Atal Bihari Vajpayee Statue )