इंदौर में पुलिस और सामाजिक संगठनों के द्वारा साइबर अपराध की रोकथाम के लिए तमाम जागरूकता अभियान चलाने के बावजूद भी चौंकाने वाले आंकड़े सामने आ रहे हैं जिसमें साइबर क्राइम ब्रांच की टीम द्वारा पिछले 4:30 साल का आंकड़ा सामने आया जिसमें 30 करोड़ 79 लाख रुपए वापस करवाए।
वियो क्राइम ब्रांच एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया के मुताबिक साइबर अपराध के आंकड़े जागरूकता के कारण काम जरूर हुए हैं लेकिन रुक नहीं है उनका कहना है कि साइबर अपराध लगातार बढ़ रहा है क्योंकि कई अधिकांश ऐसे मामले देखे गए कि जिन मामलों में जागरूकता फैलाई जाती है उसके बाद साइबर अपराधी नया अपडेट साइबर अपराध क्रिएट कर लेते हैं जिसके कारण लोगों को भ्रमित कर अपने जाल में फसाते हैं और फिर विभिन्न तरह से साइबर अपराध की घटनाओं को अंजाम देना पिछले दिनों फर्जी हाउस अरेस्टिंग की घटनाएं बड़ी थी जिस मामले में जागरूकता की गई तो अब वह मामले काफी हद तक काम हो गए लेकिन ऑनलाइन पेमेंट और ट्रांजैक्शन के ओटीपी नंबरों के आधार पर या मामले बढ़ रहे हैं जिसमें अधिकांश युवाओं को निशाना बनाया जा रहा है पिछले 4:30 वर्षों की बात करें तो
साल। रुपए करोड़ में
2021 1 करोड़ 37 लाख
2022 3 करोड़ 92 लाख
2023 5 करोड़
2024 14 करोड़ 17 लाख
2025 6 करोड़ 33लाख(6 माह)
यह कुल मिलाकर 4:30 वर्षों के आंकड़े हैं जिससे यह साबित होता है कि किस तरीके से साइबर अपराधियों ने केवल इंदौर जिले में ही इतने करोड रुपए का साइबर अपराध करने का प्रयास किया जिसमें साइबर क्राइम ब्रांच ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मिली शिकायत के आधार पर निराकरण किया जबकि इसे अधिकांश जैसे मामले हैं जिनमें साइबर क्राइम ब्रांच शिकायत की देरी के कारण रुपए वापस नहीं करवा पाई है यह आंकड़े ही बताते हैं कि भारत में साइबर अपराध का कितना बड़ा जाल फैला हुआ है और अपराधी किस तरीके से साइबर अपराध को अंजाम देने साइबर अपराध से बचने के लिए केवल मात्र जागरूकता ही एक मूल कारण है ।