कांकेर।
जिला प्रशासन कांकेर की ओर से 23 जुलाई को एक अनोखी और भावनात्मक पहल की शुरुआत की जा रही है – “एक पेड़ मां के नाम 2.0″। यह अभियान पर्यावरण को बचाने के साथ-साथ मातृत्व को सम्मान देने की एक खूबसूरत कोशिश है। इस दिन पूरे जिले में बड़े पैमाने पर पौधे लगाए जाएंगे।
इस विशेष वृक्षारोपण अभियान का उद्देश्य है – हरियाली को बढ़ावा देना, जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटना और लोगों को प्रकृति के साथ जोड़ना। यह अभियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सोच को धरातल पर उतारने की दिशा में एक अहम कदम है।
कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ की अगुवाई में होगा आयोजन
इस अभियान को सफल बनाने के लिए कांकेर जिले के कलेक्टर निलेश कुमार महादेव क्षीरसागर और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी हरेश मंडावी लगातार तैयारियों में जुटे हैं। उन्होंने बताया कि अभियान के तहत पूरा जिला पौधारोपण के रंग में रंगेगा और इसे एक महोत्सव के रूप में मनाया जाएगा।
हर गांव, हर मोहल्ला बनेगा हरा-भरा
जिले भर में कई स्थानों पर पौधारोपण किया जाएगा –
प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों के घरों के पास
शासकीय स्कूल, छात्रावास, आश्रम,
तालाबों और सड़कों के किनारे
इन जगहों पर पहले से स्थल चयन की प्रक्रिया चल रही है, ताकि पौधों की उचित देखरेख और वृद्धि सुनिश्चित की जा सके।
2140 आंगनबाड़ी केंद्र होंगे विशेष केंद्र
इस अभियान का सबसे खास पहलू है – जिले के 2140 आंगनबाड़ी केंद्र, जहां महतारी वंदन योजना से जुड़ी महिलाएं पौधारोपण करेंगी। ये पौधे सुपोषण वाटिकाओं के रूप में विकसित किए जाएंगे। यानी ये ना सिर्फ हरियाली लाएंगे, बल्कि बच्चों और महिलाओं के पोषण में भी सहायक होंगे।
इस तरह यह पहल मातृत्व, पोषण और पर्यावरण संरक्षण – तीनों को जोड़ती है।
जनभागीदारी से बनेगा अभियान ऐतिहासिक
जिला पंचायत सीईओ हरेश मंडावी ने बताया कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि जनता की भागीदारी से एक जनआंदोलन बनना चाहिए। इसके लिए उन्होंने जनप्रतिनिधियों, ग्रामीणों, महिला स्व-सहायता समूहों, स्थानीय कर्मचारियों, स्कूली बच्चों और आम नागरिकों से सक्रिय रूप से जुड़ने की अपील की है।
पर्यावरण संरक्षण का संदेश हर घर तक पहुंचे
“एक पेड़ मां के नाम 2.0” एक भावनात्मक संदेश देता है – जैसे मां जीवन देती है, वैसे ही पेड़ धरती को जीवन देते हैं। जब कोई व्यक्ति अपनी मां के नाम पर एक पौधा लगाता है, तो उसमें भावनात्मक जुड़ाव होता है। यह न सिर्फ उस पौधे की सुरक्षा की जिम्मेदारी तय करता है, बल्कि लोगों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील भी बनाता है।
आइए, इस अभियान से जुड़ें
अगर आप कांकेर जिले के निवासी हैं या इस नेक पहल से जुड़ना चाहते हैं, तो 23 जुलाई को अपने क्षेत्र में चल रहे वृक्षारोपण अभियान का हिस्सा जरूर बनें। एक पेड़ लगाएं, मां को श्रद्धांजलि दें और धरती को हरियाली का तोहफा दें।